agriculture Agrotech news

मुकुंदरा उड़द-2 नई किस्म से किसान होंगे और खुशहाल

मुकुंदरा उड़द-2
Written by bheru lal gaderi

उड़द की खेती करने वाले किसानों के लिए खुशखबर है। कोटा कृषि विश्वविद्यालय से संबंध उम्मेदगंज कृषि अनुसंधान केंद्र में उड़द पर चल रहा शोध पूरा हो गया है। केंद्र द्वारा विकसित मुकुंदरा उड़द-2 किस्म अनुमोदित कर दी गई है। देश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में बुवाई के लिए इसकी सिफारिश की गई है।

मुकुंदरा उड़द-2

देश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र के किसान उड़द की सामान्य किस्मों की बुवाई करते हैं, लेकिन उत्पादन क्षेत्र की जलवायु व भूमि की उर्वरता बेहतर होने के बावजूद आशा के अनुरूप उत्पादन नहीं होता। लेकिन मुकुंदरा उड़द-2 (केपीयू- 405) के सफलतम अनुसंधान के बाद कृषि वैज्ञानिकों का दावा है कि यह किस्म भारत के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र (राजस्थान भी शामिल) में अधिक बेहतर परिणाम देगी और किसानों के लिए लाभदायक साबित होगी। शाखाओं के रूप में फैलने वाले इस किस्म के प्रति हेक्टेयर में 3.33 लाख पौधे लगते हैं। वैज्ञानिक इसका बीजोपचार करने व खरपतवारनाशी के उपयोग की सलाह देते हैं।

Read also:- ब्राह्मी जड़ी-बूटी की उन्नत खेती एवं इसका औषधीय महत्व

एक दशक से अधिक चला अनुसंधान:-

यह किस्म कोटा कृषि विश्वविद्यालय से जुड़े कृषि अनुसंधान केंद्र उम्मेदगंज के वैज्ञानिकों डॉक्टर एसएस पुनिया, डॉक्टर बलदेव राम और उनकी टीम ने विकसित की है। केंद्र में एक दशक से उड़द की किस्म पर चल रहा अनुसंधान इस साल पूरा हो गया है। अनुसंधान पूरा होने के बाद केंद्र में इस किस्म का नामकरण मुकुंदरा उड़द-2 कर रिपोर्ट केंद्रीय किस्म अनुमोदन समिति के समक्ष प्रस्तुत की। समिति ने इस किस्म की देश के पश्चिमी मैदानी क्षेत्र में बुवाई के लिए सिफारिश की है।

बांसवाड़ा की मां, महाराष्ट्र का पिता:-

अखिल भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र नई दिल्ली से स्वीकृति मिलने के बाद वर्ष 2002 में उम्मेदगंज केंद्र पर उड़द की नई किस्म ईजाद करने का प्रोजेक्ट शुरू हुआ। बांसवाड़ा केंद्र पर तैयार मोटे दाने की उड़द किस्म आरबीयू 1012 और महाराष्ट्र की रोग प्रतिरोधक किस्म एम 1-1 से यह तीसरी किस्म ईजाद की है। इसमें बांसवाड़ा किस्म (माँ) व महाराष्ट्र की किस्म (पिता) के गुण समाहित करने के बाद कई स्तर पर मूल्यांकन किया गया। राजस्थान और दूसरे राज्यों की जलवायु वाले करीब 13 केंद्रों में इसे प्रायोगिक तौर पर जांचा गया।

Read also – ऑर्गेनिक सर्टिफिकेट देने वाली एजेंसियों के नाम

मुकुंदरा उड़द-2 की विशेषताएं:-

  1. खरीफ और जायद में बुवाई के अनुकूल
  2. पकाव अवधि
  3. 74-76 दिवस, परंपरागत किस्म से 8 से 10 दिन पहले पकाव

उत्पादन:-

10 से 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर, अनुकूल परिस्थितियों में 15 क्विंटल तक पैदावार में सक्षम।

दाना:-

गहरा काला, सामान्य से मोटा, चमकीला, अधिक भाव

Read also – रक्षक फसलें लगाकर वैज्ञानिक तरीकों से फसलों को कीटों से बचाएं

रोग प्रतिरोधकता क्षमता:-

कीट एवं बीमारियों के प्रति मध्यम श्रेणी में सहनशील

बुवाई:-

प्रति हेक्टेयर 18 से 20 किलो बीज की जरूरत

पंक्ति से पंक्ति की दूरी:- 30 सेमी

पौध से पौध की दूरी:-10  सेमी

इनका कहना:-

लंबे अनुसंधान के बाद मुकुंदरा उड़द-2 वर्ष 2018 में अनुमोदित हो पाई। रोग प्रतिरोधकता व उपज में यह अन्य की तुलना में अधिक मुफीद है। प्रदेश के किसानों को इससे अधिक लाभ होगा।

डॉ. बलदेव राम, शस्य वैज्ञानिक, कृषि अनुसंधान केंद्र, उम्मेदगंज

Read also – मुनगा (सहजन) की पत्तियों की अनुबंध पर खेती की तैयारी

प्रस्तुति:-

धनराज टांक
कोटा

स्रोत:-

राजस्थान पत्रिका एग्रोटेक

गुरुवार 19 जुलाई  2018

Emai – agro.patrika@in.patrika.com

Website – राजस्थान पत्रिका

Read also  – कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों को मिलेगा उपज का सही दाम

Facebook Comments

About the author

bheru lal gaderi

Hello! My name is Bheru Lal Gaderi, a full time internet marketer and blogger from Chittorgarh, Rajasthan, India. Shouttermouth is my Blog here I write about Tips and Tricks,Making Money Online – SEO – Blogging and much more. Do check it out! Thanks.