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प्रॉम खाद – एक प्रमुख जैविक खाद स्रोत एवं निर्माण विधि

प्रॉम खाद
Written by bheru lal gaderi

प्रॉम खाद (फॉस्फोरस रिच ऑर्गेनिक मेन्योर ) एक फॉस्फोरस युक्त जैविक खाद है जिसे उच्च श्रेणी के रॉक फॉस्फेट एवं कार्बनिक पदार्थो जैसे की कृषि अपशिष्टों, गोबर, करंज की खली, प्रेसमड, फल उद्योगों से प्राप्त कचरा इत्यादि के समिश्रण से तैयार किया जाता है। इसमें 15-16 प्रतिशत जैविक कार्बन, 4-5 प्रतिशत सल्फर, 15 प्रतिशत नमी एवं 20:1 कार्बन: नाइट्रोजन का अनुपात होता है।

प्रॉम खाद

पूर्ण जैविक खाद

करीब सौ दिन बाद तैयार खाद को खेत में डाल दिया जाता है। इस खाद के उपयोग से खेतों की उर्वरा शक्ति को बढ़ाया जा सकता है। कृषि अपशिष्टों के द्धारा बनने की वजह से यह पूर्णतया जैविक होता है। उच्च गुणवत्तयुक्त प्रॉम खाद मृदा सुधारक का कार्य करता है। प्रॉम खाद एवं फॉस्फोरस की आवश्यकता की पूर्ति ही नहीं करता बल्कि अन्य पोषक तत्वों जैसे कि पोटाश, कैल्सियम, गन्धक, जस्ता, मैग्नीशियम एवं लोहा प्रचुर मात्रा में प्रदान करता है। इस खाद में कार्बन एवं नत्रजन का अनुपात सही होने से मृदा की वायु संचारता एवं जल संग्रहण क्षमता भी अच्छी बनती है।

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प्रॉम खाद सभी प्रकार की मृदाओं जैसे अम्लीय, उदासीन एवं कम  क्षारीय काफी के लिए उपयोगी सिद्ध हुआ है। देश के विभिन्न भागों में विभिन्न भागों में विभिन्न फसलों पर प्रयोग करने से यह सिद्ध हो चुका है कि यह खाद गेंहू, चावल, सोयाबीन, सरसों, मूंगफली, चना, कपास, चांवला, मिर्च, पान जैसी फसलों के लिए बहुत ही उपयोगी है। इसे किसान घर पर आसानी से बना सकते है।

प्रॉम खाद बनाने हेतु आवश्यक सामग्री

इस खाद बनाए के लिए कई कृषि अपशिष्टों को प्रयोग में लाया जाता है। इसमें प्रेसमड महत्वपूर्ण एवं सस्ता अपशिष्ट है जो आसानी से प्राप्त हो जाता है। प्रॉम खाद निर्माण में निम्न सामग्री प्रयोग में लाई जाती है। जिन्हे देश के विभिन्न प्रदेशों से एकत्रित किया जा सकता है।

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प्रैसमड यह गन्ने से चीनी बनाने के दौरान बनाने वाला उप उत्पाद है।

मधुशाला कचरा (डिस्टलरी वेस्ट)

शुगर मिल में मीथेन गैस निर्माण के पश्चात् प्राप्त होने वाला पदार्थ मधुशाला कचरा (डिस्टलरी वेस्ट)  कहलाता है।

रॉक फॉस्फेट

उच्च श्रेणी के रॉक फॉस्फेट में 34% फास्फोरस होता है जिसे राजस्थान राज्य खान एवं खनिज लिमिटेड, उदयपुर से आसानी से एवं सस्ती दर 3100 रूपये प्रति टन पर ख़रीदा जा सकता है।

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रॉक फॉस्फेट और प्रेसमड का अनुपात (1:3)

प्रॉम खाद उत्पादन के लिए 100 मेट्रिक टन के मिश्रण में रॉकफॉस्फेट एवं प्रेसमड को क्रमश: 30 प्रतिशत एवं 70 प्रतिशत के अनुपात में मिलाया जाता है।

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सूक्ष्म जीवीय सवंर्धन

यह संवर्धन जाइगोट इन्डिया प्राइवेट लिमिटेड से प्राप्त किया जा सकता है। इस संवर्धन संवर्ध ट्राईचूरूस स्पाईरेलिस, एग्रो बैक्टीरियम, रेडियोबेक्टर, युरोमाइसिज फेसिलोजी, क्लोरोस्पोरियम रेसिनी इत्यादि सूक्ष्म जीव होते है।

