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फल गिरने की समस्या के प्रमुख कारण व समाधान

फल गिरने की समस्या
Written by bheru lal gaderi

फूलो, फलो का गिरना एक प्राकृतिक नियम है, जो आरंभ में खाद्य पदार्थों के लिए आपसी प्रतिस्पर्धा के कारण होता है। फल गिरने से पहले फल और डंठल के जोड़ पर एक विशेष प्रकार की कोशिकाओं की परत बन जाती हैं।

फल गिरने की समस्या

जिसके अंदर खाद्य पदार्थ पहुंचाने वाले संहवन उत्तक नहीं होते हैं। यह स्थान बहुत कमजोर हो जाता है, जिसे फल विगलन (Fruit thawing) पर्त कहते हैं, तथा फल इसी स्थान से टूट कर गिर जाते हैं।

जब फल परिपक्व अवस्था में पहुंचते हैं, तो ऐसी पर्त सभी फलों में बनती हैं, लेकिन परिपक्व अवस्था से पहले इस पर्त का बनना हानिकारक है, क्योंकि इससे परिपक्व होने से पहले ही आवश्यकता से अधिक फल गिर जाते हैं, तथा फलोत्पादकता के सामने आर्थिक समस्या उत्पन्न हो जाती है।

फल गिरने की समस्या प्रमुख रूप से नींबू वर्गीय फलों (संतरा, माल्टा, ग्रेपफ्रूट) आम, सेब, बेर, नाशपाती व आंवला में अधिक गंभीर हैं।

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फल गिरने की समस्या के प्रमुख कारण व उनके समाधान निम्नलिखित हैं:-

क्यों गिरते हैं फल:-

फल गिरने के कई कारण हैं, जिनमे प्रमुख कारन पौधों में हार्मोन की कमी, नाइट्रोजन की कमी, नमी की कमी, प्रतिकूल मौसम, तेज व गर्म हवा तथा पाला व कीड़े व बीमारी प्रमुख हैं।

फलों का गिरना कैसे रोके:-

ऊपर बताई गई कमियों को दूर करने के उपाय निम्नलिखित है :-

हार्मोन की कमी:-

बाजार में ऐसे बहुत से हार्मोन उपलब्ध हैं, जो फल विगलन की परत को बनने से रोकते हैं। इनमें नेफथेलिन एसिटिक एसिड (एन.ए.ए.), 2,4 डाइक्लोरोफिनॉक्सी एसिटिक एसिड (2,4 डी) प्रमुख है।

इन रसायनों की उचित मात्रा वाले घोल का छिड़काव सही समय पर करने से फलों का गिरना कम हो जाता है और फलों के गुणों में भी वृद्धि होती हैं।

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कुछ प्रमुख फलों में इनका उपयोग लाभदायक है, जो निम्नलिखित है:-

नींबू वर्गीय फल:-

नींबू वर्गीय फल वृक्षों पर 2,4 डी, 10 पी.पी.एम. (10 मि.ग्रा 2,4 डी प्रति लीटर पानी) के घोल के दो छिड़काव मई और सितंबर में करके, फलों को गिरने से बचाया जा सकता है।

आम:-

आम के फलों को गिरने से बचाने के लिए 10-15 पी.पी.एम. -2,4 डी या एन.ए.ए.  10-15 ग्राम रसायन प्रति लीटर पानी के घोल का छिड़काव अप्रैल के महीने में लाभदायक रहता है।

सेव:-

मई के महीने में 10 पी.पी.एम., एन.ए.ए. (10 ग्राम रसायन प्रति लीटर पानी) के घोल का छिड़काव करके फलों गिरने से बचाया जा सकता है।

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अंगूर:-

“ब्यूटी सीडलैस” किस्म में गुच्छे के दाने गिरने की समस्या अधिक रहती हैं। इस समस्या के समाधान के लिए फल पकने से लगभग 15 दिन पहले 100 पी.पी.एम. प्लानोफिक्स के घोल का छिड़काव उपयोगी है।

लीची:-

लीची के फल बनाने के तुरंत बाद जिब्रेलिक एसिड (जी.ए.) या एन.ए.ए. या 2,4 डी में से किसी एक हार्मोन के 100 पी.पी.एम. (100 मि.ग्रा रसायन प्रति लीटर पानी) के घोल का छिड़काव करके फलों को गिरने से बचाया जा सकता है।

