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प्याज की नर्सरी तैयार करने की उन्नत तकनीक

प्याज की नर्सरी
Written by bheru lal gaderi

भारत में उगाई जाने वाली सब्जियों में प्याज(onion) का महत्वपूर्ण स्थान है। इसकी खेती और खपत पुरे भारत में होती है। निर्यात होने वाली सब्जियों से मिलाने वाली विदेशी मुद्रा का लगभग 70% भाग प्याज से आता है। यूँ तो इसकी खेती मुख्य रूप से रबी की सीजन में जाती है, परन्तु आजकल कुछ क्षेत्रों में खरीफ की फसल में भी प्रचलित हो रही है। प्याज की फसल से ज्यादा लाभ कमाने के लिए प्याज की नर्सरी/रोपणी के लिए ज्यादा पौधों को तैयार करना एक प्रमुख कार्य होता है।

प्याज की नर्सरी/रोपणी की तैयारी

प्याज की नर्सरी

प्याज की नर्सरी/रोपणी तैयार करने के लिए उचित जल निकासी वाली, उपजाऊ, तथा दोमट मिट्टी अच्छी रहती है। खेत को अच्छी प्रकार से जुताई कर लें एवं उसमे 40-50 किग्रा. गोबर की अच्छी तरह से सड़ी हुई खाद  प्रति वर्ग मीटर में एवं उसमें 1-3 ग्राम कार्बोफ्यूरान नामक दवा मिलाकर, मिटटी भुरभुरी बना दें।

जमीन से 15-20 से.मी. ऊपर प्याज की नर्सरी को रखनी चाहिए। प्याज नर्सरी/रोपणी की चौड़ाई 1 मीटर व लम्बाई 3-5 मीटर रखनी चाहिए एवं दो क्यारियों के बीच में लगभग 50 से.मी. का फासला रखना चाहिए। इसके बाद क्यारियों के बीच बनी नालियों में पानी दें। जब सिंचाई के बाद क्यारियों में बत्तर आ जायें उसकी हल्की निराई-गुड़ाई करके मिट्टी को भुरभुरी तथा समतल कर लें।

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बीज उपचार एवं बुवाई

प्याज की नर्सरी

नर्सरी की मिट्टी को बुवाई से एक दिन पहले कैप्टान (2ग्राम/लीटर) से नमीयुक्त  बना देना चाहिए। क्यारियों में 5-7 से.मी. की दुरी से पर लगभग 1 से.मी. गहरी कतारें (लाइनें) बना ले एवं हल्की सी अच्छी सड़ी हुई बारीक़ खाद इन कतारों में डाल दें इससे बीज का जमाव अच्छा रहने के साथ जड़ो का विकास भी बेहतर होता है।

बीज बोने से पहले 4-5 घंटे भिगो ले एवं उसके बाद कैप्टान या थाइरम (3ग्राम/किग्रा.) से उपचारित कर लें और बनाई गई कतारों में बीज की बुवाई करें। उसके बाद बीज को बारीक खाद तथा उसमें मिट्टी मिलकर ढक दें एवं नर्सरी को घास-फुस या पर घास या पुआल से ढक दें और फव्वारें या हजारे से पानी दें। इन्हे तब तक ढके रखना चाहिए जब तक पौधे अंकुरित होकर बाहर न आ जायें। अंकुरण के बाद घास या पुआल को हटा देना चाहिए। रबी मौसम में पौधे तैयार होने में 8-9 सप्ताह का समय लगता है।

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प्याज की प्रमुख किस्में

प्याज की प्रमुख उन्नत किस्में निम्न है – पंजाब सलेक्शन, पूसा माधवी, पूसा रतनार, पंजाब सफेद, अर्का कल्याण, पूसा रेड, पूसा सफेद फ्लेट, बसवंत 780, एग्रीफॉउन्ड लेत रेड, अर्का निकेतन।

बीज की मात्रा एवं आवश्यकता

एक हेक्टेयर क्षेत्र में प्याज की खेती करने के लिए अच्छी अंकुरण क्षमता वाल 8-10 किलोग्राम बीज प्रयाप्त होता है।  साधारणतया एक वर्गमीटर क्षत्र में 10 ग्राम बीज डाला जाता है।

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नर्सरी तैयार करने का उचित समय

रबी मौसम के लिए मध्य अक्टूबर-मध्य नवम्बर का समय प्याज की नर्सरी/रोपणी के लिए सही रहता है।

सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई

जब तक बीज अंकुरित न हो जायें, घास-फुस के ऊपर से ही हल्की सिंचाई (फव्वारे/हजारे से) नमी बनाये रखने के लिए करते रहना करनी चाहिए रोपाई के बाद एवं पहली सिंचाई से पहले खरपतवारनाशी दवा पेंडीमेथलीन 3.35 लीटर/हेक्टेयर की दर से छिड़काव करना चाहिए। रोपाई के लिए पौधों को नर्सरी में खुरपी की सहायता से निकालना चाहिए।

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नर्सरी की देखरेख

प्याज की फसल की तरह ही पौधशाला में भी प्याज की पौध थ्रिफ्स कीट काफी प्रभावित होती है। अगर समय पर इसका नियंत्रण न किया जाय तो पौध की विकास एवं फसल की उपज पर प्रतिकूल असर पड़ता है। ये कीट छोटे एवं पीले रंग के होते हैं जो पत्तियों का रस चूसते हैं जिससे के कारण पत्तियों पर सफेद धब्बा बन जाता है। थ्रिप्स नियंत्रण के लिए मोनोक्रोटोफॉस 1.5 मि.ली. या  साईपरमेथ्रिन 0.5 मि.ली. प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर 10 से 15 दिन के अंतराल पर छिड़काव करें।

प्याज की नर्सरी में लगने वाली सबसे प्रमुख बीमारी आर्द्र गलन रोग है जिससे पौधे जड़ से ऊपर से गलकर गिर जाते है। इससे बचाव के लिए 5-6 दिनों के अंतराल पर कार्बेन्डाजिम (2ग्राम/लीटर) घोल का छिड़काव करें।

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