agriculture

फसलों के अच्छे बीजों के गुण एवं विशेषताएं

अच्छे बीजों के गुण
Written by bheru lal gaderi

अच्छा बीज वह होता हैं जिसकी अंकुरण क्षमता अधिक हो, तथा बीमारी, किट, खरपतवार के बीज व अन्य फसलों के बीजों से मुख्त हो। किसान अच्छे बीजों की बुवाई करके पैदावार व अपनी आमदनी बढ़ा सकते हैं। जबकि खराब गुणों वाले बीजों को बोने से खेती के अन्य कार्य जैसे खाद, पानी, खेत की तैयारी आदि किसान का खर्च व मेहनत बेकार हो जाते हैं। फसलों के अच्छे बीजों के गुण एवं विशेषताओं के आधार पर ये निम्न प्रकार के होते हैं:-

अच्छे बीजों के गुण

बीज की भौतिक शुद्धता

बीजों की भौतिक शुद्धता से तात्पर्य शुष्क फसलों के बीजों में अन्य फसलों के बीज तथा खरपतवारों के बीज नहीं मिले हुए होने चाहिए। कंकड़, पत्थर, धूल व मिट्टी भी नहीं होनी चाहिए। शुष्क फसलों के बीजों के साथ यदि अन्य फसलों के बीज होते हैं तो ये शुष्क फसलों के साथ प्रतियोगिता करते हैं एवं साथ-साथ में बीजों के गुण को भी कम कर देते हैं।

Read also – किसानों को मिले गुणवत्ता युक्त सस्ता बीज

बीज की आनुवंशिक शुद्धता

अच्छे बीजों के गुण

किसी फसल की जिस किस्म को हम बो रहे हैं वह प्रमाणित होनी चाहिए तथा इसमें दूसरी किस्म या जाती के बीज नहीं मिले हुए होने चाहिए। अर्थात बीज उसी किस्म या जाती विशेष का होना चाहिए। यदि एक फसल की दो जातियों के बीज मिले हुए हो तो उनको पहचान कर अलग-अलग करना असंभव हैं और अगर इसको खेत में बो दिया जाता हैं तो इनके बुवाई का समय, फसल पकने का समय, खाद, पानी व किट आदि अलग-अलग होते हैं इस प्रकार की मिश्रित जाती के बीजों को बोने से पैदावार व बीजों के गुण में कमी आ जाती हैं।

बीजों के गुण, आकार, आकृति एवं रंग

यदि किसान किसी फसल की जाती या किस्म के बीजों को खेत में बोना चाहता हैं तो उन बीजों के गुण आकार, आकृति एवं रंग समान होना चाहिए।

अच्छे बीजों के गुण

Read also – कैसे करें नत्रजन स्थिरीकरण के लिए जीवाणु खाद-कल्चर का उपयोग

बीजों में नमी की मात्रा

बीजों में नमी की मात्रा का बीजों की अंकुरण क्षमता से सीधा सबंन्ध होता हैं अर्थात अगर बीज में नमी की मात्रा (सूखे हुए) कम हो तो बीज के अंदर उपस्थित भ्रूण की मृत्यु हो जाती हैं जिसमे बीज की अंकुरण क्षमता नष्ट हो जाती हैं इसी प्रकार बीज में अधिक नमी होने पर बीजों पर अनेक कवक रोगों के लगने से अंकुरण क्षमता नष्ट हो जाती हैं अतः बीजों में ज्यादा नमी भी नहीं होनी चाहिए एवं न ही ज्यादा सूखे हुए होने चाहिए अर्थात बीजों को भण्डारण में रखते समय इसमें 10-15% तक नमी रहनी चाहिए।

बीज की परिपक्वता

फसल जब पूर्ण रूप से परिपक्व हो जाये तभी इसकी कटाई करनी चाहिए। अपरिपक्व अवस्था अर्थात दूधिया या मुलायम अवस्था में काटी गई फसल से प्राप्त होने वाले बीज परिपक्व नहीं होते हैं और इन बीजों को बोने से अपरिपक्व अवस्था में काटी गई फसल के बीजों की पैदावार कम होती हैं इसका मुख्य कारण यह हैं कि:-

  • अधिक बीज अपरिपक्व होने के कारण अंकुरित नहीं होते हैं।
  • अपरिपक्व बीजों के अंकुरित पौधो की बढ़वार भी कम होती हैं।

Read also – लेजर लेंड लेवलर द्वारा भूमि का समतलीकरण करायें

बीजों की अंकुरण क्षमता

अच्छे बीजों के गुण

बीजों की अंकुरण क्षमता से तात्पर्य यह हैं की किसान जो बीज बो रहा हैं उसकी अंकुरण क्षमता क्या हैं। यदि किसान बीज की अंकुरण क्षमता ज्ञात किये बिना ही बो रहा हैं तो यह निश्चित नहीं हैं की बीजों का अंकुरण खेत में केसा होगा। बीजों की अंकुरण क्षमता ज्ञात करने के लिए बीजों को रेत या फ़िल्टर पेपर की सहायता से उचित तापक्रम व नमी प्रदान करने के लिए बीजों की अंकुरण क्षमता ज्ञात करने के लिए बीजों का अंकुरण ज्ञात किया जा सकता हैं। अर्थात जब बीजों का अंकुरण पूर्ण हो जाता हैं तो अंकुरित बीजों को गिन लिया जाता हैं एवं निम्न सूत्र द्वारा

अंकुरण ज्ञात करने का सूत्र

अंकुरण प्रतिशत=

 

अंकुरित बीजों की संख्या X 100
कुल लिए गए बीजों की संख्या

अंकुरण प्रतिशत ज्ञात कर लेते हैं।

बीजों की जीवन क्षमता

बीजों के कट जाने, रोग के प्रभाव से, उचित भण्डारण करने से या अन्य कारण से बीज में उपस्थित भ्रूण क्षतिग्रस्त हो जाता है एवं बीज की जीवन क्षमता नष्ट हो जाती है। बीजों की जीवन क्षमता निम्न प्रकार से ज्ञात  की जा सकती है।

Read also – मृदा जांच में मृदा उर्वरता का महत्व

टेट्राज़ोलियम कलोराइड परिक्षण

बीजों की जीवन क्षमता ज्ञात करने के लिए बीजों के भ्रूण को 0.5-1% वाले टेट्राज़ोलियम कलोराइड या ब्रोमाइड के घोल में कुछ घंटो तक उपचारित किया जाता है, जीवित बीज लाल रंग में बदल जाते है एवं मृत बीज जैसे थे वैसे ही रहते है। रंगीन बीजो की गिनती कर अंकुरण का प्रतिशत ज्ञात किया जा सकता है।

किसान भाई अगर इस तरह उन्नत किस्म एवं अच्छे बीजों के गुण का परिक्षण और चयन कर उपयोग में लेंगे तो निश्चित ही उन्हें इसका फयदा जरूर मिलेगा।

Read also – बीजोपचार आधुनिक खेती में उपयोग एवं महत्व

Facebook Comments

About the author

bheru lal gaderi

Hello! My name is Bheru Lal Gaderi, a full time internet marketer and blogger from Chittorgarh, Rajasthan, India. Shouttermouth is my Blog here I write about Tips and Tricks,Making Money Online – SEO – Blogging and much more. Do check it out! Thanks.