प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना – हर खेत को पानी

By | 2017-05-13

पानी की प्रत्येक बून्द की कीमत को समझाते हुए भारत सरकार ने प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना(पीएमकेएसवाई) बनाई हैं, जिसका उद्देश्य “हर खेत को पानी” हैं। इसका फोकस जल संसाधनों को अधिकतम उपयोग पर हैं ताकि बाद और सूखे के आवेग से होने वाले नुकसान की रोकथाम की जा सके। ऐसा करने से उपलब्ध संसाधनों का कुशल उपयोग हो सकेगा और साथ ही किसानों को अधिक पैदावार मिलेगी।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना क्या हैं ?

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

अगले पांच वर्षों में 50,000 करोड़ रु. के निवेश से प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना कार्यक्रम में पूरी आपूर्ति श्रंखला अर्थात जल स्त्रोत, वितरण नेटवर्क तथा फार्म स्तर के अनुप्रयोग पर ध्यान केंद्रित करके एकीकृत विकास की कल्पना की गई हैं। वर्ष 2015-16 के दौरान लघु सिंचाई के तहत 8.0 लाख हेक्टेयर क्षेत्र लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया हैं। दिसंबर 2019 तक 99 मुख्य और माध्यम सिंचाई को मिशन मोड़ में पूरा किये जाने का भी निर्णय लिया गया हैं। इसके अतिरिक्त 76.03 लाख हेक्टेयर क्षेत्र सिंचाई के तहत लाया जा सकेगा।

किसानों को फायदा

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना

  • ऐसे प्रोजेक्टों को प्राथमिकता दी जा रही हैं, जो पुरे होने के कगार पर हैं ताकि किसानों को तुरंत फायदा मिल सके।
  • किसान बेहतर सिंचाई जल योजना अपना सकते हैं।
  • किसान ड्रिप/स्प्रिकलर सिंचाई योजनाओ को अपना सकते हैं।
  • इन तकनीकों की जानकारी किसान को अपने जिले के कृषि/बागवानी अधिकारी से मिल सकती हैं।
  • किसान टोल फ्री किसान कॉल सेंटर 1800-180-1551 से भी जानकारी ले सकते हैं।
  • कृषि समन्वय एवं किसान कल्याण विभाग को वर्ष 2016-17 में सूक्ष्म सिंचाई के लिए रु. 2340 करोड़ का आवंटन किया गया हैं, जो  वर्ष 2015-16 के रु. 1550 करोड़ का बजट से 51% अधिक हैं।

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सिंचाई कोष वर्ष 2016-17

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के अंतर्गत वर्ष 2016-17 में रूपये 12517 करोड़ की लागत से 23 बड़े और माध्यम सिंचाई परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। लगभग रु. 20,000 करोड़ की शरुआती रकम के साथ नाबार्ड में एक समर्पित लम्बी अवधि सिंचाई कोष का सर्जन किया जाएगा।

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रेनफेड इलाकों में मनरेगा के अंतर्गत 5 लाख कृषि तालाबों और कुओ का निर्माण प्रस्तावित हैं।

जल संचय और जल सिंचन

“जल संचय और जल सिंचन” के माध्यम से वर्षा जल को एकत्रित करके किसान पानी को संरक्षित कर सकते हैं और “प्रति बंद अधिक फसल” सुनिश्चित कर सकते हैं।

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