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स्वच्छ दूध उत्पादन की विशेषताएं एवं प्रबंधन

स्वच्छ दूध उत्पादन की विशेषताएं एवं प्रबंधन
Written by bheru lal gaderi

दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में भारत का विश्व में प्रथम स्थान है। भारत के आर्थिक विकास में दुग्ध उद्योग का महत्वपूर्ण योगदान है। डेयरी पशुओं (गाय, भैंस) की मुख्यतः दुग्ध उत्पादन के लिए पाला जाता है जो कि एक संतुलित आहार है। स्वच्छ दूध अच्छी गुणवत्ता के लिए आवश्यक है। अतः यह जरूरी है कि दूध की गुणवत्ता को कायम रखा जाए। इसके लिए सख्त एवं प्रमाणित तरीकों को अपनाया जाना चाहिए।

स्वच्छ दूध उत्पादन की विशेषताएं एवं प्रबंधन

स्वच्छ दूध की विशेषताएं

  • स्वच्छ दूध वह दूध है जिसमें गंदगी दिखाई न दे।
  • जीवाणुओं की संख्या कम से कम हो।
  • सुगंधित हो।
  • एंटीबोटिक के अंश से मुक्त हो।
  • संचय क्षमता अधिक हो।
  • सामान्य संरचना हो।

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दूध शीघ्र ही खराब हो जाने वाला पदार्थ है एवं सूक्ष्म जीवाणुओं के पनपने के लिए उचित माध्यम भी है। दूध उत्पादन के माध्यम से रोग फैलाने वाले जीवाणु, गोबर, मूत्र, दूषित जल, वायु एवं वातावरण, गंदे बर्तन एवं उपकरण दूध को दूषित कर सकते हैं, जो कई खतरनाक बीमारियों का स्रोत बन सकते हैं। इसलिए किसानों द्वारा स्वच्छ दूध उत्पादन करने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

गौशाला का प्रबंधन

  • पशुओं हेतु स्वच्छ वाले की व्यवस्था होनी चाहिए, जो जल जमाव एवं मक्खी मच्छरों से मुक्त हवादार एवं मनुष्य के रहने के स्थान से अलग हो।
  • गोबर एवं मूत्र के निष्कासन की सही व्यवस्था होनी चाहिए।
  • पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में शुद्ध जल की सुविधा होनी चाहिए।
  • बाड़े में समय-समय पर कीटनाशकों का छिड़काव किया जाना चाहिए।
  • विभिन्न बीमारियों के लिए पशुओं की नियमित जांच होनी चाहिए।
  • हर 15 दिनों में थनैला रोग के लक्षणों हेतु दूध की संरचना एवं पशु की जांच करनी चाहिए।
  • पशुओं का नियमित टीकाकरण किया जाना चाहिए।
  • बीमार पशुओं को स्वच्छ पशुओं से अलग रखना चाहिए।
  • पशुओं की प्रतिदिन सफाई की जानी चाहिए।
  • शरीर के पिछले हिस्से पर पैर,एवं थनों के पास लंबे बालों को समय-समय पर काटते रहना चाहिए।

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पशुओं के आहार का प्रबंधन

  • पशुओं को संतुलित आहार एवं खनिज मिश्रण दिया जाना चाहिए।
  • पशु चारे को नमी मुक्त स्थान में समाहित किया जाना चाहिए।
  • दूध निकालने से एक घंटा पहले पशु को चारा खिलाना चाहिए।
  • भोजन में अचानक परिवर्तन करने से परहेज करें।
  • फफूंद एवं कीटनाशक युक्त भोजन पशु को नहीं दिया जाना चाहिए।

दुहने के समय प्रबंधन

  • दूध को पूर्ण मुट्ठी विधि द्वारा संपूर्ण रूप से निकालना चाहिए।
  • दूध दुहने की प्रक्रिया 5-7 मिनट में पूरी होनी चाहिए।
  • थनेला रोग से संक्रमित पशु को अंत में दुहना चाहिए और उस के दूध का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • दूध दुहने से पहले थन को धोकर साफ एवं सूखे कपड़े से साफ करें।
  • दूध की एक या दो धार फेंक देनी चाहिए।
  • एंटीबायोटिक से उपचारित पशु के दूध को अन्य पशुओं के दूध के साथ नहीं मिलाना चाहिए।
  • दूध दुहने के तुरंत बाद पशु को बैठने नहीं दिया जाना चाहिए।
  • दूध दुहने के बाद थन को साफ कर देना चाहिए।

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स्वच्छ दूध के संचय, परिवहन एवं प्रसंस्करण कर प्रबंधन

  • दूध दुहने का बर्तन बिना जोड़ एवं दरार वाला होना चाहिए। ताकि उसे आसानी से साफ किया जा सके।
  • दूध दुहने के बर्तन को साफ रखना चाहिए एवं स्वच्छ जगह पर रखना चाहिए।
  • दुग्ध को कम से कम समय में निकट के दुग्ध संग्रह केंद पर ले जाना चाहिए।
  • दूध को साफ कपड़े से छानने के बाद संचय करना चाहिए। ताकि अवांछित पदार्थों को निकाला जा सके।
  • दूध को जल्दी से जल्दी ठंडा करना चाहिए।

दोहक के स्वास्थ्य का प्रबंधन

  • किसी भी प्रकार के संक्रामक रोग से मुक्त हो
  • दोहक के कपड़े साफ होने चाहिए।
  • उसके बाल, दाढ़ी एवं नाखून ठीक से कटे होने चाहिए। हो सके तो बालों को भी बाल बांध लेना चाहिए।
  • दोहक को दूध दुहने से पूर्व एवं पश्चात अपने हाथों को अच्छे से साफ कर लेना चाहिए।

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स्वच्छ दूध का उत्पादन प्रमाणित एवं सख्त तरीके से करने पर दूध की गुणवत्ता अच्छी रहती है जिससे दूध उत्पादों के निर्माण में गुणवत्ता बनी रहती है।

अतः यह जरूरी है कि ना सिर्फ दूध उत्पादन की मात्रा अपितु गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जाए।

प्रस्तुति

पीयूष तोमर, पंकज गुणवंत एवं सुनील कुमार,

पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग,

पशु मादा एवं प्रसूति रोग विभाग,

लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा,

पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार

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