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हल्दी की क्योरिंग (प्रक्रियाकरण) तकनीक

हल्दी की क्योरिंग 
Written by bheru lal gaderi

नमस्ते किसान भाइयों आज इस लेख में हम हल्दी की क्योरिंग की विधि के बारे में जानेंगे की कैसे कृषि प्रसंस्करण के द्वारा अपनी फसल उपज को परिष्कृत कर सीधे बाजार में बेचा जा सकता है।

हल्दी की क्योरिंग में

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हल्दी की क्योरिंग के मुख्य चार चरण होते हैं।

  1. उबालना अथवा पकाना
  2. सुखाना
  3. पॉलिशिंग
  4. रंगाई

उबालना अथवा पकाना:-

कंदो को धोने के उपरांत अच्छी तरह उबाला जाता हैं। उबलते समय चुने के पानी अथवा सोडियम कार्बोनेट का उपयोग किया जाता हैं। उबलने की क्रिया लगभग 45- 60 मिंट तक की जाती हैं। ( जब तक झाग आना अथवा एक विशेष प्रकार की गंध आना आरंभ न हो जाये) यह ध्यान रखना चाहिए की हल्दी की गांठें पूर्णतया उबल जाये। उबली हुई गाठ अंगुलियों से दबाने पूर्णतया दब जाये तो इसका अर्थ हैं की उबलने की प्रक्रिया पूर्ण हो चुकी हैं। उबलने का कार्य फसल की खुदाई के 2- 3 दिन के अंदर सम्पूर्ण कर लिया जाना चाहिए अच्छी तरह उबलने से हल्दी के सूखने की प्रक्रिया 10- 15 दिन में ही सम्पूर्ण हो जाती हैं तथा कंदो के अंदर के रंग में एक रूपता आ जाती हैं।

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बॉईलर (कुकर) में हल्दी उबालना 

 

बॉईलर मे तीन टंकियां होती है। एक बडी दो छोटी होती है। बडी टंकी में पानी एक तिहाई भरा जाता है। बडी टंकी में नीचे आग के लिए जगह होती है। आग जलाने पर पानी कि भाप ( स्टीम ) तैयार होती है। छोटी टंकियो मे हल्दी के कंद भरे जाते है। बडी टंकी से छोटी टंकी मे भाप जाने के लिए लोहे के पाईप द्वारा जोडा जाता है। दोनो टंकियों मे वॉल होता है। जैसे ही भाप (स्टीम) तैयार होती है, एक टंकी का वॉल खोल दिया जाता है।

जब हल्दी बॉईल हो जाती है तो टंकी के नीचे निकास द्वार होता है। यहा से भाप (स्टीम ) निकलने लगती है, तो समझिये हल्दी बॉइल हो गई। इसके  स्टीम वॉल बंद किया जाता है, और दुसरी टंकी का स्टीम वॉल खोला जाता है। स्टीम भाप का उच्चतम दबाव होने पर हर 15-20 मिनिट में एक टंकी बॉईल होती है। टंकी का नीचे का निकास द्वार खोल कर दो पहियों वाली ट्रे मे एकट्ठा कर जमीन पर नेट या पुरानी साड़ियों पर बिछाकर ढेर बनाया जाता है।

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हल्दी को सुखना

हल्दी की क्योरिंग 

एक टंकी से थोडी-थोडी दुरी पर चार ढेर लगाते है, ताकी फैलाने में आसानी हो। दो दिन के बाद बॉइल हल्दि के ढेर को फैलाया जाता है। हल्दी को ज्यादा न फैलाकर इस रह से लाया जाता है, की गांठे एक दुसरे से चिपक कर रहे। ज्यादा दुरी पर फैलाने से कंदो में झूरिया पड जाती है, कंद टेडी हो जाते है और क्वालिटी कमजोर हो जाती है। रोज सुबह कंद को हाथ से पलटते है, ताकी कंद हर साईड से सुख जाये। 15-20 दिन सुखाने के बाद कंद कठोर होने पर टाट के बोरे (bag) मे भर लेते है।

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हल्दी की क्योरिंग में पॉलिशिंग

सुखी हुई हल्दी को आकर्षक बनाने के लिए पॉलिशिंग की आवशयकता पड़ती हैं। इस कार्य हेतु हस्त चलित अथवा पावर घुमावदार ड्रम की आवशयकता पड़ती हैं, जिसमे गाठों को गुमाने से गांठे आपस में घर्षण करती हैं, जिसके परिणाम स्वरूप इनकी पॉलॉशिंग की प्रक्रिया पूर्ण होती हैं।

हल्दी की क्योरिंग में रंगाई

हल्दी का अच्छा रंग ग्राहकों को आकर्षित करता है। इसके लिए हल्दी की सुखी गांठी में 2. कि. ग्रा./क्विंटल की दर हल्दी का पाउडर मिलाया जाता है।

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