agriculture

मिलावटी उर्वरकों की जांच कैसे करें ?

मिलावटी उर्वरक
Written by bheru lal gaderi

भारत एक कृषि प्रधान देश है जिसकी 70% जनसंख्या खेती पर निर्भर हैं। खेती किसानी में प्रयोग किए जाने वाले कृषि निवेशकों में उर्वरक सबसे महंगा कृषि आदान है, जिसका फसल उत्पादन बढ़ाने में 20 से 50% का योगदान रहता है। कई क्षेत्रों में उर्वरकों की सीमित उपलब्धता और कालाबाजारी से निम्न कोटि के उर्वरकों की बिक्री आदि के कारण कुछ उर्वरक विनिर्माताओं तथा विक्रेताओं द्वारा नकली एवं मिलावटी उर्वरक बाजार में बेचने लगते हैं।

मिलावटी उर्वरक

कई किसान भाइयों को शिकायत रहती है कि भरपूर खाद-उर्वरक उपयोग करने के बाद में बढ़ोतरी अर्थात मुनाफा नहीं हो रहा एवं मिट्टी की उर्वरा शक्ति कमजोर हो रही है। इसकी प्रमुख वजह घटिया स्तरहीन उर्वरकों का प्रयोग ही है यह सच है कि घटिया या मिलावटी उर्वरकों के उपयोग से फसलों के उत्पादन में कमी आती है। उर्वरकों के उपयोग से वंचित लाभ तभी मिल सकता है जब उन में पोषक तत्वों में सही मात्रा उपलब्ध हो। अतः किसान भाइयों को बाजार में उपलब्ध उर्वरकों का परीक्षण कर पूर्ण खरीदना चाहिए, ताकि मिलावट की धोखाधड़ी से बचा जा सकता है।

Read also:- तरल जैव उर्वरक एवं इसकी प्रयोग विधियां

उर्वरकों में सामान्य पदार्थों की मिलावट

  1. यूरिया साधारण नमक, म्यूरेट ऑफ़ पोटाश।
  2. डी.ए.पी. सुपर फास्फेट, रोक फास्फेट, एन.पी.के. मिश्रण, चिकनी।
  3. सुपर फास्फेट क्ले मिट्टी, जिप्सम की गोलियां।
  4. एम.ओ.पी. बालू, साधारण नमक।

परीक्षण की विधियां

यूरिया- (46% नत्रजन)

यह एक प्रमुख पोषक तत्व प्रदान करने वाला उर्वरक है, जिसमें 45-46% नत्रजन तत्व पाया जाता है। कृषि क्षेत्र में सबसे अधिक मात्रा में उर्वरक का उपयोग किया जाता है। प्रतिवर्ष फसल बुवाई के समय यूरिया की बाजार में कमी देखी जाती है, जिसके कारण विक्रेता घटिया अथवा मिलावटी उर्वरकों को किसानों को बेच देते हैं, जिससे किसान को लाभ नहीं हो पाता है। अतः यूरिया खाद खरीदने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच करना उचित होता है। यूरिया में मिलावटी उर्वरकों के शुद्धिकरण की जांच निम्न प्रकार से की जा सकती है:

  • 1 ग्राम यूरिया उर्वरक में तथा 5 मि.ली. आसुत जल मिलाएं और पदार्थ के गोले एवं 5-6 बून्द सिल्वर नाइट्रेट मिलाएं, दही जैसा सफेद अवक्षेप का बनना यह प्रदर्शित करता है कि पदार्थ मिलावटी है। किसी भी अवक्षेप का बनना शुद्ध यूरिया को बताएगा।
  • एक चम्मच यूरिया परखनली में ले तथा पिघलने तक गर्म करें, ठंडा होने पर 1 मि.ली. पानी में घोले तथा बून्द-बून्द कर बाइयुरेट गोल मिलाएं, गुलाबी रंग आता है, तो यूरिया शुद्ध हैं और यदि गुलाबी रंग नहीं आए तो समझे मिलावट है।
  • हथेली पर थोड़ा पानी ले, 2 मिनट बाद पानी का ताप अनुरूप हो जाए तब 10-15 दाने यूरिया के डालें, यदि सफेद अवक्षेप आता है, तो यूरिया मिलावटी है।
  • शुद्ध यूरिया चमकदार, लगभग समान दानें वाला, पानी में पूर्णतया घुल जाना, घोल को छूने पर शीतल की अनुभूति होना, गर्म तवे पर रखने से पिघल जाना, आंच तेज करने पर कोई अवशेष न बचना आदि सामान्य बातें हैं।

