agriculture कृषि यंत्र

फसलों की कटाई एवं गहाई हेतु कृषि यंत्र

फसलों की कटाई एवं गहाई हेतु कृषि यंत्र
Written by bheru lal gaderi

नव श्रम की बचत, कम लागत एवं समय पर विभिन्न कृषि कार्य करने के लिए कृषि यंत्रों का उपयोग प्रारंभ हुआ तथा समयानुसार तथा आवश्यकतानुसार इन में वांछित परिवर्तन किए जाते रहे हैं। हस्तचालित यंत्रों के बाद, बैल चालित यंत्रों का विकास हुआ। तदोपरांत शक्ति चालित यंत्रों का विकास हुआ। आज की खेती शक्ति चालित यंत्रों से ही हो रही है। फसल पकने के बाद समय पर कटाई एवं गहाई अत्यंत आवश्यक है। फसल अच्छी होने के बावजूद भी फसलों की कटाई एवं गहाई उचित समय पर नहीं करने पर उत्पादन भरपूर नहीं मिल पाता है।

फसलों की कटाई एवं गहाई हेतु कृषि यंत्र

गेहूं की फसल की कटाई का उपयुक्त समय

गेहूं की फसल की कटाई लगभग 80% बालियां पीली पड़ने पर सरसों की फसल की कटाई 75% फलियां पीली पड़ जाने पर करना उचित रहता है। फसल पकने पर दाना अंगुलियों से दबाने पर कठोर महसूस होता है। अनाज के लिए फसलों की कटाई एवं गहाई के समय बीज में नमी की मात्रा 20 से 25% एवं तिलहन में 30 से 35% रहता है। कच्ची अवस्था में फसल काटने पर बीज का आकार छोटा, अंकुरण क्षमता कम एवं पैदावार कम होती है। फसल ज्यादा पकने पर बालियों में से दाना बिखरने व फलियां चटकना इत्यादि नुकसान से 2 से 4 क्विंटल प्रति हेक्टर पैदावार में कमी हो जाती है।

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फसल कटाई के लिए यंत्र 

गेहूं, सरसों, धनिया, चना, मेथी इत्यादि फसलों की कटाई के लिए अधिकतर सीधी धार वाली दांतेदार दराती का उपयोग करते हैं जिसमें अधिक मानव श्रम की आवश्यकता होती है। एक हेक्टेयर की फसल काटने में 18 से 20 मजदूरों की आवश्यकता होती है। फसलों को समय पर काटने के लिए गेहूं व अन्य फसलों की कटाई के लिए जिस यंत्र को काम में लिया जाता है उस यंत्र का नाम वर्टिकल कन्वेयर रीपर है। इस यंत्र को काम में लेने से फसल की कटाई कम समय में की जा सकती है। कटाई के साथ, इस प्रकार के रिपर फसल का एक तरफ ढेर भी कर देते हैं। इस कटी हुई फसल के पुले बांधने का कार्य कम समय में किया जा सकता है।

इसके अतिरिक्त रीपर कम बाइंडर विकसित किए गए हैं जिसमें फसल कटाई के साथ पुले भी बांधे जाते हैं। 5 HP इंजन 1800 आरपीएम जिसका वजन लगभग 215 से 250 किलो होता है। 1 घंटे में 0.20 हेक्टेयर (सवा बीघे) की कटाई की जा सकती है। इसका तात्पर्य यह है कि दिन भर में 8 घंटे चलाने पर 1.6 हक्टेयर (10 बीघे) फसल की कटाई की जा सकती है।

रीपर की कार्यप्रणाली

रीपर के अग्रभाग में चार या पांच विभाजक लगे होते हैं जो की फसल को कतारों में विभाजित करने एवं उठाने के लिए होते हैं। फसल के विभाजित होने के बाद जमीन से लगभग 8 से 12 सेमी की ऊंचाई पर कट्टर बार (कर्तन फलक) द्वारा फसल की कटाई की जा सकती है। कर्तन फलक अपने कवच (गार्ड) में आगे पौधे चलते हैं तथा फसल को काटते हैं। खेत जितना समतल होगा उतनी ही कटाई की ऊंचाई को कम किया जा सकता है।

