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फड़के का खरीफ फसलों में प्रकोप एवं बचाव के उपाय

फड़के
Written by bheru lal gaderi

मानसून के साथ ही मक्का ज्वार और चारे का दुश्मन रामजी का घोड़ा यानी फड़के का फटका शुरू हो गया है। इस सर्वभक्षी कीट के फड़के से खरीफ की फसलों को बचाने के लिए किसानों को आवश्यक उपाय करने चाहिए।

फड़के

Image Credit – Patrika

फड़का पहले भी कई बार फसलों में तबाही मचा चुका है। इसका प्रकोप अक्टूबर तक रहता है। इसकी इस कीट के शिशु निंफ तथा प्रौढ़ फसलों की पत्तियों, फूलों, भुट्टे तथा दाने खाकर पूरी फसल को नष्ट कर देते हैं। ऐसी स्थिति में खेत पर केवल पौधों के तने ही खड़े रह जाते हैं। फड़के की ओर से छोड़े गए मल पदार्थ के सड़ने से पौधों पर फफूंद लग जाती हैं और उनका रंग काला पड़ जाता है। इस तरह का संक्रमित चारा खाने से पशुओं को दस्त भी लग जाते हैं।

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ऐसे करें फड़के से बचाव:-

फड़के से बचाव के लिए खेतों की जुताई मिट्टी पलटने वाले हल से की जाए तो अंड पिंड बाहर आकर तेज धूप में नष्ट हो सकते हैं। इसके अलावा खेतों की पालिया (मेड़) छोटी रखने, पालियों की 15 सेंटीमीटर तक खुदाई कर पुनः निर्माण करने, मिथाइल पैराथियान दो प्रतिशत चूर्ण या मेलाथियान पांच प्रतिशत चूर्ण या क्यूनालफास डेढ़ प्रतिशत चूर्ण या इंडोसल्फान चार प्रतिशत चूर्ण का छिड़काव करने से।

मक्का के खेत के चारों तरफ दो, तीन उमरे ज्वार के निकालने, खेतों के किनारे अलाव या पुराने टायर जलाकर फड़के से निजात पाई जा सकती हैं।

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कैसे बढ़ता है फड़का कीट:-

विज्ञान की भाषा में ग्रॉस हॉपर के नाम से मशहूर फड़के के जीवन चक्र में तीन अवस्थाएं होती हैं। एक फड़का अपने जीवनकाल में बयालीस ग्राम फसल का भाग चट कर जाता है। प्रौढ़ावस्था में पहुंचने के दस, ग्यारह दिन बाद फड़का व्यस्क हो जाता है और तब नर और मादा फड़के में संगमन क्रिया शुरू हो जाती है।

अक्टूबर में तापमान में गिरावट के कारण फड़के शिथिल हो कर नष्ट हो जाते हैं। इस तरह एक वर्ष में फड़के की एक ही पीढ़ी होती हैं। किसी भी क्षेत्र में यदि फड़के का प्रकोप अधिक रहता है और अगले वर्ष बारिश कम होती है तो अनुकूल मौसम नहीं मिलने के कारण उस वर्ष अण्डे से अधिक फड़के नहीं निकलते है। फड़के के अंडे 3 वर्ष तक सुसुप्तावस्था में रह सकते हैं।

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