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सरसों की फसल के मुख्य कीट एवं उनकी रोकथाम

सरसों की फसल के मुख्य कीट एवं उनकी रोकथाम
Written by bheru lal gaderi

तिलहन की फसलों में सरसों की फसल (तोरिया, राया )का भारतवर्ष में विशेष स्थान है तथा यह राजस्थान प्रदेश में रबी की मुख्य फसलहै। सरसों की फसल में अनेक प्रकार के कीट समय-समय पर आक्रमण करते हैं लेकिन 4-5 किट आर्थिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इसलिए यह अति आवश्यक है की इन कीटों की सही पहचान कर उचित रोकथाम की जाए। इस लेख में सरसों के कीटों के लक्षण व उनकी रोकथाम के बारे में उपाय दिए गए हैं ।

सरसों की फसल के मुख्य कीट एवं उनकी रोकथाम

Image Credit-theayurveda.org

 बालों वाली सुंडी (कातरा)            

इस कीट की  तितली भूरे रंग की होती है, जो पत्तियों की निचली सतह पर समूह में हलके पीले रंग के अंडे देती है। पूर्ण विकसित सुंडी का आकार 3-5 सेमी लंबा होता है। इसका सारा शरीर बालों से ढका होता है तथा शरीर के अगले और पिछले भाग के बाल काले होते हैं।

इस सुंडी का प्रकोप अक्टूबर से दिसंबर तक तोरिया की फसल में अधिक होता है तथा कभी-कभी राया  व सरसों की फसल के आक्रमण की चपेट में आ जाती है. नवजात सुड़िया आरम्भ में 8-10 दिन में पत्तियों को खाकर छलनी कर देती है तथा बाद में अलग-अलग होकर पौधों की मुलायम पत्तियों, शाखाओं, तनो व फलियों को खाती रहती है जिसके पैदावार में भारी नुकसान होता है।

नियंत्रण

फसल की कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करें ताकि मट्टी में रहने वाले प्युपे को बाहर आने पर पक्षी खा जाए अथवा धुप से नष्ट हो जाए।

ऐसी पत्तियां जिन पर अंडे समूह में होते हैं, को तोड़कर मिट्टी में दबा कर अंडों को नष्ट कर दे।  इसी तरह छोटी सुण्डियों सहित पत्तियों को तोड़कर मिट्टी में दबा कर अथवा केरोसीन यहां रसायन युक्त पानी में डुबोकर सुण्डियों को नष्ट कर दें। इस कीड़े का अधिक प्रकोप हो जाने पर 250 मिली मोनोक्रोटोफॉस या 500 मि.मी. या  500 मिली क्विनलवॉस 25 ई.सी.या  200 मि.ली. डाईक्लोरवॉस 75 ई.सी. को 250 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

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चितकबरा कीड़ा (पेंटेड बग)

यह कीड़ा काले रंग का होता है, जिस पर लाल पीले और नारंगी के धब्बे होते हैं। इस कीडे के शिशु हल्के पीले और लाल रंग के होते हैं। दोनों प्रौढ़ व शिशु सरसों की फसल को दो बार नुकसान पहुंचाते हैं पहली बार सरसों की फसल उगने के तुरंत बाद सितंबर से अक्टूबर तक तथा दूसरी बार सरसों की फसल की कटाई के समय फरवरी-मार्च में। प्रौढ़ व शिशु पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसते हैं जिससे पत्तियों का रंग किनारों से सफेद हो जाता है। इस कीड़े को धोलिया भी कहते हैं। फसल पकने के समय भी कीड़े के प्रौढ़ व शिशुओं को फलियों से रस चूस कर दानों में तेल की मात्रा को कम कर देते हैं जिससे दानों के वजन में भी कमी आ जाती है।

नियंत्रण

  • फसल की बिजाई तब तक करें जब दिन का तापमान 30 डिग्री सेल्सियस हो जाए।
  • फसल में सिंचाई कर देने से प्रौढ़, शिशु एवं अंडे नष्ट हो जाते हैं।
  • बीज को 5 ग्राम इमिडाक्लोप्रिड 70 डब्ल्यू.एस. प्रति किलोग्राम बीज की दर से उपचारित करें।

सरसों की फसल की आरंभिक बीज प्ररोह अवस्था (तीन पत्ती अवस्था) पर पेंटेड बग एवं अन्य पत्ते काटने वाले कीड़ों की रोकथाम के लिए मेलाथियान (50 ई.सी.) 500 मि.ली. प्रति 500 लीटर पानी का छिड़काव करें प्रति हेक्टेयर की दर से करे। अधिक होने पर मेलाथियान (5%) का 20 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें।

मार्च-अप्रैल में यदि जरुरत पड़े तो 400 मि.ली. मेलाथियान 50 ई.सी. को 400 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ फसल पर छिड़के।

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आरा मक्खी

इस कीड़े की मक्खी का धड़ नारंगी, सिर व पैर काले तथा पंखों का रंग धुए जैसा होता है। सुण्डियों का रंग गहरा हरा होता है जिनके ऊपरी भाग पर काले धब्बों को तीन कतारें होती है। पूर्ण विकसित सुण्डियों की लंबाई 1.5-2.0 सेमि तक होती है। इस कीड़े की सुण्डिया इन फसलों के उगते  ही पत्तों को काट-काट कर खा जाती है। इस कीड़े का अधिक प्रकोप अक्टूबर-नवंबर में होता है। अधिक आक्रमण के समय सुण्डिया तने की छाल तक भी खा जाती है।