Read also:- जैव उर्वरक एवं जैव नियंत्रण द्धारा आधुनिक खेती

डाई अमोनियम फास्फेट (डी.ए.पी.)- 18% नत्रजन 46% फास्फोरस

यूरिया के बाद सर्वाधिक मात्रा में उपयोग में लाया जाने वाला महत्वपूर्ण उर्वरक है जिसमें 18% नत्रजन और 46% फास्फोरस पाया जाता है। डी.ए.पी. में मिलावटी उर्वरकों के शुद्धिकरण की जांच निम्नानुसार की जा सकती है:

  • 1 ग्राम पिसा नमूना परखनली में ले, 5 मि.ली. आसुत जल (डिस्टिल वाटर) मिलाएं और हिलाए, फिर 1 मि.ली. नाइट्रिक अम्ल मिलाएं, फिर हिलाए। यदि यह घुल जाए एवं गोल अर्ध-पारदर्शी हो जाए, तो डी.ए.पी. शुद्ध हैं यदि कोई पदार्थ अघुलनशील बचता है, तो मिलावट है।
  • सामान्य शुद्ध डी.ए.पी. के दानों का आकार एकदम गोल नहीं होता, यदि डी.ए.पी के दानों को गर्म करने या जलाने पर दाने साबूदाने की भांति फूलकर लगभग दो गुने हो जाए, तो वह शुद्ध होगा। डी.ए.पी. के दानों को लेकर फर्श पर रखें, फिर जूते के तले से रगड़े, शुद्ध डी.ए.पी. के दाने टूटते नहीं यदि दानें आसानी से टूट जाए तो डी.ए.पी. में मिलावट है।
  • डी.ए.पी. में नाइट्रोजन की जांच के लिए एक ग्राम पिसे डी.ए.पी. में चुना मिलायें, सूंघने पर यदि अमोनिया की गंध आती है तो डी.ए.पी. में नाइट्रोजन उपस्थित हैं। यदि नहीं तो डी.ए.पी. में मिलावट हो सकती है।
  • 1 ग्राम पिसा हुआ नमूना लें तथा 5 मिली आसुत जल में घोले, हिलाए, फिल्टर पेपर से छाने, उस फिल्ट्रेट में 1 मि.ली. सिल्वर नाइट्रेट घोल मिलाएं, पिले अवक्षेप का बनना। जो 5-6 बूंद नाइट्रिक एसिड को मिलाने पर घुल जाए, तो पदार्थ में फास्फेट उपस्थित हैं और डी.ए.पी. शुद्ध हैं। यदि अवक्षेप सफेद है, तो मिलावट है।

Read also:- रासायनिक उर्वरक प्रयोग,महत्व एवं उपयोग विधि

म्यूरेट ऑफ पोटाश

अधिकांश भारतीय मिट्टियों में पोटाश तत्व की कमी नहीं रहती हैं फिर भी संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए नत्रजन और फास्फोरस के साथ पोटेशियम युक्त उर्वरक म्यूरेट ऑफ पोटाश देने की अनुशंसा की जाती है म्यूरेट ऑफ पोटाश में मिलावटी उर्वरकों की शुद्धता की परख निम्नानुसार की जा सकती है:

  • 1 ग्राम उर्वरक परखनली में ले, 5 मिली. आसुत जल मिलाएं वह अच्छी तरह हिलाएं अधिकारपूर्वक घुल जाएं तथा कुछ अघुलनशील पानी की सतह पर तेरे, तो शुद्ध पोटाश होगी। यदि अधिकांश अघुलनशील पदार्थ परखनली के तले पर बैठ जाए तो समझे उर्वरक में मिलावट हैं।
  • शुद्ध पोटाश पानी में पूर्णतया घुलनशील, रंगीन पोटाश का लाल भाग पानी पर तैरता है। यदि ऐसा है, तो अशुद्ध है अन्यथा नहीं, शुद्ध पोटाश के कण नम करने पर आपस में चिपकते नहीं।
  • एक चम्मच उर्वरक को 10 मिली जल में घोले, नीथरे भाग से 2 मि.ली. घोल में 2 मि.ली. तनु हाइड्रोक्लोरिक एसिड का गोल मिलाएं, इसमें एक मिली बेरियम क्लोराइड मिलाने पर यदि स्वच्छ गोल बनता है, तो उर्वरक शुद्ध है और यदि सफेद अवक्षेप है, तो समझे मिलावट है।

