मिर्च उत्पादन से किसान बना मालामाल एवं अधिक लाभ

By | 2017-06-08

परम्परागत फसलों की तुलना में सब्जियों की खेती अधिक मुनाफा देने वाली फसल साबित हो सकती है, बशर्ते वैज्ञानिक और उन्नत तरीके से उनका उत्पादन किया जाए। सब्जियों की खेती में सफलता का उदाहरण पेश किया है, झालावाड़ के किसान मनमीत सिंह झाला ने, जिन्होंने एक ही सीजन में सालभर की आमदनी पाने में सफलता हासिल की है। वे अभी तक 80 टन मिर्च का उत्पादन ले चुके है और करीब डेढ़ माह तक और उपज ली जानी बाकी है।

मिर्च

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मिर्च उत्पादन

झालावाड़ जिला गेहूँ और सोयाबीन की खेती के लिए मशहूर है। भीलवाड गांव के प्रगतिशील किसान झाला यहाँ परम्परागत खेती से हटकर मिर्च, टमाटर, धनिया आदि सब्जियों एवं संतरा की खेती कर रहे है। झाला बतातें की उन्होंने सोचा की वे ऐसी फसल जरुर लेंगे जो एक ही सीजन में उन्हें सालभर की आमदनी के बराबर आय दे सकें। इसके लिए उन्होंने स्थानीय विभाग में सहायक कृषि अधिकारी सतीश गोतम से संपर्क किया। उनके बताए अनुसार किसान ने पोधशाला में पोध का विकास कर प्लास्टिक मल्चिंग की तकनीक से मिर्च का रोपण शुरू किया। साथ ही सोलर सिस्टम की मदद से बून्द- बून्द प्रणाली के जरिए सिंचाई की गई। किसान बताते है की शुरुआत में उनके मन में डर था, जब पेदावर मिलनी शुरू हुई तो ख़ुशी की सीमा न रही।

चार किस्म की मिर्च ले रहे

झाला बताते है की वे अपनी 14 बीघा जमीन में मिर्च की चार किस्मों जुपीटर, भामनी, सितारा और यूएस- 16 का उत्पादन ले रहे है। वे अब तक करीब 80 टन मिर्च की पैदावर ले चुके है और इससे 12 लाख रूपये की आय अर्जित कर चुके है हालांकि, मिर्च से उन्हें अभी डेढ़ माह और पदावर मिलनी शेष है। किसान बताते है की अगेती मिर्च की बुवाई से बाजार में मांग होने के कारण अच्छा भाव मिलता है। सीजन में सभी लोगो के आने पर भाव उतना नही मिल पाता है। अच्छा भाव हो तो सालभर की कमाई एक ही सीजन में निकल जाती है।

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लू के बचाव के लिए लगाई मक्का

उन्होंने मिर्च की 8-10 क्यारियां छोड़ कर बीच- बीच की पंक्तियों में मक्का लगा रखी है। ताकि गर्मी में चलने वाली लू से मिर्च को नुकसान न हो, वह झुलसने से बच सके। इसका लाभ मिला की 47 डिग्री तापमान में भी मिर्च की फसल पर कोई असर नही हुआ है।

लाभकारी हें मल्चिंग प्रणाली

झाला कहते है की मल्चिंग पद्धति से फसले ली जाए तो अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है इससे खेत में नमी बनी रहती है और खरपतवार पनप नही पाते। उन्होंने प्लास्टिक मल्चिंग बेड में हर 30 सेंटीमीटर दुरी पर बनाए गए छेद में पोधरोपण किया।

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संतरा के साथ भी प्रयोग

झाला संतरे की फसल के बीच में मल्चिंग प्रणाली से बूंद-बूंद सिंचाई कर टमाटर की फसल ले रहे है। इससे पोधों पर कोई असर नही होगा, पानी उपर जाएगा और संतरे पर धुप का असर नही आएगा।

उठाया खतरा, गर्मी में कर रहे टमाटर की खेती

समय से पहले सब्जी का भाव अच्छा मिल सके, इसके लिए वे तेज गर्मी में भी टमाटर की रोपाई कर रहे है। हलाकि 20 फीसदी पोधे ख़राब होंने का डर है, फिर भी खतरा उठाकर वे 15 बीघा भूमि में टमाटर की ‘अभिशंषा’ किस्म बो रहे है। उन्होंने सात बीघा क्षेत्र में गोभी की फसल भी लगा रखी है तो चार बीघा में धनिया उत्पादित कर रहे है।

इनका कहना….

प्रगतिशील किसान मनमीत झाला 14 बीघा में मिर्च की पैदावार ले रहे है। वे अपनी करीब 45 बीघा जमीन में प्लाटिक मल्चिंग प्रणाली का इस्तेमाल कर रहे है।

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स्त्रोत:- राजस्थान पत्रिका

पत्रिका लिंक:- agro.patrika@in.patrika.com

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