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पॉली हाउस में लगने वाले प्रमुख कीट एवं पतंगे

Written by bheru lal gaderi

आमतौर पर पॉली हाउस में कीट का प्रकोप नहीं होता है परंतु कभी-कभी कुछ कीट एवं पतंगों का प्रकोप होता है जिसकी जानकारी निम्न प्रकार है।

पॉली हाउस

सफेद मक्खी

यह सफेद, दूधिया रंग का एक छोटा- सा जीव होता है, जो पत्तियों से रस चूसता है। इसकी उपस्थिति का एहसास पौधों को हिलाने से हो जाता है। जैसे ही पौधों को हिलाया जाता है सफेद रंग की छोटी-छोटी मक्खियां उड़ने लगती है। इसके रस चूसने से पौधों को बहुत अधिक नुकसान नहीं होता है, लेकिन यह कीट विषाणु जनित बीमारियों का वाहक है, इसलिए ज्यादा खतरनाक है।

रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 2.5 मिलीलीटर का छिड़काव करना चाहिए।

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पॉली हाउस में एफिड एवं एसिड

ये छोटे-छोटे मच्छर की तरह जिव होते हैं, जो नई- नई कोपलों एवं कोमल भागों से रस चूसते हैं, एवं पौधों को कमजोर कर देते हैं। इनके प्रकोप से फूल एवं फल कम बनते हैं तथा यह किट भी कई प्रकार की बीमारियों के वाहक होते हैं।

नियंत्रण

इसका नियंत्रण भी इमिडाक्लोप्रिड से किया जा सकता है।

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फसल मित्र कीट का जैविक खेती में महत्व एवं उपयोग

लीफ माइनर

पॉली हाउस में लगाई जाने वाली सभी फसलों में इसका प्रकोप देखा गया है। खीरा एवं टमाटर में इसका अधिक प्रकोप देखा गया है। यह एक पीले रंग का एक छोटा सा कीट है, जो पत्तियों की सतह पर सुरंग बनाकर अंदर रहता है, एवं पत्तियों को खाता है। इसके प्रभाव से पत्तियों पर आड़ी- तिरछी सफेद रेखाएं हो जाती हैं। अधिक संक्रमण होने पर पत्तियां खराब हो जाती है एवं पौधा सूख जाता है। खीरे में यह कीट फलों को भी नुकसान पहुंचाता है।

रोकथाम

इसकी रोकथाम के लिए प्रोपेनोफॉस 1 मिलीलीटर का छिड़काव किया जा सकता है।

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पत्ती एवं फल छेदक कीट

यह कीट काली एवं हरे रंग की सुण्डिया होती है, जो पौधों की पत्तियां खाती है, यह पॉली हाउस में लगने वाली फसलों का प्रमुख कीट है, इस कीट के वयस्क फल की सतह पर अंडे देते हैं। इन अण्डों से छोटी-छोटी सूण्डियां फलों के अंदर घुस जाती है एवं अंदर ही अंदर फलों को खाती रहती है। ऐसे फल पौधों से टूट कर गिरने लगते हैं। टमाटर एवं शिमला मिर्च में इसका नुक्सान बहुत अधिक होता है। अधिक नमी एवं अधिक तापमान पर यह कीट बहुत शीघ्र फैलता है।

नियंत्रण

इसके नियंत्रण के लिए 25 मिलीलीटर का छिड़काव करना चाहिए।

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मकड़ी

हल्के गुलाबी लाल रंग का यह जीव पॉली हाउस में लगने वाली सभी फसलों को नुकसान पहुंचाता है। यह छोटे- छोटे जीव पौधों की पत्तियों एवं फलों पर चिपके रहते हैं, एवं रस चूसकर पौधा को कमजोर कर देते हैं। लाल मकडिया पौधे पर जाले बनाती है। एवं संक्रमित पत्तियां खुरदरी हो जाती है, तथा सूखने लगती है।

नियंत्रण

इसके नियंत्रण के लिए एबुमेक्टिन 1 मिलीलीटर का छिड़काव किया जा सकता है।

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सूत्रकृमि

ये मृदाजीव बहुत ही छोटे होते हैं, जिन्हें सिर्फ सूक्ष्मदर्शी यंत्र से ही देखा जा सकता है। सब्जी वाली फसलों में विशेषतः टमाटर, मिर्च एवं खीरा में ये बहुत नुकसान पहुंचाते हैं। इनसे पौधे कमजोर हो जाते हैं एवं उनकी वृद्धि रुकने लगती है। पौधों को देखने से ऐसा लगता है कि मानो पानी की कमी अथवा खाद की कमी से पौधा पीला पड़ रहा है। ऐसे में अगर पौधे को उखाड़कर देखा जाए तो पता चलता है कि उस पौधे की जड़ों में गांठ बन गई हैं।

नियंत्रण

इसके नियंत्रण के लिए फसल लगाने से लेकर आगे तक समन्वित उपाय अपनाने चाहिए। सर्वप्रथम क्यारियों को निर्जलीकृत करके पौधरोपण करना चाहिए। क्यारियां बनाते समय क्यारियों में नीम अथवा करंज की खली डालनी चाहिए। इसके साथ ही पॉली हाउस के चारों तरफ 1.5-2 फ़ीट गहरी ट्रेंच बना देनी चाहिए। कार्बोफ्यूरान से भी इसका नियंत्रण किया जा सकता है।

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