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बिशु – आयुर्वेदिक तरल खाद

बिशु
Written by bheru lal gaderi

बिशु क्या है?

आयुर्वेदिक कृषि इनपुट बिशु एक संयन्त्र है, जो आयुर्वेदिक तरल खाद को जीवंत करता है, ध्यान केंद्रित सभी प्रकार के पौधों, पेड़ों और फसलों के स्वस्थ विकास को सुनिश्चित करता है। यह प्रकृति में गैर विषैले और गैर विषैले है। हालांकि यह मिट्टी की प्रजनन क्षमता को पुनर्स्थापित करता है, यह न तो उर्वरक है और न ही हार्मोन है।

बिशु

जड़ी बूटियों के मिश्रण के अनुपूरन जो टीआरटी को बहुत कम मात्रा में प्रति एकड़ और फसल की आवश्यकता होती है, वही उपज को रासायनिक उर्वरकों की तुलना में बनाए रखा जा सकता है। अमृता, करूर, एला, नागकेसर, वसाका और पुदीना के पौधों के अर्क शामिल हैं। ये घटक पौधों के लिए एक स्वास्थ्य संरक्षक के रूप में मिलकर काम करते हैं जैसे की चव्हाणप्रश मानव शरीर पर काम करते हैं।

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प्रमुख विशेषताएं:-

  • बिशु एक आयुर्वेदिक micro manuals है।
  • बिशु मे कई तरह की जड़ी-बूटी के तेल, अर्क, जुस व पाउडर आदि के उपयोग से बना हुआ एक साधारण व खास तरह का कुदरती विधी से तैयार प्राडक्टस् है।
  • यह मिट्टी मे पाए जाने वाले सुक्ष्म बैक्टीरिया जो की अचेत अवस्था मे है उन को चेतन अवस्था मे लाता है, और उन को निरोग बनाता है साथ ही मे उनका विकास करने मे सहायक है। हवा व मिट्टी मे ऑक्सीजन प्रमाण बढ़ाने का कार्य बहुत ही अच्छी तरह करता है ।
  • बिशु पौधे व मिट्टी का सम्पूर्ण भोजन है जिस से पत्तियो का आकार व मोटाई बढती है जिससे पौधा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया को अधिक ग्रहण करता है। जिससे पौधा सुरक्षित व निरोग रहता है ।
  • यह पौधो मे प्राणवायु, प्रकाश व पानी को आत्मसाह करने मे बहुत अधिक सहायक है और जिसके कारण पौधे मे फुटाव अधिक आता है व पौधे मे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढती है ।
    जिन किटो मे प्रकाश को ग्रहण करने की क्षमता कम होती है (हानिकारक कीट) उनको बाझं बनाने के साथ उन की वृद्धि दर कम करता है। हवा, पानी व मिट्टी को प्रदुषण व रोग मुक्त करता है।
  • यह रसायनिक व ओर्गेनिक खेती के लिए उपयुक्त है। यह सभी फसलो के लिए हर समय व हर मौसम के लिए अनुकूल है। मौसम के कारण फुल व फल पर आने वाली समस्या का सम्पूर्ण हल है।
  • बिशु का उपयोग फसल मे करने से आप को कोई भी रसायनिक खाद नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटेशियम, कैल्सियम, मैग्नीशियम, सल्फर, आयरन, जिंक, मैग्नीज, बोरान, मोलिब्डेनम, कॉपर व क्लोरिन किसी भी तरह का कोई रसायनिक केमिकल व रसायनिक फफूंदनाशक डालने की कोई आवश्यकता नही होगी।
  • फसल की पैदावार पर किसी भी तरह का कोई प्रभाव नही होगा। हर तरह की फसल मे आप बिशु का उपयोग कर सकते है। हर तरह से आप को परिणाम बेहतर और बेहतर ही मिलेगा ।
  • बिशु की लागत रसायनिक खेती से कम आती है।
  • यदि आप बिशु का उपयोग केवल तीन साल तक करते है। उसके बाद आप को खेत मे किसी भी तरह का कोई भी रसायन व अन्य कोई भी प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने की आवश्यकता नही होगी। आप की फसल अगले कई सालो तक बिना किसी लागत के होगी।
  • बिशु का उपयोग कि हुई फल, सब्जी, दाले व अनाज आदि का उपयोग करने वाले व्यक्ति, के 1100 तरह की बिमारी से शरीर बचा रहता है।
    बिशु का उपयोग सभी फसल जैसे -: बगवानी, सब्जी, दाले, अनाज, फुल आदि फसलो पर किया जाता है। यह फसल का घनत्व बढाता है। फसल को जल्दी पकाने मे सहायक है और फसल की आयु को बढाता है।

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नोट :- गोमूत्र का उपयोग अवश्य करे।

स्त्रोत :-

facebook वाल से :- कम लागत मे खेती

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