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हंसालिम को-ऑपरेटिव की कहानी दक्षिण कोरिया

हंसालिम को-ऑपरेटिव
Written by bheru lal gaderi

दक्षिण कोरिया में कृषि की स्थिति 

देश की कुल भूमि के 70 % भाग पर पहाड़ हैं और 30 % भूमि पर खेती की जाती है, इसमें से 1% भूमि पर जैविक खेती की जाती है। इस 1 % भूमि का 90 % हिस्सा गोशियन काउंटी में आता है। देश में ज्यदातर हिस्से में फलों और सब्जियों की खेती होती है और कुल खाने का अधिकतर हिस्सा इम्पोर्ट करना पड़ता है। जिसके लिए अब इनको कोई तकलीफ नहीं है। हंसालिम को-ऑपरेटिव की स्थापना के बाद

हंसालिम को-ऑपरेटिव

इस काउंटी में कुल 30 हज़ार बाशिंदे निवास करते हैं और उन सभी बाशिंदों की सेवा के लिए 2 वॉल्वो बसें बहुत अच्छी कंडीशन में हैं। इनमें से एक या कभी कभी दोनों बसें गोशियन काउंटी में आ कर जैविक खेती देखने वाले लोगों की सेवा में लगी रहती है। आज भी एक बस सुबह से ही हमारे पास आई हुई थी।

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को-ऑपरेटिव एक्ट 2013

हंसालिम को-ऑपरेटिव

वैसे तो कोरिया में पहली को – ऑपरेटिव 1907 में बन गयी थी और वेह आज भी फंक्शनल है लेकिन कोरिया में स्पष्ट को – ऑपरेटिव एक्ट सन 2013 में ही पास हुआ और उसका नतीजा यह है कि आज हज़ारों को-ऑपरेटिव्स दिखाई दे रही हैं। दक्षिण कोरिया में को-ऑपरेटिव एक्ट सन 2013 में पास हुआ और आते ही इसने पूरी क्रांति बिठा दी। मुझे इस इलाके की एक मशहूर किसान को-ऑपरेटिव जिसे हंसालिम को-ऑपरेटिव कहते हैं और एक उपभोक्ता को ऑपरेटिव जिसे आई कूप के नाम से जाना जाता है में जाने का मौक़ा मिला। अति जिज्ञासु साथी हंसालिम की कहानी इस वेब लिंक से जान सकते हैं।

http://eng.hansalim.or.kr/?page_id=13

हमारे मुल्क में भी को – ऑपरेटिव एक्ट सन 1904 से काम कर रहा है, लेकिन उसमें बहुत अधिक सरकारी कण्ट्रोल हैं, को – ऑपरेटिव संस्था के मेम्बर, प्रेसिडेंट, सेक्रेटरी, खजांची केवल नाम के होते हैं असली ताकत रजिस्ट्रार साहब के हाथों में होती है। इसी का नतीजा है के देश के अधिकतर को – ऑपरेटिव करोड़ों का टर्नओवर होते हुए भी अपने लिए बैठने लायक दफ्तर और कुर्सी का जुगाड़ भी नहीं कर पाते ( इफ्फको और अमूल इसके अपवाद हो सकते हैं, उनकी स्टोरी अलग है, वो किसी दिन अलग से सुनाऊंगा के वो कैसे कर पाए ) हंसालिम को-ऑपरेटिव की पिछले वर्ष की रिपोर्ट इस लिंक से डाउनलोड की जा सकती है।