फास्फेट एवं एजोटोबैक्टर कल्चर

प्रॉम खाद बनाने की विधियाँ

प्रॉम खाद बनाने के लिए निम्न तरीका/विधि को अपनाया जाता है।

प्रेसमड से प्रॉम खाद का निर्माण

प्रॉम निर्माण बायो कम्पोस्टिंग के सिद्धांत पर आधारित हैं। इसके उत्पादन में किण्वन प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता हैं। प्रॉम खाद बनाने के लिए प्रेसमड में निर्धारित मात्रा में रॉक फॉस्फेट मिलाया जाता हैं। यह सामान्यतया 100 मेट्रिक टन के मिश्रण में 70 मेट्रिक टन प्रेसमड एवं 30 मेट्रिक टन रोक फॉस्फेट होता हैं। इस मिश्रण को थर्मोफाइलिक बैक्टीरिया एवं मिजोफाइलिक कवक से युक्त जैव संवर्धन के साथ संरोपण किया जाता हैं। इस मिश्रण को जुट या प्लास्टिक से ढक दिया जाता हैं व नियमित रूप से समय-समय पर प्रतिदिन डिस्टेलेरी वेस्ट का छिड़काव करके सड़ाया जाता हैं।

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प्रतिदिन इस मिश्रण को पलटा जाता हैं, साथ ही 60% नमी भी कायम रखी जाती हैं। थर्मोफाइलिक बैक्टीरिया गुणन के दौरान ऊर्जा उत्पन्न करते हैं जिससे बायोमास के तापमान में वृद्धि होती हैं। उत्त्पन उच्च तापमान से वाष्पीकरण होता हैं जिससे बायोमास का वजन कम हो जाता हैं और कार्बनिक खाद के विघटन के दौरान उत्पन्न कार्बनडाई ऑक्साइड गैस, कार्बनिक अम्ल का निर्माण करती हैं जो रॉक फॉस्फेट को घोलकर फॉस्फोरस की उपलब्धता को बढ़ा देता हैं। इस प्रकार तैयार अंतिम उत्पाद में नाइट्रोजन, फॉस्फोरस एवं पोटाश की मात्रा अधिक होती हैं। इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में लगभग 60-90 दिन का समय लगता हैं और लगभग 1,25000 लीटर डिस्टलेरी वेस्ट की आवश्यकता होती हैं। इस प्रकार 100 मेट्रिक टन के मिश्रण से 39.25मेट्रिक टन प्रॉम खाद का निर्माण होता हैं।

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गोबर से प्रॉम खाद बनाना

प्रॉम खाद बनाने के लिए 8 फ़िट लम्बा, 6 फ़िट चौड़ा, 3 फिट गहरा गड्ढा बनाते हैं या आवश्यकता अनुसार छोटा एवं बड़ा गड्ढा बना सकते हैं। प्रॉम खाद बनाने के लिए 100 किलो रॉक फॉस्फेट के साथ 1600 किलो ताजा गोबर, 1 किलो फॉस्फेट कल्चर एवं 1 किलो एजेक्टोबेक्टर की आवश्यकता होती हैं। (एक भाग रॉक फॉस्फेट के साथ तीन भाग शुष्क कार्बनिक पदार्थ), ताजा गोबर, पशु मूत्र एवं रॉक फॉस्फेट को अच्छी तरह मिला कर पानी छिड़क कर गीला कर देते हैं।

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इसके पश्चात गढ्ढे में भर देते हैं और नमी बनाये रखते हैं खाद में नमी बनाये रखने के लिए प्लास्टिक की चादर/फसल अवशेष से खाद के ढेर को ढक देते हैं। 50-60 दिन बाद खाद को अच्छी तरह पलटी देकर मिला देते हैं और पानी छिड़ककर नम बनाये रखते हैं। 100 दिन बाद खाद में एक किलो फॉस्फेट एवं एक किलो एजेक्टोबेक्टर कल्चर अच्छी तरह मिला देते हैं और नम बना देते हैं। इस प्रकार से प्रॉम खाद 110-120 दिन में बनकर तैयार हो जाते हैं।

फसल अवशेष एवं पौधे की पत्तियों से प्रॉम खाद बनाना

एक भाग उच्च श्रेणी का रॉक फॉस्फेट (34-74) के साथ दो शुष्क पदार्थ के आधार पर फसल अवशेष (सरसों, गेहू, धान, मक्का, टिल एवं तिलहनी फसल आदि) या पौधों की पत्तियों की आवश्यकता होती हैं। फसल अवशेषों को छोटे-छोटे टुकड़े बना लेते हैं। 8 फ़िट लम्बा, 6 फ़िट चौड़ा, 3 फ़िट गहरा गड्डा बनाते हैं। गद्दे में फसल अवशेष को रॉक फ़ॉस्फ़ोट के साथ अच्छी तरह मिला देते हैं एवं पानी छिड़ककर गिला कर देते हैं इसके पश्चात् गड्डे में भर देते हैं खाद के ढेर को नम बनाये रखने के लिए प्लास्टिक की चादर/फसल अवशेष से खाद के ढेर को ढक देते हैं।

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30-40 दिन बाद खाद को अच्छी तरह मिला देते हैं एवं पानी डालकर गिला कर देते हैं। 100 दिन बाद एक किलो फॉस्फेट कल्चर एवं एक किलो एजेक्टोबेक्टर कल्चर मिलाकर खाद के ढेर को अच्छी तरह मिला देते हैं एवं पानी छिटककर गीलाकर देते हैं। 110-120 दिन के बाद खाद सड़कर प्रॉम खाद के रूप में तैयार हो जाता हैं।

वर्मी प्रॉम खाद

प्रॉम खाद को जल्दी बनाने के लिए केंचुओं का उपयोग कर प्रॉम भी बनाया जा सकता हैं।

प्रॉम खाद प्रभावी क्यों  हैं?

