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यांत्रिकरण खेती में कम लागत हेतु कृषि यंत्र

यांत्रिकरण खेती में कम लागत हेतु कृषि यंत्र
Written by bheru lal gaderi

गेहूं उत्पादन में उन्नत उपकरणों एव मशीनों का प्रयोग धीरे-धीरे बढ़ने लगा है बढ़ते यांत्रिकरण से जुताई, बुवाई तथा गहाई में विभिन्न प्रकार के ट्रैक्टर चलित हल, बीज बुवाई मशीनों तथा गहाई यंत्रों का प्रयोग किया जाता है। किंतु अभी भी यांत्रिकरण की प्रक्रिया में हम काफी पीछे है। कृषि कार्यों का यांत्रिकरण कर हम खेती की लागत में काफी कमी ला सकते हैं। उदाहरण गेहूं का कार्य परंपरागत रूप से मानव श्रम द्वारा करने पर कार्य की लागत लगभग रु.8000 प्रति हेक्टेयर आती है। यहां कटाई की विभिन्न मशीनें उपयोग में ले कर हम कटाई की लागत में काफी कमी ला सकते हैं। इनमें से कुछ मशीनों के बारे में नीचे वर्णन किया जा रहा हैं-

 स्वचालित वर्टिकल कन्वेयर रीपर

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स्वचालित वर्टिकल कन्वेयर गेहूं कटाई हेतु छोटे व मध्यम दर्जे के किसानों हेतु एक उपयोगी मशीन है इस मशीन की कार्य क्षमता लगभग 0.21 है../घंटा है। इसकी लागत लगभग 1,00,000/- रुपया है तथा इसके द्वारा कटाई की लागत लगभग रु.1100 प्रति हेक्टेयर आती है।

ट्रैक्टर चलित रीपर

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ट्रैक्टर चालित रीपर में कट्टर बार तथा संचरण प्रणाली स्वचालित वर्टिकल कनवेयर रिपर की तरह होती है किंतु इसको ट्रैक्टर की सहायता से चलाया जाता है ट्रैक्टर चलित रीपर की कार्य क्षमता 0.40 हे./घंटा होती है इसका मूल्य लगभग 75,000/- रुपए हैं तथा इसके द्वारा गेहूं कटाई की लागत लगभग  1100/-रुपए प्रति हेक्टेयर आती है।

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ट्रैक्टर चलित रीपर बाइंडर

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ट्रैक्टर चलित रीपर गेहूं कटाई एवं बधाई मशीन किसानों के लिए बहुत उपयोगी है। इसमें भी कट्टर बार से हटने के पश्चात पौधे पुलों में बंध जाते हैं। इस मशीन द्वारा कटाई एवं बधाई का कार्य बहुत सफाई से होता है अतः किसानों की बीच की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है इस मशीन का मूल्य लगभग 2,95,000/- रुपए हैं। इसके द्वारा लगभग 0.4 है./घंटा की दर से गेहूं की कटाई की जा सकती है तथा इसे कटाई की लागत लगभग 1050 रुपये/घंटा आती है।

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कंबाइन हार्वेस्टर

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मशीन बड़े किसानों के लिए अत्यधिक उपयोगी है। इसमें गेहूं की कटाई के साथ-साथ उनकी गहाई का कार्य भी हो जाता है और हमे साफ दाना प्राप्त हो जाता है। यह मशीन कई स्थानों पर किराए से उपलब्ध हो जाती है। यदि किसानों के आसपास कोई कस्टम हायरिंग केंद्र हो और वहां इनमें से कोई मशीन उपलब्ध हो तो किसान वहां से लेकर भी इस मशीन का उपयोग कर सकते हैं।

यांत्रिकरण का दूसरा उदाहरण हम खरपतवार नियंत्रण का लेते हैं कृषि कार्यों में यह भी ऐसा कर रही जिसमें अत्यधिक मानव श्रम लगता है। जिससे हमारी कृषि की लागत बढ़ती है। खरपतवार नियंत्रण हेतु एक बहुत ही उपयोगी मशीन पावर विडर है। जिसका उपयोग कर पैसे की काफी बचत की जा सकती है। नीचे इस मशीन के बारे में वर्णन किया जा रहा है।

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पावर विडर

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पावर विडर खरपतवार नियंत्रण हेतु एक उपयोगी मशीन है जिसे हाल ही में विकसित किया गया है। पावर विडर छोटे, मध्यम तथा बड़े तीनों प्रकार के किसानों हेतु एक महत्वपूर्ण मशीन है जिसका उपयोग चौड़ी कतारों में बोई जाने वाली फसलों में निराई-गुड़ाई हेतु किया जा सकता है। मक्का, कपास की फसल में तथा फलों के बाग-बगीचों में इसका बखूबी प्रयोग किया जा सकता है। पावर विडर से खरपतवार निकालने का कार्य करने के लिए पावर विडर का इंजन स्टार्ट कर हैंडल की सहायता से उसको पौधों की तारों के बीच चलाया जाता है।