Read also- ट्राइकोडर्मा जैव -उर्वरकों के उपयोग का कृषि में महत्व

जिंक सल्फेट

सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करने वाला यह उर्वरक है। धान- गेहूं फसल चक्र वाले क्षेत्रों में इस तत्व की कमी देखी जा रही है। जिंक सल्फेट में मिलावटी उर्वरकों की शुद्धता की जांच निम्नानुसार की जा सकती हैं:

  • 1 ग्राम उर्वरक परखनली में ले, आसुत जल मिलाएं, अच्छी तरह हिलाएं, फ़िल्टर पेपर में छाने 8-10 बून्द हाइड्रोक्साइड का घोल मिलाएं, सफेद पदार्थ बनता है, तब 10-12 बुँदे सांद्र सोडियम हाइड्रोक्साइड घोल मिलाएं, अगर अवक्षेप घुल जाए, तो पदार्थ शुद्ध है अन्यथा नहीं।
  • पानी में घुलनशील लेकिन इसका गोल यूरिया या एम.ओ.पी. की तरह ठंडा नहीं होता तो शुद्ध पदार्थ हैं।
  • डी.ए.पी. के घोल में जिंक सल्फेट के घोल को मिलाने पर थक्केदार घना अवक्षेप बन जाता है, जबकि मैग्नीशियम सल्फेट के साथ ऐसा नहीं होता।

सिंगल सुपर फास्फेट (एस.एस.पी.)-16% फास्फोरस

नत्रजन के बाद दूसरा आवश्यक पोषक तत्व है तथा फसलों की उपज बढ़ाने में कारगर सिद्ध हो चुका है। सिंगल सुपर फास्फेट में मिलावटी उर्वरकों की शुद्धता की जांच निम्नानुसार की जा सकती है:

  • परखनली में 1 ग्राम उर्वरक 5 मि.ली. आसुत जल मिलाएं तथा अच्छी तरह हिलाएं और छाने तथा 5-6 बूंद सिल्वर नाइट्रेट घोल मिलाएं यदि पीला अवक्षेप है एवं घुल जाए तो फास्फेट की उपस्थिति है, यदि नहीं तो पदार्थ संदिग्ध है।
  • दानेदार पाउडर, काला भूरा आदि रंगों में से एक दाना हथेली पर रगड़ने से आसानी से टूट जाए तो शुद्ध हैं।
  • आधे चम्मच उर्वरक को 5 मि.ली. आसुत जल में घोले, ऊपर के निथरे भाग को दूसरी परखनली में लेकर 15 से 20 बूंदे सिल्वर नाइट्रेट के घोल को मिलाएं, हल्का दूधिया अवक्षेप प्राप्त होता है, इसमें दो से तीन बूंद तनु कास्टिक सोडा मिलाने पर पीला अवक्षेप आता है तो उर्वरक शुद्ध है यदि ऐसा नहीं तो उर्वरक अशुद्ध समझे।

Read also:- कैसे करें नत्रजन स्थिरीकरण के लिए जीवाणु खाद-कल्चर का…

निष्कर्ष

ऊपर दी गई सलाह को ध्यान में रखकर किसान भाई मिलावटी उर्वरकों को पहचान कर व शुद्ध उर्वरक प्रयोग में लाकर मिट्टी में उर्वरकों की मांग को पूरा कर फसल उत्पादन को बढ़ाया जा सकता है।

प्रस्तुति

राजेश कुमार दोतानिया, शस्य विज्ञान विभाग,

ओ पी जे एस महाविद्यालय चूरू,

चेतन कुमार दोतानिया,

मृदा विज्ञान और कृषि रसायन विभाग,

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय,

बीकानेर (राज.)

Facebook Comments

About the author

bheru lal gaderi

Hello! My name is Bheru Lal Gaderi, a full time internet marketer and blogger from Chittorgarh, Rajasthan, India. Shouttermouth is my Blog here I write about Tips and Tricks,Making Money Online – SEO – Blogging and much more. Do check it out! Thanks.