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विदेशी सब्जियों की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

विदेशी सब्जियों की उन्नत खेती
Written by bheru lal gaderi

आज के युग की मांग और विदेशी पर्यटकों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विदेशी सब्जियों(Foreign vegetables) की उपलब्धता भी आवश्यक हो गयी हैं। इन विदेशी सब्जियों में मुख्यतः एसपैरागस, परसले, ब्रुसल्स स्प्राउट, स्प्राउटिंग, ब्रोकली, लेट्यूस (सलाद), स्विस चार्ड, लिक, पार्सनिप व लाल गोभी आदि प्रमुख हैं। इन विदेशी सब्जियों में प्रोटीन, शर्करा, लवण, विटामिन व खनिज पदार्थों की मात्रा अधिक होती हैं। ये सब्जियां कैंसर जैसी खतरनाक बिमारियों से भी बचाव करती हैं।

साथ ही शरीर में अंदरूनी घावों को भरने के लिए रामबाण का काम करती हैं। इस कारण इन विदेशी सब्जियों की पैदावार पर विशेष ध्यान दिया जा रहा हैं। अतः अधिक स्वादिष्ट होने के साथ-साथ ये सब्जियां अधिक गुणकारी व लाभदायक भी हैं। पांच सितारा होटलों और महानगरों में तो खासतौर से इनको काफी ऊँची कीमत मिल जाती हैं।

पहले इन विदेशी सब्जियों को आयात करना पड़ता था लेकिन अब यह साबित हो चूका हैं की हमारे देश के ठन्डे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से उगाई जा सकती हैं। प्रदेश के किसान व सब्जी उत्पादक विदेशी सब्जियों को उगाकर अधिक धन कमा सकते हैं और देश को खुशहाल तथा समद्ध बनाने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं। किसानों की जानकारी के लिए कुछ मुख्य विदेशी सब्जियों की सफल खेती का विवरण यहां दिया गया हैं।

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एसपैरागस(Asparagus)

यह एक बहुवर्षीय विदेशी सब्जियों का पौधा हैं, जिसका ऊपर वाला भाग सर्दियों में सुख जाता हैं लेकिन जड़े जीवित रहती हैं, पौधों की जड़ों में मुलायम तना निकलता हैं, जिसको “स्पीयर्स” कहते हैं, इसे सुप के प्रयोग किया जाता हैं तथा सब्जी बनाकर भी खाया जाता हैं। इसे भुरभुरी दोमट व उपजाऊ  मिट्टी में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता हैं।

किस्में:-

परफेक्शन, यु.सी.-72, सलेक्शन-481 व डी.पी.ए.-1

बुवाई का समय:-

बीज द्वारा :- मध्य पर्वतीय क्षेत्र: मार्च-जून, ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:अप्रेल-मई

क्राउन द्वारा:- मध्य पर्वतीय क्षेत्र: जनवरी, उच्चे पर्वतीय क्षेत्र:मार्च-अप्रेल

बीज की मात्रा:-

600 ग्राम प्रति हेक्टेयर

अंतर:-

बीज द्वारा:-  50×50 से.मी.

क्राउन द्वारा :- 100×60  या 150×45 से.मी.

बुवाई:-

व्यावसायिक स्तर पर एक वर्षीय क्राउन ही बुवाई के लिए अधिक उपयुक्त होते हैं। इन्हे 30 से.मी. चौड़ी और 20 से.मी. गहरी नालियों में लगाकर मिट्टी से ढक लिया जाता हैं। बीज की रोपाई 3-4 से.मी. की गहराई तक करनी चाहिए। एक वर्ष के शिखर पौध रोपण के लिए बहुत उपयुक्त होते हैं।

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खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 200 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 400 किग्रा.
सुपर फास्ट 750 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 250 किग्रा.

 

इन खादों की अधिक मात्रा पौधों की रोपाई करने से पहले या खड़ी फसल में जनवरी में तथा शेष मात्रा जुलाई माह में डालें।

ब्लाँचिंग:-

जैसे ही स्पीयर्स निकलने आरम्भ होते हैं तो पौधों पर मिट्टी चढ़ाते रहें जिससे स्पीयर्स कोमल तथा सफेद रहते हैं, जो की अधिक पसंद किये जाते हैं। काटते समय स्पीयर्स को भूमि से एक से.मी. ऊपर से तेज चाकू से काटें।

