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विभिन्न फसलों के लिए जल की आवश्यकता

विभिन्न फसलों के लिए जल की आवश्यकता
Written by bheru lal gaderi

फसलों की बढ़ोतरी एवं वांछित पैदावार प्राप्त करने के लिए उनकी क्रांतिक अवस्था पर आवश्यक मात्रा उपलब्ध कराते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि फसल के लिए शुद्ध जल की आवश्यकता तथा अपने होने वाले जल की मात्रा को जोड़ना चाहिए। खरीफ फसलें मुख्य रूप से वर्षा पर आधारित होती है। वर्षा के अभाव में इन फसलों को जीवन दायनी सिंचाई फसल में दाना बनते समय दी जानी चाहिए ताकि उत्पादन में कमी नहीं हो।

विभिन्न फसलों के लिए जल की आवश्यकता

Image credit- nrcs.usda.gov

फसलों की जल आवश्यकता (मि.मी.)

फसल शुद्ध जल की आवश्यकता सिंचाई हेतु जल की आवश्यकता
गेहूं 500-600 750-900
जौ 350-400 525-600
चना 200-250 300-375
सरसों 250-300 375-450
धनिया 300-350 450-525
अलसी 200-250 300-375

खरीफ फसले

फसल शुद्ध जल की आवश्यकता सिंचाई हेतु जल की आवश्यकता
मक्का 500-550 750-825
ज्वार 400-450 600-675
बाजरा 300-350 450-525
मूंगफली 400-500 600-750
सोयाबीन 400-500 600-750
धान 1500-2000 2250-3000

सरणी में यह स्पष्ट है कि कम या सीमित मात्रा में जल उपलब्ध होने पर हमें उन फसलों को प्राथमिकता देनी चाहिए जो कम जल में अपना जीवन चक्र पूर्ण कर अपेक्षित उत्पादन देती है। जैसे अलसी, चना, सरसों, धनिया आदि रबी में तथा बाजरा ,सोयाबीन, ज्वार, मूंगफली आदि खरीफ में। सामान्य रूप से जल उपलब्ध होने पर रबी में गेहूं, जौ तथा खरीफ में मक्का की खेती की जा सकती है।

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जल की उपलब्धता के आधार पर फसलों की प्लानिंग

पर्याप्त सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होने पर मक्का, गेहूं या बाजरा- गेहूं फसल चक्र उपयुक्त होता है। अधिक लाभ मूंगफली- गेहूं के फसल चक्र से मिलता है।

कम पानी उपलब्ध होने की स्थिति में जल की उपलब्धता के अनुसार फसल योजना तैयार करनी चाहिए। जब एक ही सिचाई उपलब्ध हो तो चना, तारामीरा, एक पलेवा व एक सिंचाई उपलब्ध हो तो सरसों, धनिया व अलसी की खेती उपयुक्त रहती है. जहां पलेवा के बाद दो सिंचाई उपलब्ध हो तो सरसों, धनिया अधिक लाभप्रद रहता है। 3 या 3 से अधिक सिंचाई मिलने पर गेहूं की खेती करनी चाहिए।

खरीफ में वर्षा ना होने या देरी से होने की स्थिति में खरीफ में बुवाई नहीं करनी चाहिए तथा नमी संचय कर चना, तोरिया या सरसों की बुवाई करनी चाहिए जिससे वर्षा की नमी का लाभ लेते हुए एक सिंचाइ में भी इन फसलों से अधिक लाभ लिया जा सकता है।

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जल बजट प्रणाली

  1. जल बजट तैयार करने के लिए यह आवश्यक है कि जलाशय व कुओं में जल स्तर क्या है, यह सुनिश्चित करें। इसके पश्चात पीने के लिए जल की आवश्यकता निर्धारित करें व आवश्यक मात्रा में पीने हेतु पानी का आरक्षण करें तथा इसी के अनुरूप कृषकों को सिंचाई हेतु दिए जाने वाले पानी की मात्रा व उसकी उपलब्धि के बारे में अवगत करावे। सतही जल के स्त्रोत, जलाशयों के अंतर्गत सिंचाई हेतु हेतु बजट इस प्रकार तैयार करें।
  2. उपलब्ध जल से अधिक से अधिक कितने क्षेत्रों में सिंचाई होगी यह जानकारी प्राप्त करें, साथ ही उस क्षेत्र वर्तमान स्थिति जैसे कौनसी फसल हो रही है, नहर व धोरो की स्थिति क्या है। कृषकों की क्या आवश्यकता हैं एवं फसलों के विपणन की क्या व्यवस्था हैं आदि के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।
  3. कम जल उपलब्ध होने की स्थिति में गेहूं और जौ के स्थान पर चना, सरसों, धनिया व अलसी आदि की बुवाई हेतु कृषकों को अवगत कराना तथा क्षेत्रवार बीज, उर्वरक आदि की मांग तैयार करनी चाहिए।
  4. कृषकों को जल बजट के संबंध में व जल प्रबंध के बारे में प्रशिक्षित करना चाहिए। इसके लिए इन फसलों की बुवाई की विधि, उन्नत कृषि विधियां, आदान उपलब्धता के बारे में भी कृषकों से चर्चा करनी चाहिए उसके बाद फसल कार्यक्रम तैयार करना चाहिए।
  5. कार्यक्रम में ली जा रही फसलें, सिंचाई के लिए उपलब्ध जल, क्षेत्र की जलवायु, विपणन व्यवस्था तथा अनुभव के आधार पर सिंचित क्षेत्र की फसल योजना तैयार करनी चाहिए यह ध्यान रखना चाहिए कि प्रति इकाई आयतन जल से अधिक लाभ देने वाली फसलों को प्राथमिकता देते हुए सिंचित क्षेत्र की योजना तैयार करनी चाहिए।
  6. सिंचाई विभाग के अधिकारियों के साथ चयनित फसल कार्यक्रम निर्धारित किया जाना चाहिए।

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प्रस्तुति

रोशन चौधरी उदयपुर

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