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लता मंगेशकर – मातृशक्ति को नमन देश की ‘ताल’ लता मंगेशकर

लता मंगेशकर
Written by bheru lal gaderi

लफ्जों ने जिंदगी को मायने दिए हैं। देश के करोड़ों लोग के तरानों को अपनी आवाज से कालयजी बनाने वाली स्वर कोकिला हैं लता मंगेशकर। 28 सितंबर को उनका जन्मदिन हैं। इन दिनों मातृशक्ति का पूजन हो रहा हैं। लता मंगेशकर प्रतीक हैं उस मातृ शक्ति का, जिसने अनगिनत लोगों के जीवन को नई दिशा दी, नए विचार दिए अपनी आवाज के जरिए नए मायने दिए। लता मंगेशकर के गाने किसी घुटटी की तरह पीढ़ियों के कानों में घुलते रहे हैं। एक ऐसी आवाज जो अपने-पराए का भेद नहीं करती। लता मंगेशकर के गीतों ने देश को एक सुर में बांधा हैं। उनकी आवाज आज भी कानों में रस घोलती हैं और दिमाग को ऐसा सुकून देती हैं… जिसका आंनद शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता हैं…

लता मंगेशकर

पिता दीनानाथ मंगेशकर से सीखा संगीत का ककहरा और छा गई

घर में पिता दीनानाथ मंगेशकर से संगीत का ककहरा सीखा पर पिता जल्द ही चल बसे तो न सिर्फ परिवार संभाला बल्कि सुरों को भी परवान चढ़ाया। कुछ यूं रही हैं लता दीदी की गुमनाम सफर से लेकर दिलों पर राज करने की कहानी। आईये जानते हैं लता मंगेशकर के इस सफर को जो आज भी एक मिसाल हैं। संघर्ष से सफलता के पायदानों को हासिल करने का… संघर्ष की गाथा …पिता  ने भापा टैलेंट पर पहले ही साथ छोड़ गए

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संगीत ही प्यार

पिता बच्चों को संगीत सिखाते थे लता ने चलते-फिरते उन बच्चों से उम्दा सीखा।

अभिनय नहीं बना पसंद

पांच साल की उम्र में ही पिता से संगीत सीखना शुरू किया। थिएटर में अभिनय किया पर रास नहीं आया। जब 13 साल की थी तो पिता साथ छोड़ गए। परिवार की जिम्मेदारी लता पर आ गई। और मिली शोहरत …जब  रॉयल अल्बर्ट हॉल पर दुनिया ने सुने सुर

जादू चलाया

नौशाद, खय्याम, मदन-मोहन, शंकर-जयकिशन जैसे संगीत करों की चहेती बनी।

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रॉयल्टी के लिए भिड़ी लता मंगेशकर

60 के दशक में लता मंगेशकर ने अपना सिक्का जमाया। संगीतकारों से रॉयल्टी के लिए भी भिड़ी। 1974 में लंदन के रॉयल अल्बर्ट हॉल में उन्हें पहली भारतीय गायिका के रूप में गाने का अवसर प्राप्त हुआ।

जब मिला पहला ब्रेक मिला गॉडफादर

लता मंगेशकर ने एक इंटरव्यू में गुलाम हैदर को अपना ‘गॉडफादर’ कहा था।

‘आएगा आने वाला’ से आई दुनिया के सामने ये हैं हकीकत

शुरूआती दिनों में उनकी आवाज की आलोचना हुई पर संगीतकार गुलाम हैदर ने फिल्म ‘मजबूर’ में पहला ब्रेक दिया। 1949 में आई फिल्म महल के ‘आएगा आने वाला’ गाने से असली पहचान मिली।

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पुरस्कार

  • 1969:- पद्म भूषण
  • 1974:- सबसे अधिक गाने का गिनीज बुक रिकॉर्ड
  • 1989:- दादा साहब फाल्के पुरस्कार
  • 1993:- फिल्म फेयर का लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 1996:- स्क्रीन का लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार
  • 1999:- पद्म विभूषण
  • 2001:- भारत का सर्वोच्य नागरिक सम्मान भारत रत्न

लता का नाम ‘हेमा’ रखा गया था, पर थियेटर के एक पात्र ‘लतिका’ नाम पर, उनका नाम ‘लता’ रखा।

लता हमेशा नंगे पाव गाना गाती हैं। एकमात्र जीवित गायिका हैं,जिनके नाम से पुरस्कार दिया जाता हैं।

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पतली आज की वजह से नहीं मिला ब्रेक

निर्माता शशधर मुखर्जी ने लता मंगेशकर की आवाज को ‘पतली आवाज’ कहकर अपनी फिल्म ‘शहीद’ में गाने से मना कर दिया।

विश्व रिकॉर्ड

लता मंगेशकर का वर्ष 1974 में दुनिया में सबसे अधिक गीत गाने का ‘गिजिन बुक रिकॉर्ड’ दर्ज किया गया। लता मंगेशकर अपने सिने कॅरियर में अब तक 20 से अधिक भाषाओं में 30,000 से अधिक गीत गाने का कीर्तिमान बना चुकी हैं।

मधुबाला की पसंद

लता ने अपने सिने करियर में कई नामचीन अभिनेत्रियों के लिए गायन किया हैं लेकिन अभिनेत्री मधुबला जब फिल्म साइन करती थी तो अपने कॉन्ट्रेक्ट में इस बात का उल्लेख करना नहीं भूलती थी की उनके गाने लता मंगेशकर ही गाएंगी।

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एक दिन पढ़ाई

लता महज एक दिन स्कुल गई। जब वे पहले दिन छोटी बहन आशा भोसले को लेकर स्कुल गई तो अध्यापक ने कहा की आशा भोसले की भी फ़ीस देनी होगी। बाद में लता मंगेशकर कभी स्कुल नहीं गई। बाद में 6 विश्वविद्यालयों ने उन्हें मानक उपाधि से नवाजा।

पसंदीदा फिल्म

लता की सबसे पसंदीदा फिल्म ‘द किंग एंड आई’ हैं। हिंदी फिल्मों में उन्हें त्रिशूल, शोले, सीता और गीता, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और मधुमती पसंद हैं। वर्ष 1943 में रिलीज ‘किस्मत’ उन्हें इतनी पसंद आई की उन्होंने इसे लगभग 50 बार देखा हैं।

ख्वाहिश जो पूरी नहीं हो पाई..

लता को अपने घर में केवल के.एल. सहगल के गीत गाने की अनुमति मिली थी। उनकी यह ख्वाहिश थी की वह सहगल से मुलाकात करें और अभिनेता दिलीप कुमार के लिए गाना गाए, लेकिन उनके ये दोनों ख्वाहिश पूरी नहीं हो सकी।

स्रोत – राजस्थान पत्रिका

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