पावर वीडर को सुगमता से चलाने के लिए उसमें क्लच, गियर, ब्रेक आदि हेतु लिवर लगे होते हैं। कोई भी व्यक्ति इनके बारे में जानकारी प्राप्त कर आसानी से इसको चला सकता है। पावर वीडर द्वारा खरपतवार निकालने का कार्य लगभग 0.1 हेक्टेयर/घंटा की दर से किया जा सकता है पावर वीडर का उपयोग कर किसान निराई-गुड़ाई के कार्य आसानी से कर सकते हैं। तथा अपने समय, श्रम तथा पैसों की बचत कर सकते हैं। गणनाओं के आधार पर यह कहा जा सकता है कि पावर वीडर का उपयोग कर निराई गुड़ाई की लागत में लगभग 60-80% तक अधिकतम समय व श्रम बचाया जा सकता है।

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सेंसर आधारित परिवर्तनीय छिड़काव मशीन

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यांत्रिकरण का एक अन्य उदाहरण हम हाल ही में विकसित उक्त मशीन का लेते हैं। फलों के बगीचों में रसायन छिड़काव हेतु यह एक उपयोगी मशीन है। सेंसर आधारित होने के कारण यह पेड़ को देखने के पश्चात ही रसायन का छिड़काव आरंभ करती है। पेड़ों के बीच खाली स्थान पर रसायन का छिड़काव नहीं होता है। इसके साथ-साथ यह पेड़ का आकार देखने के पश्चात रसायन की मात्रा तय करती है और उसी के अनुसार रसायन का छिड़काव होता है। इस मशीन द्वारा कार्य करने की दर 0.3 है./घंटा है। इस प्रकार  इस मशीन से कार्य करने पर कार्य की लागत एवं समय में कमी आती है वरन रसायन की मात्रा में भी लगभग 30% की बचत होती है और पर्यावरण का नुकसान भी कम होता है।

मुगफली हार्वेस्टर

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इसी तरह देखा जाए तो खेत से मुगफली निकालने का कार्य भी एक खर्चीला कार्य हैं। जिसमे ख़फ़ी मानव श्रम लगता हैं। परंपरागत रुप से मुगफली निकालने के लिए ट्रैक्टर चाहित ब्लेड हेरो खेत में चला कर मिट्टी की सख्ती  में कमी की जाती है तथा उसके पश्चात मानव श्रम द्वारा पौधों को उखाड़ा जाता है। ट्रैक्टर चलित  मुगफली निकालने की मशीन द्वारा यह कार्य बहुत ही सरलता से किया जा सकता है। इसमें एक ब्लेड की सहायता से मुगफली  बाहर निकाली जाती है और उसे खेत में लाइन में छोड़ दिया जाता है।

इसके बाद पौधों को मानव द्वारा आसानी से उठा लिया जाता है इस मशीन द्वारा कार्य करने की दर लगभग 0.3 हेक्टेयर/घंटा हैं। इससे उक्त कार्य में काफी कम श्रम, समय एवं लागत आती है। उपरोक्त मशीनों के अलावा भी अन्य जितनी मशीने विकसित की गई है वे परंपरागत विधियों की तुलना में समय, श्रम एवं लागत में पर्याप्त कमी लाती है। इन मशीनों के उपयोग से कृषि की लागत में 5-15% तक बचत की जा सकती है जिससे किसानों का लाभ बढ़ता है।

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कस्टम हायरिंग सेंटर

ट्रैक्टर चालित कृषि यंत्र काफी मांगे हैं। सभी किसानों द्वारा इनको खरीदा जाना संभव नहीं है। अतः यांत्रिकरण को बढ़ावा देने के लिए स्थान-स्थान पर राज्य सरकार द्वारा कस्टम हायरिंग सेंटर की स्थापना की गई है। वहां से मशीनें लेकर किसान उनका उपयोग कर सकते हैं। कृषि यंत्रों एवं मशीनरी पर संचालित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना का एक केंद्र उदयपुर में प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय के फार्म मशीनरी एवं शक्ति विभाग में स्थित है। किसान यहां से कृषि मशीनों और उपकरणों के बारे में जानकारी प्राप्त कर उनका उपयोग कर सकता है।

Author :-

डॉ. एस. एम. माथुर (मो.नं. 9460028535)

 विभागाध्यक्ष फार्म मशीनरी एवं पावर अभियांत्रिकी विभाग

 प्रौद्योगिकी एवं अभियांत्रिकी महाविद्यालय म.प्र. कृ.प्रौ.वि.वि. उदयपुर

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