मृदा में कार्बनिक पदार्थों की वृद्धि के साथ-साथ फॉस्फेट की घुलनशीलता में वृद्धि होती हैं। कार्बनिक पदार्थों के अपघटन की प्रक्रिया के दौरान ह्यूमिक एसिड एवं फ्लूविक एसिड निकलता हैं जो मृदा में अप्राप्य अघुलनशील फॉस्फेट को प्राप्य मोनो कैल्शियम फॉस्फेट अवस्था में परिवर्तित कर देता हैं। यह तथ्य ही प्रॉम खाद को प्रभावी बनता हैं। उच्च कोटि के फॉस्फेट खनिज में कार्बोनेट योगिक नहीं होता हैं, अतः प्राकृतिक खाद के उपयोग द्वारा फॉस्फेट की ग्राहा रूप से हमेशा उपलब्धता बनी रहती हैं। रासायनिक उर्वरकों जैसे की डी.ए.पी. एवं एस.एस.पी. आदि में जल में घुलनशील फॉस्फेट उपस्थित होता हैं लेकिन फॉस्फेट अल्पावधि में ही अघुलनशील अवस्था में बदल जाता हैं जो पौधों को उपलब्ध नहीं हो पाता हैं।

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मृदा में उपस्थित आयरन, एल्युमिनियम एवं मेगनीज आयन अम्लीय भूमि में फॉस्फेट आयनों का स्थिरीकरण करते हैं और समयांतर पर तो फॉस्फेट की उपलब्धता और अधिक क्षीण होती जाती हैं। यह रासायनिक उर्वरक (डी.ए.पी. एवं एस.एस.पी.) का अच्छा विकल्प हैं। प्रॉम खाद को किसान स्वयं तैयार कर सकते हैं। प्रॉम खाद न केवल वृतायन फसल के लिए उपयोगी हैं बल्कि मृदा में इसकी सतत उपलब्धता बनी रहने के कारण आगे बोये जाने वाली फसलों के लिए भी काम में आता हैं, यानी की रेजीडुअल प्रभाव पड़ता हैं। जैविक खाद होने से प्रॉम रासायनिक उर्वरक के सभी दुष्परिणामों से बचाता हैं। मृदा जल धारण क्षमता में सुधार होता हैं। यह प्राकृतिक खाद होने से इसके द्वारा होने वाले उत्पादन की अच्छी कीमत मिलती हैं।

प्रॉम खाद में सावधानियां

प्रॉम खाद बुवाई से एक सप्ताह के अंदर डाल कर मिट्टी में मिला देना चाहिए जो खड़े पौधों को आरम्भिक अवस्था में वृद्धि के लिए फॉस्फोरस की आवश्यकता की पूर्ति करता हैं। अधिक दुरी पर बोई जाने वाली फसलों में प्रॉम खाद फरों में डालकर बुवाई करें।

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प्रॉम खाद की उत्पादन लागत

भारत में विभिन्न कंपनियों द्वारा प्रॉम खाद का निर्माण करना शुरू कर दिया जैसे सिम्भौली शुगर मिल लिमिटेड, गाजियाबाद, उत्तरप्रदेश में प्रॉम के नाम से प्रॉम खाद का निर्माण होता हैं। एक टन सिम्भौली प्रॉम के उत्पादन की लागत 3050 रुपये आती हैं। प्रॉम में 16-18% फॉस्फोरस एवं 22-25% नमी होती हैं। इसका पी.एच. मान 7.4 होता हैं। इसके अलावा इसमें सूक्ष्म मात्रा में कैल्शियम, पोटाश, गंधक, जस्ता, मैग्नीशियम, लोहा इत्यादि तत्वों की उपस्थिति भी होती हैं। किसानों के पास उपलब्ध जैविक पदार्थ के रॉक फॉस्फेट मिला कर प्रॉम खाद बनाने पर फॉस्फोरस की प्रति किलो लागत मात्र रूपये 20 आती हैं जबकि उर्वरक (एस.एस.पी. एवं डी.ए.पी.) उपयोग करने पर फॉस्फोरस की लागत प्रति किलो 25-27 रूपये होती हैं। अतः किसान प्रॉम द्वारा फॉस्फोरस उपयोग कर प्रति किलोग्राम औसतन 5-7 रूपये बचा सकते हैं।

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