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रक्षक फसलें लगाकर वैज्ञानिक तरीकों से फसलों को कीटों से बचाएं

रक्षक फसलें
Written by bheru lal gaderi

फसल उपजाने के लिए किसान खेतों में बुवाई से लेकर सिंचाई तक खूब मेहनत करता है और समय पर जरूरी खाद- उर्वरक भी देता है। लेकिन यदि फसल पर कीटों का प्रकोप हो जाए तो पूरी मेहनत और पूंजी बर्बाद हो जाती हैं। ऐसे में किसान उन वैज्ञानिक तरीकों को अपना सकता है, जो प्रमुख फसल की सुरक्षा में कारगर है। किसान की कीट आकर्षित रक्षक फसलें लगाकर काफी हद तक अपनी फसल को सुरक्षित कर सकते हैं। इस तरीके में मुख्य फसल की सुरक्षा के लिए बाड़ की तरह रक्षक फसलें उगाई जाती हैं जो कीटों को मुख्य फसल तक जाने नहीं देती।

रक्षक फसलें

मानसून आ चुका है और प्रदेश के किसान खरीफ बुवाई में जुटे हैं। ऐसे में उन्हें फसल को कीटों से बचाने के लिए कीट आकर्षित फसलों  के बारे में योजना बना लेनी चाहिए। यह वैज्ञानिक प्रणाली पर आधारित एक सुरक्षित रणनीति है। इस प्रणाली में कीड़ों को आकर्षित करने वाले पौधों का इस्तेमाल किया जाता है। यह पौधे कीटों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं और मुख्य फसल तक जाने से रोकते हैं, जिससे फसल सुरक्षा के साथ उत्पादन भी बढ़ता है। इसके अलावा इसमें रक्षक फसलें व कीट निरोधक फसलों का संयोजन भी किया जाता है, जो फसल को सुरक्षा प्रदान करता है। यह प्रणाली इल्लियों, तना छेदक, बीटल, चूसने वाले कीट आदि पर कारगर रहती है।

एक तिहाई तक उत्पादन अधिक

फसल का उत्पादन घटाने में कीट की अहम भूमिका होती है। ऐसे में रक्षक फसलें लगाकर प्रभावित स्थिति से अधिक उत्पादन पाया जा सकता है। एक अच्छी रणनीति व कीटनाशकों का एक-तिहाई उत्पादन बढ़ाया जा सकता हैं। यह फसलें जीव विविधता बढ़ाने के साथ कीटनाशक के इस्तेमाल की मात्रा को कम करती हैं।

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इस तरह से लगाए रक्षक फसलें

सोयाबीन में रक्षक फसलें

यह फसल तंबाकू इल्ली से प्रभावित होती है। इसे बचाने के लिए सूरजमुखी को सोयाबीन के चारों ओर बॉर्डर पर एक कतार में लगाना चाहिए। मेक्सिकन बिन बिटल से बचाने के लिए फलियों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

अरहर में रक्षक फसलें

इल्ली से सुरक्षित करने के लिए गेंदे को एक कतार में अरहर फसल के चारों ओर लगाया जाता है।

मूंगफली

मूंगफली फसल को पत्ती मोड़ने वाले थ्रिप्स व माइट से अधिक खतरा होता है। इनसे सुरक्षित करने के लिए लोबिया मददगार है।

कपास में रक्षक फसलें

फसल को इल्ली से बचाने के लिए कपास की पांच पंक्तियों के बाद एक पंक्ति में लोबिया लगाए या कपास की 20 पंक्तियों के बाद तंबाकू की दो पंक्तियां लगाएं।

मक्का व ज्वार में रक्षक फसलें

तना छेदक कीट दोनों फसलों के लिए चुनौती है। इसकी सुरक्षा दो तरह से की जाती है। मक्का या ज्वार की फसल के चारों ओर नेपियर या सूडान घास को रक्षक फसल के रूप में, जबकि बीच-बीच में कतारों डेस्मोडियम को निरोधक के रूप में लगाया जाता है।

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बैंगन में रक्षक फसलें

यह फसल तना छेदक व फल छेदक से प्रभावित होती हैं। बैंगन की दो पंक्तियों के बाद एक कतार में धनिया की फसल ली जा सकती है।

टमाटर में रक्षक फसलें

इसे फल छेदक या निमेटोड से सुरक्षित करने में अफ्रीकन गेंदा मददगार हैं। गेंदे की हर दो कतारें टमाटर की 14 पंक्तियों के बाद लगाए।

सावधानी है जरूरी

इस वैज्ञानिक प्रक्रिया को अपनाने में किसान को मुख्य फसल, रक्षक फसल और कीट के बारे में गहराई से जानकारी होना आवश्यक है। कृषि वैज्ञानिक के मार्गदर्शन में किसान को सबसे पहले एक योजना बनानी चाहिए कि खेत में कब और कहां रक्षक फसलें उगाए। उसे कीटों की पहचान भी होनी चाहिए। नियमित रूप से खेत की देखभाल करनी चाहिए, ताकि रक्षक फसल पर कीट की अधिक मौजूदगी होने की स्थिति में उन पौधों की कांट-छांट या कीटनाशक का छिड़काव किया जा सके।

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रक्षक फसलें इस्तेमाल के अलग अलग तरीके

फसल की खासियत और कीट की प्रकृति के आधार पर इस प्रक्रिया में कुछ तरीके इस्तेमाल किए जाते हैं। पहले तरीके में परिमाप फसलें आती हैं, जिनमें मुख्य फसल के चारों ओर रक्षक फसलें उगाई जाती है। इसके अलावा मुख्य फसल की कुछ पंक्तियों के साथ रक्षक फसल की कुछ पंक्तियां लगाई जाती है। वहीं कुछ मुख्य फसलें रक्षक फसलों से पहले या बाद में लगाई जाती है। एक से अधिक प्रकार के कीटों से बचाव के लिए एक साथ कई रक्षक फसलें उगाई जाती है। वही पुश पुल तरीके में रक्षक व निरोधक दोनों तरह की फसलें लगाई जाती हैं। इसमें रक्षक फसलें कीटों को खींचने निरोधक को दूर रखने का कार्य करती है।

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राजस्थान पत्रिका

5- ई, झालाना संस्थानिक क्षेत्र, जयपुर,

पिन- 302004

ई-मेल – agro.ptrika@in.ptrika.com

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