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25 साल से बंजर थे खेत, पसीने की बूंदों से बनाया उपजाऊ

उपजाऊ
Written by bheru lal gaderi

तीन दशक पहले हनुमानगढ़ जिले में जाखडावाली में फैले सेम के दलदल ने किसानों की खेती छीन ली। सेम का मुकाबला करने के बाद पानी की निकासी कर कुछ किसान जमीन उपजाऊ बना चुके हैं।  अब वे अच्छी उपज लेने के साथ मुनाफा भी कमा रहे हैं।

सेम प्रभावित क्षेत्र में किसान का सफल प्रयास

बढ़ी उर्वरता, अब ले रहें अच्छी उपज

किसान वेद प्रकाश गोदारा के जेडडब्ल्युडी के खेत में वर्ष 1984 में सेम ने दस्तक दी। भूमि अत्यधिक लवणीय होने से भूमि बंजर हो गई। हजारों बीघा खेत खली रहें। भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए गोदारा ने वर्ष 2009 में भूमि सुधार के प्रयास शुरू किए।

अनावश्यक वनस्पतियों को हटाकर खेत में नहरी पानी लगाना शुरु कर दिया। करीब 1 वर्ष बाद शोरे के दलदल में सुधार देखकर किसान का हौसला बढ़ा। कड़ी मेहनत की बदौलत आज गोदारा अपने खेत में गेहूं की अच्छी फसल में ले रहे हैं। वे पिछले 6 साल से कपास- नरमा, सरसों, गेहूं की फसल उगाकर सालाना करीब डेढ़ लाख रुपए कमा रहे हैं। उन्होंने पशुओं के लिए हरा चारा लगा रखा है, जिससे पशुपालन में भी मदद मिल रही है।

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स्त्रोत:-

एग्रोटेक राजस्थान पत्रिका

हनुमानगढ़ से पुरुषोत्तम झा की रिपोर्ट

 

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