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सौर शुष्कक किसानों के लिए वरदान

सोर शुष्कक
Written by bheru lal gaderi

ऊर्जा मानव जीवन के लिए बहुत महत्पूर्ण है। ऊर्जा के पारम्परिक एवं नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत के साधन प्रत्यक्ष रूप से सूर्य द्वारा उतपन्न होते है लेकिन वर्तमान में पारम्परिक ऊर्जा के स्रोत सिमित है। सौर ऊर्जा द्वारा हम फसलें एवं अन्य कृषि उत्पादों को सूखा सकते है। एक सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया की हमारे देश में प्रति वर्ष फल का 50 मिलियन टन एवं सब्जियों का 85 लाख टन उत्पादन होता है लेकिन उनमे से सिर्फ 20-30% उत्पादन अनुचित हैंडलिंग एवं भण्डारण की व्यवस्था न होने की वजह से बाजार तक नहीं पहुँच पाता है। सौर शुष्कक (सोलर ड्रायर) में इन फलों और सब्जियों को सूखाकर इन्हे ख़राब होने से बचाया जा सकता है।

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सौर शुष्कक महत्व एवं उपयोग 

ग्रामीण क्षेत्रों के विकास के लिए सौर ऊर्जा के तापीय सिद्धान्त पर कई उपकरणों का निर्माण किया गया है जिनसे पारम्परिक ऊर्जा स्रोतों की बचत आसानी से की जा सकती है परन्तु फसलों एवं अन्य कृषि उत्पादों को सुखाने एवं उनके जीवनकाल को बढ़ाने के लिए सौर ऊर्जा के तापीय सिद्धान्त पर आधारित सौर शुष्कक प्रक्रिया एक तरह से ऊष्मा एवं भार स्थानान्तरण की प्रक्रिया है।

इस प्रक्रिया में तरल अवस्था में उपलब्ध पानी (नमी) को वाष्पीकृत किया जाता है। वाष्पीकृत पानी गर्म हवा के साथ मिलकर उपकरण से बाहर निकल जाता है। वर्तमान में कृषि तकनीक में फसल की कटाई 25% नमी तक की जाती है। नमी की मात्रा अधिक होने से इसकी भण्डारण अवधि में गुणवत्ता में कमी आती है। अतः नमी की मात्रा को कम करने के लिए इनको सुखाया जाता है। वही दूसरी और कृषि उत्पादों को सुखाने के लिए अनुकूल तापमान 60 डिग्री सेंटीग्रेड के करीब होना चाहिए जो की सौर शुष्कक के प्रयोग से आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

नवीकरणीय ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग द्वारा अब तक कई सौर शुष्ककों का निर्माण किया जा चूका है  उनमे से कुछ सौर शुष्कक का विवण इस प्रकार है।

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सौर गुफानुमा शुष्कक

यह अर्द्ध गोलाकार आकार का मेटेलिक फ्रेम है। जिसके ऊपर यु.वी. प्लास्टिक शीट ढकी होती है। इसके एक तरफ एक्जास्ट पंखा लगा होता है, एवं निचे बेस में काला रंग किया जाता है। बेस के नीचे एक ऊष्मा रोधी पदार्थ की सतह बिछाई जाती है ताकि अंदर की गर्मी का नुकसान हो। इसे लम्बाई में पूर्व-पश्चिम में स्थापित किया जाता है एवं उत्तर दिशा की तरफ लम्बाई में एक लोहे की फ्रेम लगाई जाती है जो तापमान के नुकसान होने में रुकावट पैदा करती है। प्राकृतिक हवा के लिए निचे की तरफ छिद्र किये जाते है एवं गर्म हवा के निकास के लिए ऊपर की तरफ चिमनिया लगी होती है।

इस तरह की इकाई से बड़ी मात्रा में औद्योगिक उत्पादों को कम समय में आसानी से सुखाया जा सकता है।

इस इकाई का उपयोग डाई-बेसिक कैल्सियम फॉस्फेट को सुखाने आवला, जड़ी बूटी इत्यादि को सुखाने में उद्योगों द्वारा काम में लिया जा चूका है। इस तरह के शुष्कक की क्षमता 500 किग्रा. से 1500 किग्रा. तक की होती है। यह बहुत ही कम रख-रखाव वाला शुष्कक है। इसके अन्दर की ट्रे पर प्लास्टिक शीट को करीब 5 साल बाद पुनः बदलना होता है।

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बहुपयोगी सोर शुष्कक

सोर शुष्कक

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यदि सौर शुष्ककों का प्रयोग एक से अधिक कार्य के लिए किया जाये तो उत्पादों की गुणवत्ता को कम किये बगैर उनकी बहुमुखी योग्यता एवं विश्वसनीयता को बढ़ाया जा सकता है। मल्टी परपज सौर शुष्कक द्वारा किसान (लाभार्थी) घरेलु खाद्य उत्पादों एवं सब्जियों को सूखने के अलावा इसके द्वारा 5-6 लोगों का खाना भी पकाया जा सकता है। बहुपयोगी सौर शुष्कक का निष्पादन कुकिंग एवं शुष्कन प्रचलनों.  के लिये प्रयुक्त होने वाले वाणिज्यिक ईंधन से तुलनीय हैं। इसके द्वारा अपेक्षाकृत कम समय में (1.3 वर्ष 2.06 वर्ष) लाभ देने के कारण यह स्पष्ट हैं की यह अर्थक्षम हैं।

निष्कर्ष

वर्तमान में ऊर्जा संकट की स्थिति में फल, सब्जियां एवं फलों को सूखने के लिये सौर तक्नीककी का उपयोग करना उत्तम हैं। यह सही हैं की सौर तकनीकी को अपनाने म प्रारम्भिक खर्चा कुछ ज्यादा होता हैं लेकिन इस खर्च की पूर्ति सूखे फल एवं सब्जियाँ बेचने से होने वाले अधिक लाभ से हो सकती हैं।

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Author :-

डॉ. सुधीर जैन (मो. नं. 9461805189)
नवीकरणीय ऊर्जा अभियांत्रिकी विभाग
प्रोद्द्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय, म.प्र.कृ.प्रौ.वि.वि.उदयपुर

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