Category Archives: agriculture

चूहों से बचाए फसल एवं भंडारण में रखे बीज को

बीजों के प्रसंस्करण में इनके सुरक्षित भंडारण का विशेष महत्व हैं, फसलों के बेहतर उत्पादन में कृषकों द्वारा बीजों की गुणवत्ता तथा अच्छी किस्मों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं। यहाँ तक की कृषि की ुअनंत तकनीकों का समावेश बीजों को तैयार किया जाता हैं, ततपश्चात इन्ही बीजों का भण्डारण कर आगामी मौसम… Read More »

गहरी जुताई का गर्मियों की कृषि में महत्व

किसान खेत की जुताई का काम अक्सर बुवाई के समय करते हैं। जबकि फसल के अच्छे उत्पादन के लिए रबी फसल की कटाई के तुरंत बाद मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई कर ग्रीष्म ऋतू में खेत को खाली रखना बहुत ही ज्यादा लाभप्रद हो सकता हैं। क्योंकि फसलों में लगने वाले कीट जैसे… Read More »

ड्रिप सिंचाई प्रणाली से कम लागत में अधिक उत्पादन

ड्रिप सिंचाई प्रणाली के माध्यम से पौधों के जड़ क्षेत्र में नियंत्रित मात्रा में पानी देने से इसके अपव्य को रोका जा सकता है। सीमित जल संसाधन से अधिक से अधिक सिंचाई करके जायदा लाभ प्राप्त किया जा सकता है। देश में क्षेत्रफल की दृष्टि से सूक्ष्म सिंचाई में सर्वाधिक अग्रणी राज्य क्रमश: महाराष्ट्र, कर्नाटक,… Read More »

हरी खाद का जैविक खेती में उपयोग एवं महत्व

वर्तमान समय में खेती का यंत्रीकरण होने के कारण पशुपालन कम हो रहा है जिससे गोबर की खाद एवं कम्पोस्ट जैसे कार्बनिक स्रोतों की सीमित आपूर्ति के कारण हरी खाद का प्रयोग करके ही मृदा उर्वरकता एवं उत्पादकता में टिकाऊपन लाया जा सकता है । सघन कृषि पद्धति तथा अधिक मात्रा में रासायनिक उर्वरकों के उपयोग… Read More »

वर्मीकम्पोस्ट बनाने की उन्नत तकनीक

वर्मीकम्पोस्ट जैविक खेती में एक प्रमुख खाद निर्माण की तकनीक है इस तकनीक से खेती को कम खर्चीला बनाया जा सकता है तथा मृदा स्वास्थ्य को अच्छा बनाये रखने एवं लम्बे समय तक अच्छा उत्पादन प्राप्त करने के लिए जैविक खेती को अपनाना आवश्यक है। केंचुए के बारे में जानकारी प्रकृति में लगभग केंचुए की… Read More »

अश्वगंधा की जैविक खेती एवं औषधीय महत्व

अश्वगंधा की फसल समस्त शुष्क क्षेत्रों, मैदानी भागों की बेकार भूमियों से लेकर हिमालय में 1800 मी. की ऊंचाई तक पाया जाता हैं। मध्यप्रदेश में, राजस्थान की सिमा सा सटे नीमच एवं मंदसौर में इसकी खेती बड़े पैमाने पर की जा रही हैं। तथा राजस्थान के नागौर एवं आसपास के क्षेत्र एवं पंजाब के तराई… Read More »

कालमेघ की वैज्ञानिक खेती एवं औषधीय महत्व

  कालमेघ आयुर्वेदिक एवं होम्योपैथिक चिकित्सा में प्रयोग किया जाने वाला पादप हैं। इस पौधे के सभी भागो का प्रयोग ओषधि के रूप में किया जाता हैं। यह वनों में जंगली पौधे के रूप में पाया जाता हैं। कुछ वर्षों से इसके औषधीय उपयोगिता को देखते हुए इस पर कई प्रकार के शोध कार्य किये… Read More »

नीम का जैविक खेती में उपयोग एवं महत्व

नीम का वृक्ष प्रकृति का अनुपम उपहार हैं। नीम से तैयार किये गए उत्पादों का कीट नियंत्रण अनोखा हैं, इस कारण नीम से बनाई गई दवा विश्व में सबसे अच्छी कीट नियंत्रण दवा मानी जाती हैं। लेकिन इसके उपयोग को लोग अब भूल रहे हैं। इसका फायदा अब बड़ी-बड़ी कम्पनिया उठा रही हैं ये कम्पनिया… Read More »

खरपतवारनाशी का खरीफ फसलो में उपयोग

खरीफ/वर्षा के मौसम में अनियंत्रित खरपतवार अधिक उत्पादन की मुख्य समस्या हैं। क्योकि इस समय जलवायु खरपतवारोंकी बढ़वार एवं विकास हेतु बहुत ही अनुकूल होती हैं .इस मौसम में खरपतवारों की सघनता रबी एवं जायद मौसम की तुलना में कई गुना ज्यादा होती हैं फलस्वरूप उत्पादन में इतनी गिरावट आती हैं की कभी- कभी तो… Read More »

मूँगफली की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

मूँगफली तिलहनी फसलों में से एक महत्वपूर्ण फसल हैं यह सभी प्रकार की तेल वाली फसलों में से सर्वाधिक सूखा सहन करने वाली फसल हैं, इसलिए इसे तिलहनी समूह की फसलों का “राजा” कहा जाता हैं। इसमें तेल(45-55%) एवं प्रोटीन (28-30%) अधिकता के कारण अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक मात्रा में ऊर्जा प्रदान करती हैं।… Read More »