कट्टर बार पर 7.5 सेमी की दूरी पर दांतेदार या सीधी धार वाला कर्तन (चाकू) लगे होते हैं। जिन फसलों के डंठल मुलायम होते हैं उनके लिए सीधी धारवाला एवं कठोर डंठल वाली फसलों सोयाबीन व सरसों के लिए दांतेदार कर्तन को काम में लिया जाता है। यह कर्तन 700 से 800 बार प्रति मिनट की चाल से दाएं ओर चलते हैं एवं फसल को काटते हैं। कटी हुई फसल को स्टार वहील (रील) कन्वेयर बेल्ट जिस पर लोहे के दांते लगे होते हैं उन्हें बीच में फसल को धकेलते हैं। कन्वेयर बेल्ट फसल को उधर्व स्थिति में रखते हुए खेत में एक ही दिशा में पंक्तियों में गिरा देती हैं।

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पंक्तियों में गिरी फसल की बालियां एक ही तरफ रहती है जिसे पुले बांधकर थ्रेसर में डालना आसान हो जाता है। रीपर के सरल नियंत्रण होने से कोई भी व्यक्ति आसानी से चला सकता है उसका रखरखाव करना सीख सकता है।

रीपर के लिए ट्रेक्टर 

छोटे ट्रैक्टर (पावर टिलर) 5HP व 10HP डीजल इंजन द्वारा चलित रीपर उपलब्ध है परंतु ट्रैक्टर के आगे व पीछे लगने वाले रीपर भी आने लगे हैं। डीजल इंजन द्वारा चलित रीपर के बाहर की लंबाई 1.0 से 1.2 मीटर होती है। ट्रैक्टर चलित रीपर की लंबाई 2.0 से 2.5 मीटर होती है। इस प्रकार के गेहूं, धान अन्य फसलों के अतिरिक्त कठोर डंठल वाली फसलें सोयाबीन व सरसों की कटाई भी की जा सकती है।

रीपर को प्रयोग में लेते समय आवश्यक बातें

रीपर में रजिस्ट्रेशन समान रूप से फसल कटाई व क्लॉगिंग (डंठल फसने) से रोकने के लिए आवश्यक है। रजिस्ट्रेशन का तात्पर्य है कि पीटमेन कटरवार को इस प्रकार आगे पीछे चलाएं कि प्रत्येक स्ट्रोक के बाद कटर बार के प्रथम चाकू गार्ड के बीच में रुकने चाहिए। इसके अतिरिक समय-समय पर बियरिंग में ग्रीस, गियर बॉक्स में ऑयल और बेल्ट को घिसने पर बदल देना चाहिए।

इंजन के द्वारा कटर बार, कनवेयर, बेल्ट रील एवं पहियों को गति दी जाती है। आवश्यकतानुसार शक्ति हस्तांतरित करने हेतु गियरबॉक्स। पुली व बेल्ट काम में लेते हैं। रीपर के सभी भाग लोहे की एक मजबूत ढांचे पर कंसे हुए होते हैं। हैंडल के द्वारा चालक रीपर को नियंत्रित करता है। रीपर में लोहे के या रबर टायर वाले दोनों पहियों का उपयोग किया जा सकता है।

  • कटरबार पर लगे हुए टूटे (कृतकों) को नियमित रूप से देखना चाहिए। यदि यह ढीले हो गए हो तो कसना चाहिए। यदि टूट गए हो गए हो तो शीघ्र बदलना चाहिए।
  • टूटे हुए गार्ड को भी बदल देना चाहिए अन्यथा कटर टूटने की संभावना अधिक हो जाती है।
  • उपयोग में लेने के बाद धूप से बचाने के लिए शेड या छाया में कटर बार को ऊपर करके रखना चाहिए।

