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फर्टिगेशन तकनीक का सिंचाई में उपयोग एवं महत्व

फर्टिगेशन
Written by bheru lal gaderi

किसान भाइयो आज के इस कम्प्यूटरीकृत युग मे फर्टिगेशन खेत मे सिचाई एवं उर्वरक देने की बहुत ही अच्छी व नवीनतम तकनीक हैं।

फर्टिगेशन

फर्टिगेशन:-

खेत में सिचाई एवं उर्वरक देने की नवीनतम तकनीक। फर्टिगेशन (Fertigation) से यहाँ तत्प्रिय है, उर्वरको को खेत में देने की प्रक्रिया या विधि से है, जिस के अंतर्गत उर्वरको के मिश्रण को सिचाई के काम में लिए जाने वाले पानी के साथ मिला कर ड्रिप सिचाई संयंत्र के माध्यम से पौधों या फसलों को बराबर मात्रा में वितरित करना फर्टिगेशन कहलाता है। इस तकनीक के माध्यम से की गई सिचाई से पौधों को पौषक तत्वों के उपलब्धता अधिक रहती है, इसलिए उर्वरको की कार्य दक्षता अधिक रहती है।

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फर्टिगेशन= सिचाई के पानी + उर्वरक

उर्वरको की कार्य दक्षता विभिन्न प्रकार से उर्वरक देने की विधि में:-

  • पौषक तत्वों उर्वरको की कार्य दक्षता (% प्रतिशत में)
  • उर्वरक सीधे मिट्टी में देना उर्वरक फर्टिगेशन से देना
  • नाइट्रोजन (N) 30-50 95
  • फॉस्फोरस (P) 20 45
  • पोटैशियम (K) 50 80

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फर्टिगेशन के लाभ:-

किसानों को कम होते पानी से सामंजस्य करते हुए अपनी फसल या पौधों की उत्पादकता बढ़ानी होगी, इस के लिए उच्चतम कृषि क्रियों को अपने जरूरत के करनी होगी।

किसान फर्टिगेशन के माध्यम से पौषक तत्वों एवं सिचाई के पानी को फसल या पौधों की सक्रिय जड़ क्षेत्र में देने से पानी व् पौषक तत्वों का अधिक एवं उचित अवशोषण होगा जिस से उत्पादकता में बढ़ोतरी होगी।

इस तकनीक के माध्यम से दिए गए उर्वरक फसलों एवं पौधों में समान रूप से उपलब्ध हो पाएंगे, जिस से 25-50 प्रतिशत तक उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

फर्टिगेशन के माध्यम से उर्वरको के उपयोग दक्षता में 80-90 प्रतिशत तक बढ़ोतरी देखी गई है, इस के फल स्वरूप किसान 25 प्रतिशत तक पौषक तत्वों की बचत करने में सक्ष्म होंगे।

इस तकनीक से किसान अपनी फसल लागत को कम कर सकते है, साथ ही पानी एवं पौषक तत्वों की भी बचत कर पाएंगे।

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फर्टिगेशन में काम लेने वाले उर्वरक:-

किसानों के लिए इस तकनीक के माध्यम से देने के लिए पानी में घुलनशील उर्वरक बाजार में कई कंपनीयो द्वारा उपलब्ध करवाए जा रहे है। किसान यह ध्यान रखे कई यूरिया, पोटाश पानी में अत्यधिक घुलनशील है, साथ ही घुलनशील उर्वरक भी बाजार में उपलब्ध है| किसान फॉस्फोरस पौषक तत्व के लिए उन उर्वरक को काम में ले जिनमें फॉस्फोरस का स्वरूप फास्फोरिक एसिड में हो, इसे उर्वरक तरल रूप में बाजार में उपलब्ध है।

इसके अलावा किसान मोनो अमोनियम फॉस्फेट (नाइट्रोजन एवं फॉस्फोरस), पॉलीफीड (N, P, K), मल्टी K (N & K) और पोटैशियम सलफेट (पोटैशियम और सल्फर) आदि उर्वरक फर्टिगेशन में उपयोग कर सकते है, यह उर्वरक पानी में अत्यधिक घुलनशील है साथ ही इन उर्वरको से किसान अपनी फसल एवं पौधों को Fe, Mn, Cu, B, Mo पौषक तत्वों की आपूर्ति कर सकते है।

नाइट्रोजन फर्टिगेशन उर्वरक- यूरिया, अमोनियम सलफेट, अमोनियम नाइट्रेट, कैल्शियम अमोनियम सलफेट, कैल्शियम अमोनियम नाइट्रेट, कुछ प्रमुख नाइट्रोजन उर्वरक है जो किसान ड्रिप सिचाई के दौरान फर्टिगेशन के रूप में काम लिए जासकते है।

फोस्फोरस फर्टिगेशन उर्वरक- फास्फोरिक एसिड एंड मोनो अमोनियम फॉस्फेट।

पोटैशियम फर्टिगेशन उर्वरक-पोटैशियम नाइट्रेट, पोटैशियम क्लोराइड, पोटैशियम सलफेट और मोनो पोटैशियम फॉस्फेट।

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फर्टिगेशन उपकरण:

मुख्यत इस तकनीक में तीन उपकरण ड्रिप सिचाई संयंत्र में काम में लिए जाते है- वेंचुरी, फ़र्टिलाइज़र टैंक (उर्वरक टैंक) और फ़र्टिलाइज़र पंप।

किसान यह ध्यान रखे की ड्रिप सिचाई संयंत्र की लागत का निर्धारण किसान द्वार ली जा रही फसल या पौधों की दुरी पर निर्भर करता है।

लेखक:-

फर्टिगेशन

जशबीर

एग्रीकल्चर सुपरवाइजर

कृषि विभाग दौसा

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