नियंत्रण

  • गर्मियों में खेत की गहरी जुताई करे।
  • सुड़ियों को पकड़ कर नष्ट कर दें।
  • फसल की सिंचाई करने से सुण्डिया डूब कर मर जाती है।
  • फसल में इस कीड़े का प्रकोप होने पर मेलाथियान 50 ई.सी. की 200 मि.ली. मात्रा को 200 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें।

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सुरंग बनाने वाला कीड़ा (लीफ माइनर)

इस कीडे मक्खियाँ भूरे रंग तथा आकार में 1.5 से 2.0 मि.ली. होती है। सुंडियों का रंग पीला व लंबाई 1.0-1.5 मि.ली. होती है। जनवरी से मार्च के महीने में सुण्डिया पत्तियों के अंदर टेढ़ी-मेढ़ी सुरंगे बनाकर हरे पदार्थ को खा जाती है जिससे पत्तियों की भोजन बनाने की क्रिया कम हो जाती है व फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है।

नियंत्रण

कीट ग्रस्त पत्तियों को तोड़कर नष्ट करें या मिट्टी में दबा दें ताकि और मक्खियां न बन सके।

इस कीड़े का आक्रमण चंपा के साथ ही होता है इसलिए चंपे के नियंत्रण के लिए अपनाए जाने वाले कीटनाशकों के प्रयोग से इस कीट का आक्रमण भी रुक जाता है।

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चेंपा (माहू)

यह कीड़ी हलके पीले रंग का 1.0 से 1.5 मि.ली. लंबा होता है। इसके प्रौढ़ एवं शिशु पत्तियों की निचली सतह और फूलों की टहनियों पर समूह में पाए जाते हैं। इसका प्रकोप दिसंबर माह के अंतिम सप्ताह में (जब सरसों की फसल पर फूल बनने शुरू होते हैं) होता है वह मार्च तक बना रहता है। प्रौढ़ व शिशु पौधों के विभिन्न भागों से रस चूसकर नुकसान पहुंचाते हैं। लगातार आक्रमण रहने पर पौधों के विभिन्न भाग चिपचिपे हो जाते हैं, जिन पर काला कवक लग जाता है। परिणाम स्वरुप पौधों की भोजन बनाने की ताकत कम हो जाती है।जिससे पैदावार में कमी हो जाती है। किट ग्रस्त पौधे की वृद्धि रुक जाती है जिसके कारण कभी-कभी तो फलिया भी नहीं लगती और यदि लगती है तो उनमे दाने पिचके हुए छोटे हो जाते हैं।

नियंत्रण

  • सरसों की फसल पर बिजाई की गई फसल (10-25 अक्टूबर तक) पर इस किट का प्रकोप कम होता है।
  • राया जाति की किस्मों पर चेंपे का प्रकोप कम होता है।
  • दिसंबर के अंतिम या जनवरी के प्रथम सप्ताह में जहां स्थित के समूह दिखाई दे उन टहनियों के प्रभावित हिस्सों को कीट सहित तोड़कर नष्ट कर दें।
  • जब खेत में कीटों का आक्रमण 20% पौधों पर हो जाए या औसतन 13-14 कीट प्रति पौधा हो जाए तो निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग करें :

छिड़काव सायं के समय करें, जब फसल पर मधुमक्खियां कम होती है। मोटर चालित पंप में कीटनाशक दवाई की मात्रा ऊपर लिखित होगी लेकिन पानी की मात्रा 20 से 40 लीटर प्रति एकड़ हो जाएगी।

साग के लिए उगाई गई फसल पर 250 से 500 मि.ली. मेलाथियान 50 ई.सी. को 250 से 500 लीटर पानी में मिलाकर प्रति एकड़ छिड़काव करें। यदि आवश्यकता हो तो दूसरा छिड़काव 7 से10 दिन के अंतराल पर करें।

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समन्वित कीट नियंत्रण 

चेंपा के समन्वित कीट नियंत्रण के लिए कीट के आर्थिक क्षति स्तर (10-15% पौधों पर 26-28  चेंपा प्रति 10 से.मी. तने की ऊपरी शाखा) में पाए जाने पर बायोएजेन्ट वर्टिसिलियम लिकेनाइ एक किलोग्राम प्रति हेक्टेयर एवं 7 दिन के अंतराल पर मिथाइल डिमेटोन (25 ई.सी.) या डाइमिथोएट (30 ई.सी) 500 मि.ली./हेक्टेयर का छिड़काव करें।

जिव नियंत्रण

सरसों की फसल में चेंपा के जैविक नियंत्रण हेतु फसल में कीट की आर्थिक क्षति स्तर में पाए जाने पर 2 प्रतिशत नीम के तेल को 0.1% तरल साबुन के घोल (20 मि.ली. नीम का तेल +1 मि.ली. तरल साबुन) में मिलाकर छिड़काव करें।

सरसों की फसल की फूल अवस्था पर अपेक्षाकृत सुरक्षित रसायनों का छिड़काव संध्याकाल में ही करे।

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प्रस्तुति

करण सिंह वरिष्ठ अनुसंधान अध्येता,

डॉ. रूप सिंह मीणा, सहायक प्रधानाध्यापक (कीट विज्ञान)

डॉ. बी.एस. मीणा, प्रधानाध्यापक (प्रसार) आईसीटी परियोजना,

(आर.के.वि.वाई.) श्री गंगानगर (राज)

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