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हाइड्रोपॉलिक खेती – मकान की छत पर उगाई सब्जियां

हाइड्रोपॉलिक खेती
Written by bheru lal gaderi

 बिना जमीन, मिट्टी पानी में उगा लिए ककड़ी-टमाटर

खेती करने के लिए प्राथमिक आवश्यकता मिट्टी होती है। लेकिन अब चित्तौड़गढ़ में प्रकाश पुरी ने जमीन, मिट्टी और खाद के बिना केवल पानी से लौकी उगाने में सफलता प्राप्त की है। दूसरी और कृषि विभाग के अधिकारी जलीय खेती(हाइड्रोपॉलिक खेती) को लेकर अंजान बने हुए हैं।

चित्तौड़गढ़ के गांधी नगर में रहने वाले प्रकाश पुरी ने अपने मकान की छत पर मात्र रु.22000 की लागत से जलीय खेती के लिए स्ट्रेक्चर तैयार करने में सफलता प्राप्त की है। पूरी ने 4 माह पहले ही जलीय खेती शुरू की थी। इसे मूलतः इजरायल की खेती कहते हैं। जिसे हाइड्रोपॉलिक पद्धति के नाम से जाना जाता है। हाइड्रोपॉलिक खेती में पानी की खपत दस फीसदी भी नहीं होती  है।  पोधों को जितने पानी की जरूरत होती है, उतना पानी ही काम आता है। शेष पानी पुनः ड्रम में एकत्रित हो जाता है। पूरी की मने तो पूरा मार्गदर्शन मिलने  इस खेती को और अधिक बढ़ावा मिल सकता है।

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हाइड्रोपॉलिक खेती की तारीफ से मिली प्रेरणा

पुरी का कहना है कि पिछले दिनों प्रधानमंत्री इजरायल गए थे, तो उन्होंने हाइड्रोपॉलिक खेती को लेकर इजराइल की तारीफ की थी। इससे प्रेरणा लेकर उन्होंने ठान लिया कि वह जलीय खेती करेंगे।

नारियल बुरादे एवं कंकड़ में बुवाई

सब्जियों के बीजों की बुवाई नारियल के बुरादे और छोटे छोटे कंकड़ में की। लेकिन एक जैसे परिणाम मिलने के बाद पूरी ने नारियल के बुरादे के बजाय कंकड़ में तने लगाकर सब्जियों उगना शुरू किया। नारियल बुरादे में फफूंद की शिकायत हो सकती है। जलीय खेती का नया मामला है। हमें इस बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है।

हेमराज मीणा

कृषी अधिकारी- चित्तौड़गढ़

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नकली बीज

पुरी का कहना है की वे बाजार से बीज लेकर आए थे, लेकिन एक ही थैली में चार तरह के बीज निकले। कृषि अधिकारियों से भी इस बारे में बात की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। किसान बुवाई करता है और चार माह में परिणाम मिलते हैं तब तक हजारों रूपये का खर्च हो चुके होते हैं।

कृषि विभाग के अधिकारी है अनजान 

पूरी का कहना है की उन्होंने तीन-चार विश्वविद्यालय से हाइड्रोपॉलिक खेती के बारे में जानकारी ली। जोधपुर विश्वविद्यालय से पता चला कि वहां तो इसका सिर्फ डेमो ही बनाया गया था। उदयपुर से इस बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पाई। चित्तौड़गढ़ के अधिकारियों ने हाइड्रोपॉलिक खेती के बारे में जानकारी देने के मामले में हाथ ही खड़े कर दिए। उन्होंने भिंडी,टमाटर, लौकी, खीरा, करेला अनानास आदि की बुवाई की है।

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स्रोत :-

राजस्थान पत्रिका

Websit – www.patrika.com

 

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