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शरीफ कंपनियां डकैत किसान ओर लालची उपभोक्ता

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Written by bheru lal gaderi

डकैत किसान, शरीफ कंपनियां ओर लालची उपभोक्ता

महक सिंह तरार

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आम शहरी अधिकतर विज्ञापन देख कर किसी वस्तु को खरीदने के बारे मे अपनी राय बनाता है। एक फ़िल्म एक्ट्रेस जिसे भैंस ओर गाय का अंतर नही पता वो विज्ञापन मे बोलती है ‘फलाँ दूध पीता है इंडिया’ और आपकी ग्रह लक्ष्मी अगले दिन से आपके बच्चो को उसी पैकेट का दूध पिलाने लगती है। मैं निजी तजुर्बे से दावा करता हूँ कि इस पोस्ट को पढ़ने वाली दादी, माता, या बहने विज्ञापन के बजाये उस दूध की क्वालिटी को चेक करने के लिये एक कदम तक नही उठाती। उनकी अधिकतर सोच दूध गरम करने पर ऊपर ‘मलाई कैसी आयी’ तक सीमित है। (वैसे भी नकली दूध पर मलाई ज्यादा मोटी आती है)

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अच्युतानंद Vs यूनियन ऑफ इंडिया(2012) के सुप्रीम कोर्ट केस मे कृषि मंत्रालय और खाद्यमंत्रालय के आंकड़ो को देखे या फिर भारत मे मीट एक्सपोर्ट (इंडिया is No 1 in मीट एक्सपोर्ट) के लिये लगातार काटी जाती गाय भैंस की घटती संख्या को देखे, भारत मे डेली पियें जाने वाले दूध का बड़ा हिस्सा गाय-भैंस से नही आता। बल्कि बाहरी देशों से स्किम्ड मिल्क पाउडर खरीदकर उसमे पानी, पामोलीन आयल मिलाकर रेकांस्टीटूटेड दूध थैलियों मे परोसा जाता है।

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असली दूध पैदा करने मे किसान का खर्च ओर ये नकली दूध पैदा करने के खर्च मे बड़ा अंतर है। भारत के खाद्य मंत्री हर्ष वर्धन के संसद मे दिये बयान के अनुसार 86% दूध मिलावटी ओर 67% दूध तो जहरीला है।

  • आप पशु को खिलाने के लिये फीड की बात करे तो फीड कंपनी कहती है प्रति लीटर 400 ग्राम प्लस 1.5 kg (बॉडी सपोर्ट के लिये) फीड खिलाया जाना चाहिए।
  • अगर एक गाय 10 लीटर दूध देती है तो उसका फीड हुआ 4+1.5 kg = 5.5 kg जिसका बाजार भाव हुआ Rs 137/- (@25 Rs kg)
    चारा, दवा, Dr, min mixture, लेबर, बिजली, पानी, कैपिटल कॉस्ट, death rate etc मिलाओ तो कुल मिलाकर हुआ लगभग 60-65 Rs प्रतिदिन।
  • अब अगर इस गाय का दूध 4 के FAT ओर 8 का SNF वाला हो तो उसका रैट होगा 20 Rs लीटर मतलब टोटल 200 Rs का दूध ओर 200 का खर्चा।
  • जैसे ही गाय लांग dry पीरियड मे गयी तो समझो किसान को लगभग 4000 Rs महीने का अलग से नुकसान।

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अगर एक डेरी के प्रैक्टिकल खर्च जोड़कर किसान दूध पैदा करे तो प्रोडक्शन कॉस्ट 28 – 35 Rs लीटर तक पड़ती है। किसान का 1 लीटर घी बनाने मे, गरम करने, फिल्ट्रेशन वगैरा की 7-8% वेस्टेज के बाद 28-29 लीटर दूध लगता है। मतलब 850 से 950 Rs के बीच का खर्च सिर्फ दूध का है। ऐसे मैं जब किसान अपने घी का रेट 900-1000 Rs लीटर मांगता है तो उपभोक्ता किसान को डकैत ठहराता है।

क्योंकि कंपनियां घी को आधे रेट मे बेचती है। भारत के बूचड़खानों से निकलने वाली चर्बी (tellow) से बनने वाला घी किन किन ब्रांड्स मे पैक होता है ये जानने की ज़िम्मेदारी लेने को उपभोक्ता तैयार नही। कंपनियों द्वारा जहरीले दूध द्वारा बनाये गए सस्ते घी से खुद के लिये दिल की बीमारियां घर लाता है, ओर साथ लाता है अपने बच्चो के लिये जहर मिला दूध। कंपनी फायदा उठाती है। भारत के जाहिल उपभोक्ता का जो विज्ञापन को ही सच मानकर vegitable आयल के रेकांस्टीटूटेड मिल्क को पीने और जहरीला घी खाने के स्वयं ज़िम्मेदार है।

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लेखक:-

शरीफ कंपनियां

Shree. Mahak Singh Tarar

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