नाइट्रोजन की कमी:-

फल बनने के बाद फलों की वृद्धि बहुत तेजी से होती हैं, और मुख्य रूप से इसी समय नाइट्रोजन की कमी होती है। इसीलिए फल वृक्षों में नाइट्रोजन धारी उर्वरक की आधी मात्रा फूल निकलने के पहले तथा आधी मात्रा फल बनने के बाद देकर इस कमी को पूरा किया जा सकता है।

पर्णीय छिड़काव:-

कुछ फल वृक्षों में नाइट्रोजन की अधिक कमी होती हैं, इसलिए इसे पर्णीय छिड़काव के रूप में भी दिया जा सकता है। पर्णीय छिड़काव का तात्पर्य पोषक तत्व के घोल का छिड़काव करना है। इस विधि द्वारा दिए गए पोषक तत्वों का पत्तियों द्वारा शीघ्र अवशोषण होता है।

कुछ प्रमुख फसलों में पर्णीय का उपयोग हुए हैं जो निम्नलिखित हैं:-

नींबू वर्गीय फल:-

मार्च के महीने में 1% यूरिया के घोल का छिड़काव उपयोगी होता है।

आम:-

इसी प्रकार आम के पौधों पर अप्रैल के महीने में 1 से 2% यूरिया के घोल का छिड़काव करके फलों को गिरने से बचाया जा सकता है।

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प्रतिकूल मौसम:-

तेज गर्म और ठंडी हवाएं भी फल के गिरने में सहायक होती हैं। तेज हवा होने पर फल हिलते हैं तथा एक दूसरे से रगड़ के कारण गिर जाते हैं। तेज हवा की समस्या से बचने के लिए बाग के चारों तरफ मुख्य रूप से पश्चिम दिशा में वायु रोधी वृक्ष लगाना उपयोगी रहता है।

गर्म हवा के कारण वायुमंडल का तापमान बढ़ जाता है। तापमान के अधिक होने पर पत्तियों व फलों से नमी की अधिक मात्रा में कमी हो जाती है, जिससे फलों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। फलस्वरुप नमी की कमी के कारण फल गिरने लग जाते हैं।

इस समस्या के निदान के लिए आवश्यकता अनुसार बाग की सिंचाई कर के पौधों के पास नमी बनाए रखनी चाहिए।

पला पड़ने से पहले बाग की सिंचाई आवश्यक है तथा जिस पला पड़ने की संभावना हो उस दिन बाग के चरों तरफ धुंआ करना लाभप्रद रहता है।

नमी की कमी:-

फलों में नमी की कमी होने पर फलों की आकृति विकृत हो जाती है, और फल गिरने लगते हैं। फल वृद्धि के समय बाग में नमी का बराबर बना रहना अति आवश्यक है।

अतः गर्मियों में 8 से 10 दिन के अंतर पर तथा सर्दियों में 20 से 25 दिन के अंतराल पर सिंचाई करते रहना चाहिए।

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रोग एवं कीड़े:-

कुछ कीड़े एवं रोग होते हैं, जिनका प्रभाव फूल निकलने व फल बढ़ने के समय सबसे अधिक होता है। जिसके परिणामस्वरुप फूल व फल गिरने लगते हैं तथा पैदावार में बहुत कमी हो जाती है। अतः इसका नियंत्रण आवश्यक है।

चूर्णी रोग:-

यह रोग एक प्रकार के कवक द्वारा होता है। इस रोग से फूल, छोटे फल व पत्तियां प्रभावित होती हैं। प्रभावित भागों पर सफेद पाउडर की परत जाती है।

प्रभावित फूल फल बनने के पहले तथा फल का परिपक्व अवस्था में गिर जाते हैं। इस रोग से आम फलों को अधिक हानि होती है।

इस बीमारी के नियंत्रण के उपाय निम्न है:-

इसकी रोकथाम के लिए ब्लेकटॉकस (50) 3.4 ग्राम प्रति लीटर पानी  में घोलकर फूल खिलने से पहले और बाद में 15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करे।

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लेखक:-

डॉ. संजय सिरोही, डॉ. मनीष श्रीवास्तव

फल एवं प्रौद्योगिकी संभाग

भारतीय कृषि अनुसन्धान संस्थान- नई दिल्ली

स्रोत:-

विश्व कृषि संचार

वर्ष -20, अंक-11, अप्रैल-2018

विश्व एग्रो मार्केटिंग एन्ड कम्युनिकेशन, कोटा (राज.)

ईमेल – vks_2020@yahoo.com

मोब. नो.- 9425081638

 

 

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