उपज:-

एक पौधे से 10-15 स्पीयर्स हर वर्ष मिल जाते हैं। इस प्रकार 100 क्विंटल पैदावार प्रति हेक्टेयर ली जा सकती हैं। विदेशी सब्जियों का बहुवर्षीय पौधा होने के कारण तीसरे वर्ष से बीस वर्ष तक उपज प्राप्त होती रहती हैं।

ब्रोकली(Broccoli)

इसका पौधा फूलगोभी की भांति होता हैं। इसमें फूलों के बंद गुच्छे आपस में जुड़े हुए फूलगोभी की तरह ही निकलते हैं, जो खाने के काम लाए जाते हैं। इसकी नर्म शाखाएं 6-8 से.मी. फूलों के गुच्छों के साथ ही काटी जाती हैं। ब्रोकली में कई विटामिन, लोहा, कैल्शियम तथा खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके लिए नमी वाली भूमि जिसमे पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त रहती हैं।

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किस्मे :-

पालम हरीतिका, पालम कंचन, पालम विचित्रा, पालम समृद्धि।

बुवाई का समय:-

निचले पर्वतीय क्षेत्र : सितम्बर-अक्टुम्बर

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- अगस्त-सितम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- मार्च-अप्रेल

बीज की मात्रा:-

400-500  ग्राम प्रति हेक्टेयर

ब्रोकली का बीज फूलगोभी की तरह ही बोया जाता हैं।

अंतर:-

60×45से.मी. या 45×45 से.मी.

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 200 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 500 किग्रा.
सुपर फास्ट 475 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 85 किग्रा.

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केन की मात्रा को तीन बराबर हिस्सों में डालें। एक तिहाई रोपाई करने से पहले तथा शेष मात्रा रोपाई के एक-एक महीने के अंतर पर डालें।

उपज:-

ब्रोकली की कटाई उस समय करें जब फूल के गुच्छे काफी सख्त तथा आपस में जुड़े हुए हो। कटाई ६ हफ्ते तक चलती रहती हैं तथा नई शाखाए निकलती रहती हैं। बिजाई से फसल काटने तक 12-14  सप्ताह लगते हैं। औसत पैदावार 500 ग्राम से एक की.ग्रा. प्रति पौधा तथा 150-200  क्विंटल प्रति हेक्टेयर ली जा सकती हैं।

ब्रुसल्स स्प्राउट (Brussels sprouts)

इसको बेल्जियम के ब्रुसल्स शहर के आसपास सैकड़ों वर्षों से उगाया जाता रहा हैं, जिससे इसका नाम ब्रुसल्स स्प्राउट पड़ गया। इसके गोल स्प्राउट्स अखरोट के बराबर, हरे और लाल रंग के होते हैं तथा तने के चरों और, पत्तियों के अग्र भाग में नीचे से ऊपर तक निकलते है। स्प्राउट को कच्चा सलाद के रूप में, पकाकर तथा आचार बनाकर खाया जाता हैं। इसमेविटमिन ‘ए’ प्रोटीन, लोहा, कैल्शियम तथा खनिज पदार्थ प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसके लिए बलुई दोमट मिट्टी काफी उपयुक्त होती हैं।

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किस्में :-

हील्ज आइडीयल, रूबीइने।

बुवाई का समय:-

निचले पर्वतीय क्षेत्र :- अक्टुम्बर

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- अगस्त-सितम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- मार्च-अप्रेल

बीज की मात्रा:-

400-500  ग्राम प्रति हेक्टेयर, इसका बीज बंद गोभी की तरह ही लगाया जाता है।

अंतर:-

60×45से.मी.

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 200 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 500 किग्रा.
सुपर फास्ट 250 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 65 किग्रा.

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उपज:-

फसल बोने से कटाई तक लगभग 28-36 सप्ताह लगते हैं। स्प्राउट्स तने के निचे से ऊपर की और काटे जाते हैं। फसल की समाप्ति पर सिरे वाले भाग भी खाने के लिए उपयोग में लाए जा सकते हैं। ठन्डे इलाकों में यह फसल बहुत फलीभूत होती हैं और हल्का पाला इसकी सुगंध में वृद्धि करता हैं। पौधा लगभग 8 सप्ताह तक फसल देता रहता हैं। एक पौधे से 750 ग्राम से एक की.ग्रा. तथा 100-150 क्वी./हे. पैदावार मिल जाती हैं।

सिलेरी (celery)