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भूसा बनाने वाली रीपर

बड़े किसानों के लिए व मौसम खराब होने की स्थिति में कंबाइन हार्वेस्टर द्वारा फसल की कटाई आवश्यक होती है। कम्बाइन द्वारा कटाई- गहाई व ओसाई के कार्य संपादित हो जाते हैं परंतु पशुओं के लिए भूसा प्राप्त नहीं होता है तथा डंठलों की वजह से गर्मी की जुताई भी अच्छी तरह नहीं होती है। इस समस्या का समाधान ट्रैक्टर द्वारा चलित स्ट्रा रीपर द्वारा किया जा सकता है। कम्बाइन से फसल कटाई के बाद खेत में फसलों को काटकर यह यंत्र भूसा बना देता है। 1 घंटे में लगभग 0.4 क्षेत्रफल के डंठल का भूसा बनाने का कार्य कर सकता है।

फसल गहाई के यंत्र

प्रारंभ में फसलों की गहाई का कार्य बेलों व उसके बाद ट्रैक्टर द्वारा किया जाता था। उसके लिए सारी फसल को कटाई के उपरांत एक स्थान पर एकत्रित करना पड़ता था। उसके बाद फसल के सूखने के बाद ही गांवठा किया जाता था। बेलों व ट्रैक्टर द्वारा गहाई करने में समय भी अधिक लगता था। गहाई के बाद, भूसे व दानें को अलग करने के लिए विनोवर (ओसाई यंत्र) की आवश्यकता होती है कुछ समय पूर्व तक भी सोयाबीन, धनिया, अलसी, मेथी इत्यादि फसलों की गहाई ट्रैक्टर द्वारा की जाती थी परंतु मल्टीक्रॉप थ्रेशर के आविष्कार ने एक ही थ्रेसर द्वारा कई फसलों की गहाई का कार्य आसान कर दिया है तथा श्रमिकों की आवश्यकता को कम कर दिया है।

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मल्टीक्रॉप थ्रेसर

पूर्व में जो थ्रेसर बनाए गए थे उसे केवल एक या दो फसल की गहाई ही की जा सकती थी जो मुख्यतया 5 hp डीजल इंजन द्वारा चलाए जाते थे एवं उनकी दक्षता 2 से 3 क्विंटल प्रति घंटे से ज्यादा नहीं होती थी। इसके अतिरिक्त पट्टा होने की वजह से दुर्घटना की संभावना अधिक रहती थी, परंतु मल्टीक्रॉप थ्रेशर द्वारा सिलेंडर को एडजस्ट करके द्वारा ही सोयाबीन, गेहूं, चना, सरसों, मेथी, अलसी, धनिया इत्यादि फसलों की गहाई, ओसाई व छानने का कार्य एक साथ संपादित किए जा सकते हैं तथा दक्षता 10 से 12 क्विंटल प्रति घंटा होती है।

थ्रेसर से होने वाली दुर्घटनाओं को कम कैसे करें

असावधानियों की वजह से कई दुर्घटनाएं होती हैं। थ्रेसर पर कार्य करने वाले श्रमिक निम्न सावधानियां रखें

  1. श्रमिकों को ढीले कपड़े नहीं पहनना चाहिए।
  2. पैरों में चप्पल नहीं पहननी चाहिए।
  3. गले में दुपट्टा व अन्य कपड़ा नहीं डालना चाहिए।
  4. थ्रेसर पर काम करते समय बीड़ी, सिगरेट, हुक्का व अन्य मादक द्रव्यों का सेवन नहीं करना चाहिए।
  5. महिला श्रमिकों को अपनी साड़ी सवेरकर और बालों को बांधकर कार्य करना चाहिए।
  6. नींद या थकान की स्थिति में थ्रेसर पर कार्य नहीं करना चाहिए।
  7. रात्रि में प्रकाश की उचित रोशनी होने पर ही थ्रेसर चलाना चाहिए। गाड़कर जमीन को रस्सी से बांध दे।
  8. फसल डालते समय हाथ ड्रम के निकट नहीं रखना चाहिए।
  9. बच्चों व बूढ़ों को थ्रेसर पर कार्य नहीं करना चाहिए।

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थ्रेसर लगाने के लिए उचित स्थान का चयन

