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भैंस में फूल दिखाने की समस्या का यु करे उपचार

भैंस में फूल दिखाने की समस्या का यु करे उपचार
Written by Vijay dhangar

भैंसों में फूल दिखाने की समस्या मुख्य रूप से बच्चा जनने से पहले ही होती है। आमतौर पर यह समस्या प्रसव के 15-60 दिन पहले शुरू होती है। रोग की शुरूआत में भैंस के बैठने पर छोटी गेंद के समान रचना योनिद्वार पर दिखार्इ देती है। भैंस के खड़ा होने पर यह योनिद्वार के अन्दर चली जाती है। धीरे -धीरे इसका आकार बढ़ता रहता है तथा इसमें मिट्टी, भूसा व कचरा चिपकने लगता है। इसके कारण भैंस को जलन होती है और वह पीछे की ओर जोर लगाने लगती है। जिस कारण से समस्या बढ़ती जाती है एवम् और जटिल हो जाती है। कभी-कभी तो कुत्ते और कौवे इसकी ओर आकर्षित होकर शरीर के बाहर निकले हुए भाग को काटने लगते हैं।

गर्भावस्था के दौरान बच्चे की सामान्य स्थिति प्रोलेप्स होने पर योनि का बाहर निकलना

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उपचार:-

  1. फूल दिखाने वाली भैंस को साफ-सुथरी जगह बाँधें, जिससे निकले हुए भाग पर भूसा व गंदगी न लग सके। कुत्ते और कौवे ऐसे स्थान पर न जा सकें। अन्य पशु भी उससे दूर रहें।
  2. भैंस को ऐसी जगह बाँधें, जो आगे से नीचा तथा पीछे से 2-6 इंच ऊँचा हो। इससे पेट का वजन बच्चेदानी/ योनि पर दवाब नहीं डाल पाता है।
  3. भैंस को सूखा चारा (तूड़ी/भूसा) न खिलायें। चारा हरा होना चाहिए तथा दाने में चोकर व दलिया प्रयोग करें। प्रसव तक चारे की मात्रा थोड़ी कम ही रखें। इस बात का विशेष ध्यान रखें कि भैंस को कब्ज न होने पाए व गोबर पतला ही रहे।
  4. शरीर निकलने पर योनि को साफ व ठण्डे पानी से धोएँ, जिससे उस पर भूसा व मिट्टी न लगी रहे। पानी में लाल दवार्इ डाल सकते हैं। पानी में ऐसी कोर्इ दवा न डालें जिससे योनि में जलन होने लगे।
  5. भैंस के आहार में रोजाना 50-70 ग्राम कैल्शियम युक्त खनिज लवण मिश्रण अवश्य मिलायें। ये खनिज मिश्रण दवा विक्रेता के यहाँ अनेक नामों (एग्रीमिन, मिनीमिन, मिल्कमिन इत्यादि) से मिलते हैं। खनिज लवण मिश्रण पर ISI मार्क लिखा होना चाहिये।

  6. नाखून काटकर साफ हाथों से योनि को अंदर धकेल दें तथा नर्म रस्सी की ऐंड़ी बाँध दें। ऐंडी बांधते समय यह ध्यान रखें कि यह अधिक कसी न हो तथा पेशाब करने के लिए 3-4 अंगुलियों जितनी जगह रहे
  7. रोग की प्रारंभिक अवस्था में आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग किया जा सकता है (प्रोलेप्स-इन, कैटिल रिमेडीज अथवा प्रोलेप्स-क्योर) । इसके अतिरिक्त, होम्योपैथिक दवार्इ (सीपिया 200X की 10 बूँदें रोजाना) पिलाने से भी लाभ मिल सकता है।
  8. गंभीर स्थिति होने पर पशुचिकित्सक से सम्पर्क करें। पशुचिकित्सक इस स्थिति में दर्दनाशक व संवेदनाहरण के लिए टीका लगाते हैं। जिससे पशु जोर लगाना बंद कर देता है। अब शरीर के बाहर निकले हुए भाग को साफ कर तथा अंदर करके टाँके लगा देते हैं। इसके बाद भैंस को कैल्शियम की बोतल, आधी रक्त में तथा आधी त्वचा के नीचे लगा देते हैं। कभी-कभी प्रोजेस्ट्रोन का टीका भी भैंस को लगा दिया जाता है। परन्तु इसमें यह सावधानी रखी जाती है कि बच्चा देने में अभी 10 दिन से ज्यादा बचे।

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प्रस्तुति

Dr.Savin Bhongra
Whatsapp:- 7404218942

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