इसका सलाद के रूप में प्रयोग करते हैं। इसके पत्ते व डंठल कच्चे तथा पकाकर या फिर सुप में सुगंध के लिए प्रयोग किये जाते हैं। इसका प्रयोग दवाई के रूप में भी किया जाता हैं। इसके लिए धुप वाली तथा अधिक नमी वाली भूमि, जिसका अम्लीय मान 6-7 पि.एच. उपयुक्त होता हैं। मौसम ठंडा व समय-समय पर थोड़ी वर्षा का होना आवश्यक हैं।

किस्में :-

भूटान 52-70 तथा गोल्डन सैल्फ ब्लांच।

बुवाई का समय:-

निचले पर्वतीय क्षेत्र :- सितम्बर-अक्टुम्बर

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- अगस्त-सितम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- मार्च- मई

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बीज की मात्रा:-

125  ग्राम प्रति हेक्टेयर।

अंतर:-

शीत ऋतू 60X25 से.मी. (ब्लीचिंग की आवश्यकता )

ग्रीष्म ऋतू  25X25 से.मी. (स्वयं ब्लीचिंग)

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 100 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 400 किग्रा.
सुपर फास्ट 300 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 किग्रा.

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गोबर की खाद, सुपर फास्फेट म्यूरेट ऑफ़ पोटाश तथा केन की आधी मात्रा रोपाई करने से पहले डालें। शेष केन की आधी मात्रा को तीन बराबर भागों में रोपाई के एक-एक महीने बाद डालें।

ब्लाँचिंग:-

डण्डल को करारा बनाने के लिए ऐसा किया जाता हैं। ब्लाँचिंग के लिए 30 से.मी. लम्बे पौधे के तने के गिर्द कागज लपेट दिया जाता हैं या वहां मिट्टी चढ़ा दी जाती हैं। कागज लगाने के 10-14 दिन बाद पौधा काटने योग्य हो जाता हैं।

कटाई:-

पौधा जब 30-45 से.मी. ऊचा हो जाए तब उसकी कटाई करनी चाहिए। प्रत्येक पौधे को तेज चाकू से भूमि किस्त के साथ काटना चाहिए।

उपज:-

औसत उपज 400-500 क्विंटल/हेक्टयर हैं। एक पौधे से 500-750 ग्राम उपज होती हैं

लीक (Leek plant)

इसके पत्ते सलाद के रूप में, तने को कच्चा तथा दूसरी सब्जियों के साथ मिलाकर प्रयोग करते हैं। इसको सुप के रूप में  भी उपयोग किया जाता हैं। इसकी अच्छी फसल के लिए भुरभुरी मिट्टी उपयुक्त होती हैं।

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किस्में :-

पालम पौष्टिक, प्राइज टेकर मसलबर्ग।

बुवाई का समय:-

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- सितम्बर-अक्टुम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- मार्च- मई

बीज की मात्रा:-

1.5  ग्राम प्रति हेक्टेयर।

अंतर:-

30X15 से.मी और 45X10 से.मी.

इसकी बिजाई प्याज की भांति करते है। पौध को 10-15 से.मी. गहरी नालियों में रोपित करते है।

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 250 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 600 किग्रा.
सुपर फास्ट 375 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 185 किग्रा.

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उपज:-

यह द्विवर्षीय पौधा हैं। ऐसे प्याज की तरह ही तोडा जाता हैं। पौधों को अधिक समय तक शीतकाल आवश्यक हैं। लीक की अच्छी पैदावार के लिए इसके पौधों पर मिटटी चढ़ानी चाहिए जिससे गट्ठी का आकार अच्छा तथा सफेद रंग रहें। तुड़ाई प्रायः बुवाई से 28-30 सप्ताह बाद की जाती हैं औसत उपज 300 क्विंटल/हेक्टेयर हैं। एक पौधे से 125-250 ग्राम उपज प्राप्त होती हैं। इसे हरे प्याज की तरह गुच्छों में बेचा जाता हैं।

लैट्यूस (सलाद) lettuce salad

यह एक महत्वपूर्ण सब्जी हैं। नर्म पत्तों तथा बंदों को सलाद के रूप में प्रयोग करते हैं। इसमें विटामिन ‘ए’ कैल्शियम तथा लोहा प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। इसे भुरभुरे दोमट व उपजाऊ मिट्टी में सफलतापूर्वक उगाया जा सकता हैं।

किस्में :-

सिम्पसन ब्लैक सीडीड, अलामो-1।

बुवाई का समय:-

निचले पर्वतीय क्षेत्र :- सितम्बर-अक्टुम्बर

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- सितम्बर-अक्टुम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- मार्च- जुलाई

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बीज की मात्रा:-

400-500 ग्राम प्रति हेक्टेयर।

अंतर:-

40X30 से.मी. और 30X20 से.मी.