  1. थ्रेसर ऐसे स्थान पर लगाना चाहिए जिससे आडी व खड़ी दिशाओं में समतल रहे।
  2. आग से बचने के लिए फसल का ढेर बिजली की तारों व लाइन व रेलवे लाइन के पास न लगाए।
  3. थ्रेसर को पहले स्थिर कर ले। आवश्यक हो तो खुटे गाड़कर जमीन को रस्सी से बांध दें।
  4. पुला डालने का स्थान ऊँचा होना चाहिए।

थ्रेसर को चलने से पूर्व जाँच

  1. थ्रेसर की सफाई करें और सभी नट, बोल्टों व थ्रेसर के सिलेंडर पर लगे नट, व गण्डा को चेक कर ले,टूटे व घिसे हुए पुर्जों को बदल दे।
  2. बियरिंग या घूमने वाले पुर्जों पर उपयुक्त ग्रीस व स्नेहक लगाएं।
  3. थ्रेसर व शक्ति स्त्रोत को समतल स्थान पर स्थिर करके दोनों के बीच का एलाइनमेंट सीधा रखें।
  4. विद्युत मोटर, शक्ति स्त्रोत हो तो देखें कि कोई तार खुला हुआ तो नहीं है तथा जोड़ों पर विद्युत रोधी टेप लगा देना चाहिए।
  5. मुख्य स्विच व स्टार्टर जमीन से ऊपर रखें तथा यह बिजली के उपकरण थ्रेसर चालक की पहुंच के अंदर होने चाहिए।
  6. ट्रैक्टर का इंजन के धुआं निकलने वाले पाइप पर चिंगारी अवरोध लगाए।
  7. गहाई क्षेत्र के भूसा निकलने वाला भाग हवा की दिशा में रखें।
  8. फसल कटाई करने से पूर्व यह देख ले की फसल में कंकड़, पत्थर ना हो व फसल सूखी हुई हो।
  9. मरम्मत या रखरखाव संबंधी कार्य करने से पहले थ्रेसर को बंद कर दे।

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थ्रेसर से गहाई के समय आने वाली कठिनाइयां एवं निदान

अनाज बिना थ्रेसिंग किए निकालना

सिलेंडर की गति कम होने, बहुत कम फसल डालने, व कौनकेव सिलेंडर के बीच जगह अधिक होने से अनाज बिना थ्रेसिंग के निकल जाता है इसके लिए सिलेंडर की गति बढ़ाएं, फसल उचित मात्रा में थ्रेसर में डालें, कोनसेव व सिलेंडर के बीच दूरी कम करें।

दाना टूटना

थ्रेसर में दाना फसल कम ज्यादा देने, कोनसेव सिलेंडर के मध्य दूरी कम होने सिलेंडर की गति तेज होने से दाना टूटता है, अतः सिलेंडर की गति निर्देशानुसार रखकर व सिलेंडर के बीच की दूरी बढ़ाएं।

काबुली चने की थ्रेसिंग करते समय छलना व बसे के साथ दाने जाना

काबुली चने के दाने का आकार अन्य दानों की अपेक्षा बड़ा होता है जिसकी वजह से दाना छलने में से पूरी तरह नहीं निकल पाता है। इसके लिए सबसे ऊपर का छलना बदलकर बड़े छिद्रों वाला छलना लगाना चाहिए इसके अतिरिक्त छ्लनो का ढलान व गति भी बढ़ाना चाहिए।

भूसे के साथ दाना जाना

ब्लोवर की गति अधिक होने पर छलना साफ नहीं होने की वजह से भूसे के साथ दाना चला जाता है। अतः ब्लोवर पंखे की गति कमकर के व छलनियों के छिद्रों को ब्रश से साफ करना चाहिए।

दाने में भूसा जाना

ब्लोवर (पंखे) की गति कम करें व छलनियों काढलं कम करे।

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प्रस्तुति

डॉ.के.एम. गौतम,

कृषि अनुसंधान केंद्र,

उम्मेदगंज, कोटा (राज.)

सभार 

विश्व कृषि संचार 

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