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फलों का फटना कारण एवं नियंत्रण के उपाय

Written by bheru lal gaderi

उद्यानिकी फसलों में फलों का फटना एक गंभीर समस्या है। यह फलों की गुणवत्ता को ही कम नहीं करता साथ ही उनमें रोग व कीट आक्रमण की संभावना को भी बढ़ा देता है। सेब, अंगूर, लीची, अनार, चेरी आदि के फल तोड़ने से पूर्व फट जाते हैं।

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फलों का फटना की समस्या निम्न कारणों से होती है।

तापमान

अधिक तापमान के कारण पौधों एवं मृदा में जल की कमी हो जाती हैं। जिससे फलों की बाहरी त्वचा सख्त हो जाती है। तदोपरांत पौधों को पानी देने से फलों के अंदर उत्तकों के अनुपात में नहीं हो पाती जिससे फल फट जाते हैं। कागजी नींबू एवं देसी नींबू में इस समस्या को फलों के परिपक्व होने से पूर्व देखा जा सकता है।

नमी

अत्यधिक वातावरणीय तापमान के तुरंत पश्चात सिंचाई करने से फलों का फटना की समस्या हो जाती हैं। नमी पाने से फल के भर एवं आयतन में तो वृद्धि हो जाती है, किंतु उसी अनुपात में फल के बाहरी आवरण की वृद्धि नहीं हो पाती है। परिणाम स्वरुप फल फट जाते हैं।

हवा

गर्म एवं तेज हवाओं के कारण भी फल फट जाते हैं। गर्म हवाओं के चलने पर फल एवं पौधों में नमी की कमी हो जाती है। जिसके कारण फल फट जाते हैं।

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परिपक्वता

फलों की परिपक्वता के साथ-साथ इसमें घुलनशील ठोस पदार्थ तथा शर्करा की मात्रा बढ़ती है। यदि फलों के बाह्य कोष में सेलुलोज तथा लिग्निन का जमाव नहीं होता तो भी फलों का फटना की समस्या होती हैं। लिग्निन की जमाव फलों की परिपक्वता से प्रभावित होती हैं।

पोषक तत्व

चेरी एवं अनार में बोरॉन की कमी के कारण फल फट जाते हैं। सेब के फल बोरॉन, तांबा तथा जिंक की कमी के कारण फट जाते हैं। कीट एवं रोग

कीट एवं रोग

कीट एवं रोग से संक्रमित फल फटने के प्रति आग्रही होते हैं।

मूलवृन्त

कुछ फल वृक्षों में मूलवृन्त उपयुक्त न होने के कारण भी फट जाते हैं। दशहरी आम में मेलेपियम किस्म के मूलवृन्त का प्रयोग करने पर फल अधिक फटते हैं। जबकि एमबेलाबी किस्म के मूलवृन्त का प्रयोग करने पर फल कम फटते हैं।

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किस्म का प्रभाव

फलों का फटना फलों की किस्म के ऊपर भी निर्भर करता है। जैसे आम की लंगड़ा, बनारसी, फजली, जाफरानी और नीलम में फलों का फटना की समस्या कम होती है। केला की हरी छाल तथा रसथाली किस्मों में अन्य किस्मों की अपेक्षा फल अधिक फटते हैं। चिल्ली की देहरादून किस्म, मुजफ्फरपुर तथा सीडलैस में फलों का फटना क्रमश कम पाया जाता है।

पादप हार्मोन

पौधों में जिंक की कमी होने पर ऑक्सीजन हार्मोन की भी कमी हो जाती हैं, क्योंकि ऑक्सीजन के संश्लेषण के लिए जिंक की आवश्यकता होती हैं। फलों में वृद्धि रोधक हार्मोन की अधिकता के फलस्वरूप भी फट जाते हैं।

यांत्रिक कारण

फलों को एक स्थान से दूसरे स्थान पर परिवहन करने के फलस्वरूप भी रगडन, टकराने तथा अनुचित तरीके से रखरखाव के कारण भी फट जाते हैं।

पक्षियों द्वारा भी फलों को काटने पर फट जाते हैं।

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फलों के फटने का नियंत्रण

निम्नलिखित उपायों द्वारा फलों का फटना रोका जा सकता है:-

फलों का फटना

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प्रतिरोधी किस्म का उपयोग

अनार में फलों के फटने के प्रति प्रतिरोधी किस्म जैसे नासिक, डोलका, जालोर सीडलैस, बेदाना बोसेक का प्रयोग करना चाहिए। लीची की कोलकाता किस्म फटने के प्रति प्रतिरोधी किस्म है। चेरी की बिंग प्रजाति भी फटने के प्रति  प्रतरोधी है।

सिंचाई

मृदा में पर्याप्त मात्रा में नमी रखनी चाहिए। अत्यधिक तापमान के तुरंत पश्चात सिंचाई नहीं करनी चाहिए। पौधों को पानी प्रातःकाल एवं साईंकाल के समय ही देना चाहिए।

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रसायनों का छिड़काव

फलों को फटने से बचाने के लिए बोरान का 0% की दर से 15 दिन के अंतराल पर दो छिड़काव करना चाहिए। कैल्शियम सल्फेट, जिंक सल्फेट और कॉपर सल्फेट इत्यादि रसायन भी फलों को फटने से बचाने में सहायक है। पोटेशियम सल्फेट के 3 छिड़काव करने से फल कम फटते हैं।

हारमोंस का छिड़काव

फलों को फटने से बचाने के लिए 10 से 20 पी.पी.एम. मात्रा का छिड़काव करना चाहिए। एन.ए.ए. भी फल फटने से रोकने में सहायक सिद्ध होता है।

जल्दी तुड़ाई

सामान्य बड़े आकार के एवं अधिक परिपक्व फल छोटे आकार वाले फलों की तुलना में  फटने के प्रति अधिक सुग्राही होते हैं। अतः फलों की जल्दी तुड़ाई करने से फलों को फटने से रोका जा सकता है।

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गति अवरोधक वृक्षों की कतार

अत्यधिक हवा वाले क्षेत्रों में फलों को फटने से बचाने के लिए उत्तर पश्चिम दिशा में गति अवरोधक वृक्षों की क़तर लगाना चाहिए। जैसे ग्रेवियां, रोबस्टा, जामुन, शीशम इत्यादि।

फलों की तुड़ाई का तरीका

फलों को तोड़ने से जमीन पर गिरने के कारण फल फट जाते हैं। जमीन पर मल्चिंग करना चाहिए। विभिन्न उपकरणों का उपयोग करना चाहिए। जिससे फलों को तोड़ने पर कम नुकसान पहुंचता है।

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लेखक:-

डॉ. राजेंद्र सींग राठौड़, विनीता कुमारी, मीणा कुमारी एवं सुशीला ऐचरा

उद्यान विभाग एवं मृदा विज्ञानं विभाग

राजस्थान कृषि महाविद्यालय उदयपुर (राज.)

स्रोत:-

विश्व कृषि संचार

वर्ष -20, अंक-11, अप्रैल-2018

विश्व एग्रो मार्केटिंग एन्ड कम्युनिकेशन, कोटा (राज.)

ईमेल – vks_2020@yahoo.com

मोब. नो.- 9425081638

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