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 100 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 250 किग्रा.
सुपर फास्ट 250 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 65 किग्रा.

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गोबर की खाद, सुपर फास्फेट तथा म्यूरेट ऑफ़ पोटाश की पूर्ण मात्रा केन की आधी मात्रा बुवाई करते समय डालें तथा शेष केन का आधा भाग उसके एक माह बाद डालें।

तुड़ाई:-

खुले पत्तों वाली किस्मों में तब तुड़ाई शुरू करें, जब पत्तों का आकार ठीक हो जाए और पत्ते नर्म हो, क्योंकि बड़े होने पर पत्ते कड़वे हो जाते हैं।

उपज:”-

200-250 क्विंटल/हेक्टेयर।

स्विस चार्ड (Swiss Chard)

Swiss Chard

यह पालक की तरह प्रयोग की जाने वाली सब्जी हैं जिसके पत्ते स्लाद के रूप में व डण्ठल कच्चे तथा पकाकर इस्तेमाल किये जाते हैं।

बुवाई का समय:-

निचले पर्वतीय क्षेत्र :- अक्टुम्बर

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- सितम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- मार्च- जुन

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बीज की मात्रा:-

4 किग्रा. प्रति हेक्टेयर।

अंतर:-

45X10 से.मी और 45X30 से.मी.

इसकी बिजाई प्याज की भांति करते है। पौध को 10-15 से.मी. गहरी नालियों में रोपित करते है।

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 100 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 300 किग्रा.
सुपर फास्ट 315 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 50 किग्रा.

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उपज:-

बड़े पत्ते तथा तने जब 50-60 दिन के हो, तोड़ लिए जाते हैं। पहले बाहर वाले पत्ते तोड़े जाते हैं। तुड़ाई प्रायः बुवाई के 12 सप्ताह बाद की जाती हैं। मध्य बसंत में मध्य ग्रीष्म ऋतू तक फसल उपलब्ध होती हैं। औसत उपज 100-150 क्विंटल/हेक्टेयर होती हैं। प्रति पौध की लगभग 350 ग्राम उपज होती हैं।

लाल बन्दगोभी (Red cabbage plant)

इसके बंद सख्त तथा बैंगनी रंग के होते हैं। यह शीत ऋतू की सब्जी हैं। इसे सलाद में, सुप में प्रयोग किया जाता हैं तथा सब्जी बनाकर भी खायी जाती हैं। इसके लिए नमी वाली भूमि जिसमे पानी का निकास अच्छा हो उपयुक्त रहती हैं।

किस्में :-

रैड रॉक, रैड ड्रम हैड, किन्नर रैड।

बुवाई का समय:-

निचले पर्वतीय क्षेत्र :- अक्टुम्बर- नवम्बर

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:- अगस्त-सितम्बर

ऊँचे पर्वतीय क्षेत्र:- अप्रैल-मई

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बीज की मात्रा:-

440 ग्राम प्रति हेक्टेयर।

अंतर:-

45X45 से.मी. और 60X30 से.मी.

बंद का आकार व वजन किस्म तथा पौधरोपण पर निर्भर करता हैं। बड़े आकार के बन्द बनाने के लिए ज्यादा फ़ासला रखने की आवश्यकता पड़ती हैं।

खाद एवं उर्वरक:-

खाद एवं उर्वरक

मात्रा प्रति हेक्टेयर

गोबर की खाद 150 क्विंटल
कैन (सी.ए.एन.) 480 किग्रा.
सुपर फास्ट 315 किग्रा.
म्यूरेट ऑफ पोटाश 45 किग्रा.

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फसल को उस समय पर काटा जाता हैं जब बन्द सख्त हो तथा रंग व सुगंध आना शुरू हो जाए। बन्द को बाहर वाली पत्तियों के साथ विपणन के लिए काटकर ले जाए। लाल बन्द गोभी को बुवाई से लेकर फसल काटने तक 12-15 सप्ताह लग जाते हैं।

उपज:-

100-145 क्विंटल प्रति हेक्टेयर।

एक पौधा 500-1000 ग्राम उपज देता हैं।

इस तरह प्रदेश के किसान व सब्जी उत्पादक विदेशी सब्जियों को उगाकर अधिक धन कमा सकते हैं और देश को खुशहाल तथा समद्ध बनाने में अपनी भूमिका निभा सकते हैं।

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