http://www.hansalim.or.kr/…/…/2016-hansalim-storyEnglish.pdf

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हंसालिम को-ऑपरेटिव की कहानी

हंसालिम को-ऑपरेटिव

  1. हंसालिम को-ऑपरेटिव किसानो और उपभोक्ताओं के आपस में मिलने और एक दुसरे के जीवन को बेहतर से बेहतर बनाने की एक शानदार कहानी है।
  2. सन 1950 के आसपास कोरिया में जबरदस्त जूत बजा और देश के दो टुकड़े हो गए खा मखा रोटियों के भयंकर लाले पड़ गये थे
  3. सरकार ने देश को फैक्ट्री बनाने की राह पर डाल दिया।
  1. इस तरह टाइम पास करते करते 1980 आ गया और दो किसान जिनके नाम _______ थे ने 1986 तक आते आते एक दूकान खोल ली जिसको स्टोर का नाम दिया।
  2. यहाँ से बात चली कि खाली दूकान से काम नहीं चलेगा और उपभोक्ताओं को साथ लेकर आना पड़ेगा। बस यहीं से हंसालिम को-ऑपरेटिव सही दिशा पकड़ गया।
  3. कल मैं हंसालिम को-ऑपरेटिव के ओफ्फिस में गया था , हमारा इंदिरा गांधी हवाई अड्डा भी फेल है, इनकी साफ़ सफाई और व्यवस्थाओं के लिए।
  4. आप लोगों की सुविधा के लिए मैंने मेरे ट्रेनिंग डायरेक्टर श्रीमान कोनराड से काफी सारी फोटो लेकर इस पोस्ट के साथ लगायी हैं आप फुर्सत से देख कर अपनी स्वतंत्र राय कायम कर सकते हैं।
  5. मोटी बात बता देता हूँ 100 रुपये के सामान में से 76 रुपये सीधे किसान के खाते में जाते हैं और बाकि 24 रुँपये डिस्ट्रीब्यूशन और सेल्स और मार्केटिंग में खर्च होते हैं | कीमतों का निर्धारण किसानो और उपभोक्ताओं की कमेटियां मिल कर करती हैं।
  6. सन 2016 की एनुअल रिपोर्ट को पढ़ कर पता चलता है कि कोरिया के पांच लाख चालीस हज़ार लोग हंसालिम को-ऑपरेटिव के उपभोक्ता सदस्य हैं। जो की पूरे कोरिया की जनसंख्या के 2.5 % हैं।
  7. हंसालिम को-ऑपरेटिव आज के समय में 100 आर्गेनिक अनाज , फल सब्जी और दूध का उत्पादन करता है। सर्टिफिकेशन की भड़क इन्होने नहीं पाली है। उपभोक्ता और किसान मिल कर पूरे उत्पादन प्रोग्राम पर नज़र रखते हैं और शान्ति से अपना काम चला लेते हैं। किसान सदस्यों को बड़ी इज्ज़त के भाव से देखा जाता है, और उनके मुनाफे की चिंता उपभोक्ता सदस्य करते हैं।
  8. एक टुकड़ा खाने का भी बर्बाद नहीं किया जाता है।
  9. कुल किसान परिवार जो किसान सदस्य हैं वो 2159 हैं।
  10. पिछले वर्ष हंसालिम को-ऑपरेटिव ने 362 मिलियन अमरीकी डालर का व्यापार किया (रुपयों में बदल कर मुझे भी बता दियो कोई भाई मेरी गुणा भाग कमजोर है )।
  11. हंसालिम को-ऑपरेटिव ने अपना सामान डिस्ट्रीब्यूट करने के लिए 254 आउटलेट खोले हुए हैं , इनमें हर कोई आदमी नहीं बड सकता, क्यूंकि सिर्फ सदस्य को आने की इजाजत है। खाली पैसे देकर कोई सस्य नहीं बन सकता। पहले इच्छुक जीव को आकर ट्रेनिंग लेनी पड़ती है, और जब उसके दिमाग में बात घुस जाती है, फिर उसको सदस्य बना देते हैं।
  12. जो पहली बार सदस्य बनता है उसको 30000 कोरियन वान का सामान खरीदना पड़ता है (बहुत छोटी राशि है ), इसी में से उसको कुछ शेयर दे दिए जाते हैं जो की रेडीम किये जा सकते हैं, कभी भी वो भी बिना किसी लफड़े के।
  13. सरकार केवल लाइसेंस और रेगुलेशन और टैक्स लेने का काम करती है, इतने सारे उपभोक्ता जिसमें गवर्नर से लेकर झाडू मारने वाले सभी शामिल है, उन्हें पता है कि उनकी सेहत का वजूद हंसालिम को-ऑपरेटिव की वजह से है।
  14. साथियों मैंने आपको एक उम्मीद की रौशनी दिखाई है आप इस विषय पर एक गूगल सर्च करके और जानकार निकाल सकते हैं , एक लिंक और आपसे शेयर कर रहा हूँ – http://orgprints.org/24218/7/24218.pdf

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अभी थोड़े दिन पहले शरत भाई से मुलाकात हुई है, जो रेडियो फीवर दिल्ली में काम करते हैं , उनकी टीम से मिलकर मुझे अब एहसास हो रहा है के हम एक और हंसालिम को-ऑपरेटिव जैसा जुगाड़ दिल्ली में बैठाने जा रहे हैं ? कैसे पता नहीं लेकिन मुझे पूरा यकींन है के आप और हम साथ होंगे अपने कुरते काले करने के लिए (जमीन पर काम करने के लिए )

कल ही मुझे इसी प्रकार के दुसरे ग्रुप को देखने का मौका मिला जिसका नाम आई कूप (i coop ) है इन्होने ने भी हंसालिम पैटर्न पर अपना एक सिस्टम खड़ा कर लिया है।

कोरिया के लोग सच में इस दिशा में हमारे से बाजी मार गए हैं। लेकिन हम जल नहीं रहे क्यूंकि हम जलते नहीं रीस करते हैं।

स्रोत:-

यह आर्टिकल कमल जीत की फेसबुक वाल से लिया जिसका लिंक निचे दिया जा रहा है।

https://www.facebook.com/creativekamal/posts/10155207222394757

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bheru lal gaderi

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