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पॉलीथिन थैलियों में किसान ने उगाई खीरा फसल

पॉलीथिन थैलियों
Written by bheru lal gaderi

पॉलीथिन थैलियों में उगाई खीरा फसल – अक्सर इंसान चुनौतियों से डरकर हार मान लेते हैं, लेकिन सफल वही होते हैं जो हर बाजार का तोड़ निकाल लेते। मजबूत मनोबल का कुछ ऐसा ही परिचय दिया है, राजसमंद के लापस्या गांव के किसान छीतरमल जाट ने।

Image Credit – krishakjagat.org

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किसान छीतरमल जाट ने अपने खेत पर ग्रीनहाउस लगाया, लेकिन मिट्टी खराब होने की वजह से उपज नहीं ले पाए। किसान ने इस बाधा का तोड़ निकाला और उपजाऊ मिट्टी से भरी पॉलीथिन की थैलियों में ही लाखों की फसल तैयार कर ली। आज वे स्थानीय किसानों के लिए प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।

छीतरमल जाट ने जिले की रेल मंगरा पंचायत समिति के  गांव में वर्ष 2014 15 में 1008 वर्ग मीटर भूमि पर ग्रीन हाउस लगाया। जिसमें करीब 2.4 लाख रुपए की लागत आई।

किसान बताते हैं कि इस ग्रीनहाउस में उन्होंने खीरा फसल ली, लेकिन मिट्टी के खराब होने के कारण उपज नहीं मिल सकी। काफी खर्च और उपाय करने के बाद वे फसल लेने में असमर्थ हो गए तो उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से मार्गदर्शन लिया, जिसमें भूमि के क्षारीय होने की आशंका जताई गई।

मृदा जांच कराई तो भूमि में लवण की मात्रा 2.57 ई.सी. (इलेक्ट्रिकल कंडक्टिविटी) आई। ऐसे में उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर उपयुक्त मिट्टी भरी पॉलीथिन की थैलियों के जरिये ग्रीन हॉउस में खेती करने का निर्णय लिया।

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इस तरह किया नवाचार:-

किसान ने 1008 वर्ग मीटर के ग्रीन हाउस में 2600 पॉलीथिन थैलियों को पंक्ति में लगाया। बाहर से लाई गई उपयुक्त मिट्टी और वर्मी कुलाइट को निश्चित अनुपात में पॉलीथिन थैलियों में भरा।

एक-एक हथेली पर पौधे लगाकर 110 दिन में 9.5 टन खीरे की उपज ली, जिससे उन्हें 2.25 लाख रूपये की आमदनी हुई। किसान बताते हैं कि उन्होंने साल में 3 फसलों के हिसाब से करीब 7.5 लाख रूपये की पैदावार की। मिट्टी समस्या से परेशान किसान भी उनका अनुसरण कर रहे हैं।

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इनका कहना:-

मिट्टी में लवण की मात्रा अधिकतम एक  ई.सी. ही होनी चाहिए। इसलिए अधिक लवणता होने पर मिट्टी खराब हो जाती हैं और बेहतर पैदावार नहीं मिलती है।

डॉ. रविंद्र कुमार वर्मा

उप निदेशक कृषि (विस्तार)

किसान के खेत की मिट्टी खराब थी। उसकी मिट्टी पर ई.सी. की मात्रा करीब ढाई गुना ज्यादा थी। इस मिट्टी से अच्छी पैदावार लेना संभव नहीं था। उसने जो नवाचार किया उसे अन्य किसान भी प्रेरणा लेकर काम कर रहे हैं।

डॉ. आर. एस. पटोदिया 

अध्यक्ष के.वी.के., राजसमंद

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अब नए नवाचार की तैयारी:-

इस बार किसान एक और नवाचार करने जा रहा है। इस बार भी ग्रीन हाउस में तुरई की पैदावार ले रहे हैं। ग्रीन हाउस में पौधे उगाने के लिए उन्होंने इस बार जमीन पर प्लास्टिक शीट बिछाई है, जिस पर मिट्टी डालकर वह फसल ले रहे हैं। किसान को अभी तक के प्रयासों में सफलता भी मिली है।

प्रस्तुति:-

अश्विनी प्रतापसिंह

राजसमंद

स्रोत:-

राजस्थान पत्रिका एग्रोटेक

गुरुवार 19 जुलाई  2018

Emai – agro.patrika@in.patrika.com

Website – राजस्थान पत्रिका

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