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अमरूद की सघन एवं मीडो बागवानी पद्धति

मीडो बागवानी
Written by bheru lal gaderi

मीडो बागवानी की स्थापना

मीडो बागवानी पद्धति के अंतर्गत 2.0 मी. (पंक्ति से पंक्ति) 1.0 मीटर (पौध से पौध) की दूरी पर प्रति हेक्टेयर 5000 पौधों का रोपण किया जाता है। प्रारंभ में, पौधों को बोना आकार एवं बेहतर केनॉपी देने के लिए कटाई-छंटाई कर उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है जिससे कि पहले वर्ष के दौरान ही गुणवत्ता वाले फलों का अधिकतम उत्पादन प्राप्त किया जा सके।

मीडो बागवानी पद्धति

मीडो बागवानी में पौधों की कटाई-छंटाई

मीडो बागवानी के अंतर्गत एकल तना वाले पौध को 30-40 सें.मी. की ऊंचाई तक बिना किसी बाधा के बढ़ने देते हैं। पौधरोपण के 1-2 महीने के पश्चात सभी पौधों को जमीन की सतह से 30-40 सें.मी. की ऊंचाई पर समांतर रूप से काटा जाता है जिससे कि काटे गये हिस्से के नीचे से नये कल्ले निकल सके। कटाई छटाई के पश्चात तने के अगल बगल में कोई प्ररोह या शाखा नहीं होनी चाहिए। ऐसा पौध को 40 सें.मी. की ऊंचाई तक एक तना वाला पेड़ बनाने के लिए किया जाता है। कटाई के 15 दिनों के पश्चात नए कल्लों का सृजन होता है।

कटाई के पश्चात सामान्यत 3-4 प्ररोहों को ही रहने दिया जाता है। सभी प्ररोह जब 3-4 महीने बाद परिपक्व हो जाते हैं तो उनकी लंबाई के 50% हिस्से को काट दिया जाता है, जिससे कि नये प्ररोह पुनः निकल सके। यह कार्य पौधों को वांछित तथा मजबूत आकार देने के लिए किया जाता है।

इन प्ररोह को तीन चार महीने तक बढ़ने दिया जाता है। इसके बाद इनकी लंबाई के 50% हिस्से की कटाई की जाती है। कटाई उपरांत नये प्ररोह निकलते हैं और इन प्ररोह को पुनः उनके लम्बाई के आधे भाग को 3-4 माह बाद काट दिया जाता है।

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सघन बागवानी की स्थापना

किसानों का ध्यान उत्पादन से उत्पादकता एवं अंततोगत्वा लाभ  की ओर उन्मुख हुआ है। जिसकी प्राप्ति सघन बागवानी प्रणाली द्वारा की जा सकती है। वर्तमान में सघन या मीडो प्रणाली के अंतर्गत पौधरोपण कम दूरी पर किया जाता है।

नए प्रचलन में सघन बागवानी के साथ-साथ पौधों को लघु आकार देने की प्रक्रिया बागवानी के लिए अधिक लाभदायक होने के कारण स्वीकार्य हो रही हैं। वर्तमान समय में किसानों/बागवानों में सघन या   मिडो बागवानी की ओर झुकाव देखा जा रहा है।

योजनाबद्ध तरीके से केनॉपी प्रबंधन

योजनाबद्ध तरीके से केनॉपी प्रबंधन को अपनाकर बागों से उच्च गुणवत्ता वाले उत्पाद प्राप्त किए जा सकते हैं।  केनॉपी में परिवर्तन कर छोटे या बोन आकार वाले पेड़ की बागवानी की आधुनिक पद्धति को मीडो बागवानी की संज्ञा दी गई है। पौधों की केनॉपी में सूर्य की रोशनी का सर्वोत्तम वितरण, पदीप्त पत्तियों की संख्या में वृद्धि करता है। यह प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को बढ़ावा देता है जिससे प्रति इकाई क्षेत्र में उच्च उत्पादन की प्राप्ति होती है।

अमरूद के पौधों को लगाने कि यह नवीन पद्धति अमरूद उद्योग में उत्पादन एवं श्रम लागत में कमी लाते हुए उत्पादकता बढ़ाकर क्रांति ला रही हैं। अमरूद के पेड़ पर सधाई कटाई-छटाई का अच्छा प्रभाव दिखता है।

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पौधरोपण की दुरी

शीघ्र तथा उच्च गुणवत्ता युक्त अमरूद उत्पादन के लिए सघन बागवानी प्रणाली अंतर्गत पौधरोपण की निम्नानुसार दूरी स्तुति की गई हैं।

क्र.सं.पंक्ति से पंक्ति की दुरी/ मी.पौध से पौध

की दुरी/ मी.

पौधों की संख्या

/हेक्टेयर

1.

3.01.52222

2.

3.03.0

1111

3.6.03.0

555

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अमरूद की सघन एवं मीडो बागवानी

  • (3.0×1.5मी. X 3.0×3.0मी. तथा 6.0×3.0 मी.)
  • पौधरोपण के 1-2 महीने के पश्चात सभी पौधों को जमीन की सतह से 60-0 सें.मी. की ऊंचाई पर पौधों को काटना
  • काटे गये भाग के निचे से नये कल्लों का सृजन
  • 3-4 कल्लों को समान दूरी पर रखना
  • कल्लों के निकलने के 3-4 माह बाद कटाई करना
  • कल्लों की लम्बाई का 50% काटना
  • कटाई बिंदु के निचे से अनेक कल्लों का सृजन
  • पुनः 3-4 माह बाद कल्लों की कटाई करना
  • बेहतर केनॉपी हेतु दूसरे साल भी कल्लों की कटाई करना
  • 2 वर्ष पश्चात कल्लों की कटाई करना
  1. जनवरी-फरवरी वर्षा ऋतु फसल के लिए
  2. मई-जून जेड की फसल के लिए
  • कल्लों की लम्बाई का आधा भाग (50%) को प्रति वर्ष काटना जिससे वृक्ष का आकार और फैलाव पर नियंत्रण

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स्रोत :-

कृषि भारती

वर्ष- 8, अंक- 02, 16/11/2017

जयपुर

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लेखक :-

सोमेन्द्र शर्मा

राजेंद्र सिंह मनोहर

जयपुर

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