Category Archives: agriculture

अरबी की उन्नत खेती एवं अधिक उत्पादन

अरबी भूमिगत शाखीय फसलों में से एक महत्वपूर्ण फसल है। अरबी सब्जियों के लिए विभिन्न रूप से उपयोग की जाती है। इसके कंदों को उबालकर सब्जियों के रूप में या उपवास में फलाहार के रूप में उपयोग में लिया जाता है। इसकी चोडी- चोडी पतियों की करेला और पालक की तरह सब्जी बनाई जाती है। पत्तियों… Read More »

करेले की उन्नत जैविक खेती मचान विधि से

करेला  एक कद्दूवर्गीय सब्जी है स्वाद में कड़वा होने पर भी लोग करेले को पसंद करते है। सब्जी के रूप में इसका बहुत ही उपयोग होता है। जलवायु करेले के लिए गर्म एवं आद्र जलवायु की आवश्यकता होती है।  करेला अधिक शीत सहन कर लेता है परन्तु पाले से हानि होती है। भूमि इसको विभिन्न… Read More »

बीज उत्पादन की उन्नत तकनीक कद्दूवर्गीय सब्जियों में

भारत में कद्दूवर्गीय कुल की लगभग 20 प्रकार की सब्जियों की जाती है। इनमें घीया/लौकी, तोरई, करेला, खीरा, तरबूज, खरबूज, ककड़ी, कद्दू, चप्पन कद्दू, टिण्डा, परवल, फुट आदि मुख्य है। खीरा वर्गीय  सब्जियों के बीज उत्पादन के लिए सब्जी उत्पादन सम्बन्धी सामान्य क्रियायों के साथ-साथ, निम्न बातों का ध्यान रखना चाहिए। बीज उत्पादन खेत का… Read More »

यंत्र – आधुनिक कृषि में उपयोग एवं सावधानियाँ

कृषि कार्यो को करने के लिए हम कई तरह के यंत्रों का उपयोग अपने दैनिक जीवन में करते है। अक्सर लोग कार्य करने की जल्दबाजी में दुर्घटना के शिकार हो जाते है। निश्चितरूप से हम यंत्र का उपयोग कार्य जल्दी पूरा करने के लिए करते है पर दुर्घटना को बुलाने के लिए नहीं। अतः यंत्रो… Read More »

मल्च के प्रयोग से सब्जी उत्पादन में 60% तक बढ़ोतरी

मल्च का प्रयोग बदलते दौर के साथ किसान बागवानी की उन्नत विधियां अपनाने लगे हैं। सब्जियों की उन्नत खेती में मल्चिंग यानी पलवार की अहम भूमिका हैं। यह कई तरह की होती हैं, जैसे जैविक मल्चिंग, प्लास्टिक मल्चिंग और डस्ट मल्चिंग। वर्तमान समय में मल्चिंग बेहतर उत्पादन के लिए अधिक कारगर साबित हो रही हैं। इस… Read More »

यंत्रीकरण आधुनिक कृषि में यंत्रों का चुनाव एवं उपयोग

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान हैं, जो की सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 25% हैं। आधुनिक समय में कृषि कार्य को समय पर पूर्ण करने तथा कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु कृषि का यंत्रीकरण अत्यंत आवश्यक हैं। विज्ञानं एवं प्रद्योगिकी के सिद्धांतों का कृषि के क्षेत्र में मानव श्रम को… Read More »

जैव विविधता और आर्थिक मूल्य एक परिपेक्ष्य, महत्व

जीवन की विविधता पृथ्वी पर मानव के अस्तित्व और स्थाईत्व को मजबूती प्रदान करती हैं। समृद्ध जैव विविधता अच्छा स्वस्थ्य, खाद्द्य सुरक्षा, आर्थिक विकास, आजीविका सुरक्षा और जलवायु की परिस्थितियों को सामान्य बनाए रखने का आधार हैं। भारत एक प्राकृतिक सम्पन्न देश हैं और प्राचीनकाल से भारत प्राकृतिक संसाधनों का एक प्रमुख अंग हैं। पृथ्वी… Read More »

प्लास्टिक कल्चर का कृषि में उपयोग एवं महत्व

आज के युग में प्लास्टिक का उपयोग दैनिक जीवन के हर क्षत्र में बढ़ रहा हैं, कृषि जगत भी इससे अछूता नहीं हैं। लोहे व लकड़ी का उपयोग कम हुआ हैं और इसकी जगह प्लास्टिक ने ले ली हैं। प्लास्टिक में बहुत सी खुबिया पाई जाती हैं, जिसके चलते बढ़ी तेजी से इसका उपयोग बड़ा… Read More »

ट्राइकोडर्मा जैव -उर्वरकों के उपयोग का कृषि में महत्व

ट्राइकोडर्मा विरिडी ट्राइकोडर्मा हारजिएनम आदि ऐसे मित्र फफूँद हैं जो स्वयं के विकास से पौधों के मृदा व बीज जनित रोगो के रोग कारको को सकारात्मक रूप से बढ़कर जकड़ लेते हैं और उसकी कोशिका झिल्ली को पूरी तरह नष्ट कर देते हैं।भूमि जनित फफूंद रोग जैसे जड़गलन, उखटा, झुलसा, तना, गलन एवं अन्य भूमिगत… Read More »

चूहों से बचाए फसल एवं भंडारण में रखे बीज को

बीजों के प्रसंस्करण में इनके सुरक्षित भंडारण का विशेष महत्व हैं, फसलों के बेहतर उत्पादन में कृषकों द्वारा बीजों की गुणवत्ता तथा अच्छी किस्मों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं। यहाँ तक की कृषि की ुअनंत तकनीकों का समावेश बीजों को तैयार किया जाता हैं, ततपश्चात इन्ही बीजों का भण्डारण कर आगामी मौसम… Read More »