रक्षक फसल – फसल सुरक्षा में कारगार प्रयोग

By | 2017-06-24

काश्तकार जमकर मेहनत करता है, फसल को समय पर सींचता है तो जरूरी खाद-उर्वरक भी देता है। लेकिन उसकी फसल पर कीटों का प्रकोप हो जाए तो मेहनत व पूंजी बेकार हो जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए किसान को कीटनाशकों के इस्तेमाल के साथ ऐसे वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए, जो फसल की सुरक्षा कर सके। किसान किट आकर्षित या रक्षक फसल लगाकर काफी हद तक फसल को सुरक्षा दे सकता है। इसमे मुख्य फसल के साथ रक्षक फसल लग जाती है, जो कीटों को मुख्य फसल तक जाने नही देती।

रक्षक फसल

किट निरोधक या रक्षक फसल प्रणाली का प्रयोंग

अच्छे उत्पादन के लिए किसानों को किट आकर्षण व किट निरोधक या रक्षक फसल प्रणाली को आजमाना चाहिए। यह वैज्ञानिक प्रणाली पर आधारित सुरक्षा रणनीति है। इस प्रणाली में कीटों को आकर्षित करने वाले पोधों को इस्तेमाल किया जाता है। ये पोधे कीटों को आकर्षित करते हें और मुख्य फसल तक जाने से रोकते है, जिससे फसल की सुरक्षा होती है। इसमे किट निरोधक फसलों का स्योजन भी किया जाता है। यह प्रणाली इल्लियों, तना छेदक, बीटल, चूसने वाले कीटों से फसल के बचाव में कारगर है।

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रक्षक फसल इस्तेमाल के तरीके

इस प्रक्रिया में फसल और किट की प्रकृति के आधार पर कुछ तरीके इस्तेमाल किए जाते है। पहले तरीके में परिमाप फसलें आती हें, जिसमे मुख्य फसल के चारों और या कई पंक्तियों के बाद कुछ पंक्तियों में रक्षक फसलें लगाई जाती है। वही एक अन्य तरीके में कुछ मुख्य फसलें रक्षक फसलों से पहले या बाद में लगाई जाती है। एक से अधिक प्रकार के कीटों से बचाव के लिए एक साथ कई रक्षक फसलें लगाई जाती है। पशु-पुल की प्रक्रिया में रक्षक व निरोधक दोनों तरह की फसलें लगाई जाती है। इसमे रक्षक फसल कीटों को खीचने और निरोधक फसलें कीटों को दूर रखने का कार्य करती है।

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रक्षक फसले

निम्नलिखित मुख्य फसलों में रक्षक फसलों को उपयोग में लिया जा सकता है।

कपास

इल्ली से बचाने के लिए कपास की 5 लाइनों के बाद एक पंक्ति लोबिया की लगाए। कपास की 20 लाईनों के साथ 2 पंक्ति तम्बाकू की लगाए।

मूंगफली

फसल को पत्ती मोड़ने वाले थ्रिप्स व माईट से सुरक्षित रखने के लिए लोबिया मददगार है।

चना

धनिया या गेंदे की एक पंक्ति को चने की चार-चार कतारों के बाद लगाकर इल्ली से फसल की सुरक्षा की जा सकती है।

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बेंगन

यह फसल तना छेदक व फल छेदक से प्रभावित होती है। बेंगन की दो पंक्तियों के बाद एक कतार में धनिया या मति की फसल ली जा सकती है।

टमाटर

इसे फल छेदक या निमेटोड से सुरक्षित करने में अफ्रीकन गेंदा मददगार है। गेंदे की हर दो कतारें टमाटर की 14 पंक्तियों के बाद लगाए।

गोभी

सरसों रक्षक फसल के रूप में गोभी के लिए बेहद कारगार है। गोभी की 25 कतारों के बाद 2 पंक्तियों में सरसों लगाए।

अरहर

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इल्ली से इसकी सुरक्षा के लिए गेंदे को एक कतार में अरहर फसल के और चारों लगाया जाता है।

सोयाबीन

यह फसल तम्बाकू इल्ली से प्रभावित होती है। सूरजमुखी या अरंडी चारों और एक कतार में लगाए।

मक्का व ज्वार

तना छेदक किट दोनों फसलों के लिए चुनोती है। मक्का या ज्वार की फसल के चारों और या सूडान घास को रक्षक फसक के रूप में, जबकि बिच-बिच में कतारों में डेस्मोडीयन को निरोधक फसल के रूप में लगाया जाता है।

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नुकसान कम, बढ़ता है उत्पादन

फसल का उत्पादन घटाने में कीटों की अहम भूमिका होती है। रक्षक फसले लगाकर प्रभावित स्थिति से अधिक उत्पादन पाया जा सकता है। अच्छी रणनीति अपनाकर एक-तिहाई उत्पादन बढ़ाया जा सकता है। यह फसलें कीटनाशक के इस्तेमाल भी घटाती है।

वैज्ञानिक मार्गदर्शन जरूरी

इसे अपनाने के लिए किसान को मुख्य फसल, रक्षक फसल व किट के बारें में गहन जानकारी होनी चाहिए। किसान को एक योजना बनानी चाहिए की खेत में कब-कहाँ रक्षक फसलें उगाए। खेत की नियमित देखभाल करना और कृषि वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन लेना जरूरी है।

स्त्रोत:- राजस्थान पत्रिका

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