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किन्नू किंग श्रीमान सुरेंद्र सिंह जी अबोहर की सफलता की कहानी

सुरेंद्र सिंह जी अबोहर
Written by bheru lal gaderi

भारत के कृषि मानचित्र पर कुछ ऐसे शिखर हैं जिनकी गिनती आज वर्ल्ड लेवल पर होती है। जिनके आज को देख कर ऐसे लगता है के जैसे ये शुरू से ही सोने का चम्मच मुहं में लेकर पैदा हुए थे। आज मेरी मुलाकात दैव योग से श्री सुरेंद्र सिंह जी से अबोहर में उनके कार्यालय पर हुई। मैंने जैसे ही आज सुबह फोन किया और मैंने बताया कि मैं गंगानगर से बस द्वारा अबोहर पहुंचूंगा तो मुझे यह इंस्ट्रक्शन मिली के आपने अबोहर आने से 10 किलोमीटर पहले सूचित करना है और बस स्टैंड के बाहर ब्लैक इनोवा खड़ी मिलेगी। सब कुछ वैसे ही हुआ और में ठीक सवा एक बजे सुरेंद्र सिंह जी के साथ चाय पी रहा था। रूटीन बातचीत के बाद मेरे क्यूरोसिटी के कीड़े ऐड़ी ठा के खड़े हो गए के इतने कामयाब आदमी की कहानी तो पता चले।

सुरेंद्र सिंह जी अबोहर

मेरे निवेदन के बाद सुरेंद्र सिंह जी की आंखों में एक चमक आ गयी और वो सीधे रिवाइंड करके सन 1961 में पहुंच गए जब वो अपने बचपन के दौर में थे और पिताजी की एक गांव में किरयाने की दुकान थी जो लगभग बन्द होने के कगार पर थी।

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सफर की शुरुआत:-

सातवीं कक्षा के बाद सुरेंद्र सिंह जी ने स्कूल छोड़ दिया और उसी स्कूल के बाहर कुल्फ़ी बेची, अमरूदों को काट कर नमक लगा कर बेचा और अपने घर की गाड़ी को चलाने में परिवार का सहयोग किया।

फिर एक दिन पिताजी द्वारा बन्द की गई किरयाने की दुकान को खोल लिया और अपनी मेहनत और लगन से उस दुकान को एक नम्बर का बना दिया।

हर रोज 12 से 15 घंटे काम करके 200 से 300 रुपये बचते थे जो महीने के 9 से 10 हज़ार बनते थे। एक दिन एक मित्र की सलाह पर भट्ठे से ईंटे ढोने का काम तलाश लिया और एक ट्रेक्टर ट्राली का जुगाड़ करने के लिए पैसों का बंदोबस्त किया। एक चक्कर मे 200 रूपये बचने लगे और पूरे दिन में पांच से छह चक्कर मतलब हज़ार पंद्रह सौ रुपये हर रोज का काम कर लिया।

सुरेंद्र सिंह जी ने एग्रीकल्चर सर्विसेज सेक्टर में एक मौके की तलाश की और एक हाडम्बा थ्रेशर ले कर आये जिसे लेने के लिए 90 हज़ार रुपये का लोन लिया।

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एक छोटी सी टीम बना कर गेहूं के सीजन में दिन रात थ्रेशर चलाया और एक दो सालों के बाद सुरेंद्र जी के पास 4 थ्रेशर और 4 ट्रैक्टर्स अपने थे और बैंकों का कोई लोन पेंडिंग नही बचा।

एक दिन बत्तरा जी ईंट भट्ठे पर बैठे हुए थे वहां कोई दिल्ली की पार्टी आयी जिसने 15 लाख ईंटे खरीदनी थी जो 50 एकड़ जमीन की चारदीवारी में लगनी थी जहां वनस्पति घी की फैक्ट्री निर्माणाधीन थी और जिसका ठेका श्री विमल जैन जी जो दिल्ली के एक बहुत बड़े कांट्रेक्टर थे जी के पास था।

बत्तरा जी ने सुरेंद्र सिंह जी की कार्यशैली को देखते हुए उनसे कहा के आप सभी ईंटे ढो लीजिये और हिसाब किताब भी आप ही रख लीजिए। सुरेंद्र सिंह जी ने निर्माणधीन फैक्ट्री में डेरा डाल कर अपना दफ्तर चालू कर दिया। अब चारदीवारी के बाद वहां भरत करने के लिए मिट्टी की आवश्यक्ता पड़ी तो वो काम भी मेरिट के आधार पर सुरेंद्र जी को मिला।

अतीत याद करके सुरेंद्र सिंह जी बताते हैं के 1991 में मेरे पास 26 लाख रुपया मुझे मिला , उसी घी की कम्पनी में घी ट्रांसपोर्ट करने का ठेका भी अनेक वर्षों तक सुरेंद्र जी के पास रहा।

एक दिन पेमेंट के वक़्त सुरेंद्र सिंह जी की पेमेंट में से 2 लाख रुपये काट लिए जो कि एक प्रकार से जुर्माने का नाम लेकर काटे गए थे कसूर बताया गया के घी टीन से बाहर निकल कर नष्ट हो गया।

सुरेंद्र सिंह जी ने काम छोड़ दिया हालांकि बात बहुत ऊपर तक गई और काम्पनी की मैनेजमेंट ने भी बहुत माफी मांगी। लेकिन सुरेंद्र जी ने कुछ और ही सोचा हुआ था।

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किन्नू की कलेक्शन ग्रेडिंग एंड पैकेजिंग:-

अपनी एकत्रित पूंजी को किन्नू के कलेक्शन ग्रेडिंग एंड पैकेजिंग में लगाया और इलाके में सबसे पहले किन्नौ को दूर दराज के मार्किट में भेजना शुरू किया जैसे बैंगलोर, केरला आदि।

2000 परिवार को रोजगार:-

आज अपनी मेहनत के दम पर 57 साल की उम्र ने सुरेंद्र जी 5 प्लांट्स चलाते हैं कई कंपनियां बना चुके हैं, क्रेट्स और गत्ते के डिब्बों की फैक्ट्री अपनी हैं। एक सीजन में किन्नू की 2000 गाड़ियां निकालते हैं, दुनिया भर में एक्सपोर्ट करते हैं।

इनके बिजनेस एम्पायर में 2000 परिवार को रोजगार मिला हुआ है। किन्नू के सीजन के बाद वर्ल्ड के बेस्ट फ्रूट्स मंगवा कर अपने कोल्ड स्टोर में रख कर पूरे पंजाब में उनकी ट्रेडिंग करते हैं।

पंजाब सरकार द्वारा बनाये गए किसान चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स के मेंबर हैं और अभी इस सेक्टर में कुछ बड़ा करने की सोच रहे हैं।

अपनी बातचीत में सुरेंद्र सिंह जी ने बताया के उनके लिए जो सबसे संतोषजनक बात यह है के उनके खड़े किए हुए सिस्टम से 2000 परिवार और सैंकड़ों किसानो को रोजगार मिला हुआ है।

सुरेंद्र सिंह जी अपने इलाके के किसांनो और युवाओं को जोड़ कर एक प्रोड्यूसर कम्पनी बनाने के इच्छुक हैं ताकि रियल में एक बहुत बड़ा काम किया जा सके।

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साभार:-

सुरेंद्र सिंह जी अबोहर

कमल जीत जी

Website – http://www.kamaljeet.in/

स्त्रोत:-

कमल जीत जी की फेसबुक वाल से

 

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