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लेजर लेंड लेवलर द्वारा भूमि का समतलीकरण करायें

लेजर लेंड लेवलर
Written by bheru lal gaderi

कृषि में भूमि का समतल होना बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। इस यंत्र के द्वारा खेतों का दोनों दिशाओं में समतलीकरण इस नई लेजर लेंड लेवलर तकनीक द्वारा सूक्ष्म रूप से होता हैं। इसमें किरणों के द्वारा ट्रेक्टर के पीछे हाइड्रोलिक पर लगी बकेट को स्वतः नियंत्रित करने में लगभग रु. 1500/- से रु. 2000/- प्रति हेक्टेयर की लागत आती हैं। इस यंत्र के प्रयोग से 25-30%पानी की बचत तथा 15-20% पैदावार में बढ़ोतरी होती हैं।

लेजर लेंड लेवलर

लेजर लेवलर के भाग

  1. ट्रेक्टर 50 हॉर्स पॉवर
  2. ट्रांसमीटर
  3. सेंसर या रिसीवर
  4. कंट्रोल बॉक्स
  5. बकेट
  6. आई-रिसीवर

यंत्र की कार्य प्रणाली

ट्रांसमीटर से किरणे निकलकर बकेट के ऊपर लगे स्टेण्ड से रिसीवर से टकराती हैं। रिसीवर कंट्रोल बॉक्स को ऊपर-निचे जाने के सिग्नल भेजता हैं। कंट्रोल बॉक्स में से उसी समय विद्युत सप्लाई हाइड्रोलिक तेल की सप्लाई बकेट के पीछे टायरों के मध्य में लगे हाइड्रोलिक जैक को मिलती हैं, जैक टायरों को ऊपर-निचे करता हैं।

जिसके विपरीत बकेट ऊपर-निचे होती रहती हैं। बकेट आगे व पीछे दोनों तरह से पिनों के साथ जुडी रहती हैं। इसलिए उस पर जमीन के ऊंचा या नीचा होने का कोई प्रभाव नहीं पड़ता। बकेट के एक सिमित ऊंचाई पर बढ़े होने के कारण उसके आगे आने वाले मिट्टी कटकर आगे खींची चली जाती हैं एवं जहां पर नीची जगह मिलती हैं मिट्टी स्वतः ही बकेट से निचे निकलकर फैलती रहती हैं जिससे खेत समतल हो जाता हैं। ड्राइवर द्वारा ट्रेक्टर को ऊंचाई की तरफ से नीचाई की दिशा में चलना होता हैं बाकि कार्य लेजर लेवलर द्वारा ऑटोमेटिक हो जाता हैं।

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यंत्र की कार्यविधि

  1. खेत की गहरी जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाये।
  2. आई रिसीवर व ग्रेड रोड की मदद से खेत में कम से कम 16 जगहों की ऊंचाई नॉट करें, उनका औसत खेत का लेबिल पॉइंट होगा।
  3. ट्रांसमीटर को स्टेण्ड पर बिजली की लाइन से दुरी ऐसी जगह पर रखें जहां से लेबिल किये जाने वाले खेत में किरणों की रुकावट न पड़ें।
  4. खेत का लेबिल दो चरणों में पूरा होता हैं। पहले चरण में खेत के लेबिल प्वाइंट पर आई रिसीवर को ट्रांसमीटर की किरणों के मध्य सेट कर देते हैं फिर ट्रेक्टर को गोलाई में चलाकर मिट्टी खेत में पूरी की जाती हैं, जिसे कटिंग फाइलिंग कहते हैं। 10 से.मि. (एक जुताई) तक खेत की मिट्टी प्रायः एक बार में पूरी हो जाती हैं। ज्यादा सलोप वाले खेत की जुताई करके दोबारा इसी तरह से मिट्टी पूरी करते हैं। दूसरे चरण में ट्रेक्टर को पूर्व-पश्चिम व उतर-दक्षिण दिशा में सीधा चलकर खेत को अंतिम रूप से समतल किया जाता हैं।

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लेजर लेंड लेवलर के प्रयोग में सावधानियां

  1. खेत में खरपतवार व पिछली फसल के अवशेष नहीं होने चाहिए।
  2. खेत की गहरी व बारीक़ जुताई होनी चाहिए।
  3. खेत में नमी का सही अनुपात होना चाहिए।

यंत्र की कार्य क्षमता

समय, खेत के आकार व स्लोप पर निर्भर करता हैं। यदि खेत का ढलान 10 से.मी. से कम हैं तो औसतन समय 5 घंटे प्रति हेक्टेयर लगता हैं। आकार व ढलान जिस अनुपात में बढ़ेंगे, समय उसी अनुसार बढ़ता चला जायेगा। आर्थिक दृष्टि से व खेत की उर्वरा शक्ति को संतुलित बनाये रखने के लिए 1-2 हेक्टेयर का खेत साइज सही रहता हैं आवश्यकतानुसार खेत का साइज किसान भाई अपनी इच्छा से रख सकते हैं।

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लेजर लेंड लेवलर के प्रयोग से लाभ

  1. पानी की30-40% बचत होती हैं।
  2. पैदावार में 15-25% की बढ़ोतरी पाई गई हैं।
  3. खेत की जुताई के क्षेत्रफल में 1-2% बढ़ोतरी।
  4. समतल खेत का आकार बड़ा होने से जुताई, निराई व फसलों के दूसरे सभी कार्यकलापों को करने में समय की बचत।
  5. खेत में पानी एकसार होने की वजह से फसल में खरपतवार नाशकों का ज्यादा असर।

लेजर लेंड लेवलर यंत्र की उपयोगिता

  1. सभी प्रकार की खेती योग्य भूमि को समतल करने के लिए।
  2. पार्क एवं खेल के के मैदानों को समतल करने के लिए।

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