सूरजमुखी की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

सूरजमुखी एक तिलहनी फसल हैं। देश में मूंगफली, तोरिया- सरसों एवं सोयाबीन के बाद यह चौथी महत्वपूर्ण फसल हैं। देश में सूरजमुखी को सभी मौसमों में उगाया जा सकता हैं। उतरी भारत में इसे जायद में उगाया जाता हैं। खरीफ में धान एवं रबी में गेहू की वजह से खेत खाली नहीं मिलते हैं। इसके… Read More »

अदरक की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

अदरक भारत की एक नकदी फसल हैं। विश्व के कुल उत्पादन का 60% उत्पादन भारत में होता हैं एवं इसे विदेशो को निर्यात करके काफी विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती हैं। भारत में लगभग 37000 हेक्टेयर भूमि पर इस फसल को उगाकर 45000 टन शुद्ध उतपादन प्राप्त होता हैं। भारत में इस फसल की… Read More »

अधिक उत्पादन के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियाँ

कृषि के बदलते परिवेश में, बढ़ते तापमान, पर्यावरण प्रदूषण, मृदा ह्रास एवं बीमारियों के प्रकोप को कम करने के लिए उन्नत एवं स्वच्छ क्रियाओं को अपनाना आवश्यक है। कृषि उत्पादन के प्रत्येक पहलुओं जैसे खेत की तैयारी, खेत का चुनाव, खरपतवार नियंत्रण, पौध सरंक्षण, फसलोत्तर प्रबंधन, फसल कटाई, कृषि पद्धतियाँ महत्वपूर्ण  हैं। सुथरी कृषि पद्धतियाँ … Read More »

रासायनिक उर्वरक प्रयोग,महत्व एवं उपयोग विधि

मृदा में जिन पोषक तत्वों की कमी होती है उन्ही के अनुसार उपयुक्त उर्वरक उस मृदा में डालने चाहिए। लेकिन फसलों द्वारा उनका कृषक उपयोग उर्वरकों के डालने की विधि तथा समय पर निर्भर करता है। अधिकांश मृदाओं का उर्वरक स्तर कम होने के कारण उन पर उर्वरकों के प्रयोग का असर शीघ्र होता है।… Read More »

मूँग की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

मूँग का प्रयोग मुख्य रूप से दालों के रूप में होता है और प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में खरीफ के मौसम में मूँग की खेती 19.28 हजार हेक्टेयर में की जाती हैं, रबी के मौसम में मूँग की खेती 23.79 हजार हेक्टेयर में की जाती हैं इसका औसतन उत्पादन 350-… Read More »

जैविक खेती – फसल उत्पादन एवं महत्व

जैविक खेती देसी खेती का उन्नत तरीका है। जहाँ प्रकृति व पर्यावरण को संतुलित रखते हुए खेती की जाती है। इसमें रसायनिक खाद, कीटनाशकों का उपयोग नहीं करते हैं खेत में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष , फसल चक्र एवं प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे रॉक फॉस्फेट, जिप्सम आदि से पौधों को… Read More »

हल्दी की उन्नत खेती एवं बीज संरक्षण,प्रक्रियाकरण(क्योरिंग)

इसकी मूल जड़ में अदरक के सामान कन्द होते हे जिसे हल्दी कहते हैं। हल्दी एक बहुवर्षीय शाकीय पौधा हैं इसका  वानस्पतिक नाम कुरकुमा लोंगा हैं एवं जिंजिवरेंसी कुल का सदस्य हैं। हल्दी का मूल स्थान भारत ही माना जाता हैं। इसका पौधा भारत में प्रत्येक स्थान पर पाया जाता हैं। भारत की विभिन्न मसाले… Read More »

लौकी की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

लौकी की बैलों की अच्छी वृद्धि 25 से 30 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर  होती हैं। इनके लिए उपजाऊ दोमट भूमि जहां पानी का निकास अच्छा हो उत्तम होती हैं। इनकी खेती गर्मी और वर्षा दोनों ऋतुओ में की जाती हैं। किस्मे लौकी में पूसा समर प्रोलीफिक लौंग, पूसा प्रोनिफिक राउंड, पूसा मंजरी(संकर गोल), पूसा नविन,… Read More »

तरबूज और खरबूज की उन्नत खेती की तकनीक

तरबूज और खरबूज जायद मौसम की प्रमुख फसल हैं। इसकी खेती मैदानों से लेकर नदियों के पेटे में सफलतापूर्वक की जा सकती हैं। ये कम समय, कम खाद और कम पानी में उगाई जा सकने वाली फसलें हैं। उगने में सरल, बाजार तक ले जाने में आसानी और अच्छे बाजार भाव से इसकी लोकप्रियता बढाती… Read More »

उड़द की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

उड़द एक दलहनी फसल हैं। उड़द को खरीफ में उगाने के साथ- साथ जायद में भी इसकी सफल खेती की जा सकती हैं। फॉस्फोरस अम्ल अन्य दालों की तुलना में 8 गुना अधिक होता हैं। उड़द में प्रोटीन 24% तथा कार्बोहाइड्रेड 60% पाया जाता हैं। उड़द की खेती करने से 45 किलोग्राम नाइट्रोजन भूमि को… Read More »