Category Archives: agriculture

जलवायु परिवर्तन का कृषि एवं पर्यावरण पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन विश्व की सबसे ज्वलंत पर्यावरणीय समस्याओं में से एक हैं। नवम्बर-दिसम्बर मध्य तक ठण्ड का अहसास नहीं होना, फरवरी-मार्च तक सर्दी पड़ना, अगस्त-सितम्बर से वर्षा होना तथा अक्टुम्बर-नवम्बर माह तक गर्मी पड़ना तापक्रम ज्यादा होना, ये सब कुछ मौसम में होने वाले बदलाव के कारण होता हैं। मौसम, किसी भी स्थान की औसत… Read More »

फसल चक्र का आधुनिक खेती में उपयोग एवं महत्व

किसी भी व्यवसाय को प्रारम्भ करने के लिए कई प्रकर के आदानों की आवश्यकता पड़ती हैं। जिन्हे दो भागो में विभक्त किया जा सकता हैं, मोद्धिक एवं अमोद्धिक आदान। व्यवसाय की सफलता दोनों के उचित समन्वय पर निर्भर करती हैं। कृषि क्षेत्र में मोद्धिक आदान जैसे बीज, उर्वरक,पादप सरक्षण रसायन, विभिन्न प्रकार के उपकरण व… Read More »

अरहर की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

अरहर का दलहनी फसलों में प्रमुख स्थान। अरहर की खेती असिंचित एवं सिंचित दोनों दशाओं में की जाती है। 85% अरहर की खेती असिंचित बरानी खेती के रूप में की जाती है। तथा केवल 15%  सिंचित क्षेत्रफल में अरहर की खेती की जाती है। देश की औसत उत्पादकता 678 किग्रा. प्रति हेक्टेयर है जबकि प्रदेश… Read More »

क्वालिटी प्रोटीन मक्का की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

मक्का एक महत्वपूर्ण मोटे अनाज की फसल हैं। भारत में उत्पादित आधे से अधिक मक्का का प्रयोग रोटी, भुट्टा, सत्तू, दलिया, हरी गुल्लियों आदि के रूप में किया जाता हैं। मक्का के दाने, पशुओं, मुर्गीपालन, सूअर आहार अथवा मछली के भोजन के लिए महत्वपूर्ण हैं। मक्का के भ्रूणपोष में लगभग 9-12% प्रोटीन होती हैं। हालाँकि… Read More »

जैव उर्वरक एवं जैव नियंत्रण द्धारा आधुनिक खेती

सम्पूर्ण विश्व में स्वस्थ जीवन एवं पर्यावरण की आवश्यकता महसूस की जा रही हैं। हमारे देश में हरित क्रांति को फसल बनाने हेतु रासायनिक उर्वरकों एवं कृषि रसायनों का उपयोग बढ़ा, फलतः अनाज के उत्पादन में तो हम आत्मर्निभर हो गए, परन्तु अनाज गुणवत्ता प्रभावित होने के साथ-साथ मानव स्वास्थ्य, पशु-पक्षियों, मछलिया लाभदायक कीटों, मृदा… Read More »

मक्का (स्वीट कॉर्न एवं बेबी कॉर्न) की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

मक्का को विश्व में खाद्यान फसलों की रानी कहाँ जाता हैं क्योंकि इसकी उत्पादन क्षमता खाद्यान फसलों में से सबसे अधिक हैं। पहले मक्का को विश्व में गरीबों का मुख्य भोजन माना जाता था जबकि अब ऐसा नहीं हैं। अब इसका उपयोग मानव आहार (24%), साथ-साथ कुक्कुट आहार (44%), स्टार्च (12%), गरीब(2%),पशु आहार (16%) तथा… Read More »

बागवानी से साकार कर रहे किसान अपने सपने

जालोर के किसानों ने सपने में भी रेट के धोरो में खजूर, अनार जैसे फल एवं सब्जियों के उत्पादन की कल्पना नहीं की थी। परम्परागत खेती करने वाले किसानों ने जलवायु में परिवर्तन देख वक्त की नजाकत को समझा और बागवानी करने की ठान ली। परिणाम अच्छे रहे और बदलाव की बयार चल पड़ी। अब… Read More »

नर्सरी में प्रो ट्रे तकनीक से तैयार करें सब्जियों की पौध

काश्तकार अब परम्परागत फसल के साथ सब्जी उत्पादन पर भी ध्यान देने लगे हैं। सब्जी उत्पादन अधिक हो, इसके लिए नर्सरी में प्रो ट्रे जैसी आधुनिक प्रणालियों से तैयार पौध का रोपण किया जाने लगा हैं। किसानों को इसके अच्छे परिणाम भी मिलने लगे हैं और उत्पादन बढ़ने लगा है। नर्सरी में प्रो ट्रे का उपयोग  … Read More »

तिल की उन्नत खेती एवं उत्पादन की उन्नत तकनीक

तिल उत्पादन की उन्नत तकनीक तिलहन उत्पादन में मूंगफली व सरसों के बाद तिल का प्रमुख महत्वपूर्ण योगदान है।  मध्यप्रदेश प्रमुख तिल उत्पादन राज्य है।  मध्यप्रदेश में तिल का क्षेत्रफल 1.72 लाख हेक्टेयर और उत्पादन 0.43 लाख टन है।  प्रदेश की औसत उपज केवल 2.46 क्विंटल प्रति हेक्टेयर ही है।  मध्यप्रदेश में तिल की खेती… Read More »

कपास की फसल में पोषक तत्वों का प्रबंधन कैसे करें

कपास के पौधे प्रति हेक्टेयर 40 किलो ग्राम नत्रजन, 10-15 किलो फॉस्फोरस अम्ल और 45 किलो ग्राम पोटाश भूमि से औसत रूप से निकाल लेने के संकेत हैं। कपास के सुचारु पोषण का महत्व इस बात से भी प्रतिलंबित होता हैं की 100 किलो कपास पैदा करने में 7 किलो नत्रजन 2 किलो स्फुर और… Read More »