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पिपलांत्री लाइव – एक आदर्श मॉडल गांव

पिपलांत्री
Written by bheru lal gaderi

एक यात्रा संस्मरण – Rakesh Dudey 

 

राजस्थान के जिले राजसमंद का एक ऐसा गांव पिपलांत्री दुर्गम पहाड़ों के ऊपर बसा है, जिस गांव के बीचों-बीच मार्बल की खदानें चट्टानों से भरा हुआ मिट्टी का नामोनिशान नहीं एक जबरदस्त इच्छा शक्ति और अपने आप को बदलने का जुनून की ऐसी कहानी कह रहा है। जिसे देखकर महसूस कर कर मैं विस्मृत हूं, आश्चर्यचकित हूं यह वही गांव है जो एक एक बूंद  पानी के लिए साल भर साल भर तरसता रहता था। परंतु एक ऐसे व्यक्तित्व एक ऐसी शख्सियत  ने इस गांव की दशा को स्वर्ग से बढ़कर बना दिया।

पिपलांत्री

मेरे राजस्थान संस्मरण में यदि इस गांव का उल्लेख ना किया जाए तो मेरा यह यात्रा अधूरी है। जी हाँ इस गांव के पूर्व सरपंच “श्री श्यामसुंदर पालीवाल जी” ने इस गांव  में जल ग्रहण मिशन, पौधरोपण और पौध संरक्षण, बेटी- बचाओ पर अनुकरणीय और शायद भारत देश में पहला ऐसा उदाहरण पेश किया है जो हमारे लिए एक मिसाल है।

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गांव की बेटियां पेड़ों को राखी बांधती है।

बात करते हुए पालीवाल जी बोलते हैं कि उन्हें जल, जंगल ,जमीन ,बेटी के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया है। आपने शायद कभी सुना हो तो यह वही गांव है, जहां पर गांव की बेटियां पेड़ों को राखी बांधती है। यह वही गांव है जहां पर चट्टानें ही चट्टानें हैं, मिट्टी का नामोनिशान नहीं उन चट्टानों की दरारों में जिस तरह पालीवाल जी और गांव की महिलाओं और बेटियों ने पेड़ पौधों को लगाया और उनका सरंक्षण किया। आश्चर्य की पराकाष्ठा है।

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जल ग्रहण मिशन

जल ग्रहण मिशन मिशन का आलम तो यह है कि अभी फरवरी के महीने में जब हम तराई वाले क्षेत्रों में जल स्तर के गिर जाने से जूझ रहे है। वही पिपलांत्री मैं चट्टानों की दरारों से आज भी पानी रिस रहा है। 20 साल में हमारे सतपुड़ा और विंध्याचल के जंगलों को अरावली के पहाड़ियों में मानव निर्मित जंगलों ने पीछे छोड़ दिया है। जिन पेड़ों को मां ने राखी बांधी थी कल तक, आज बेटियां राखी बांध रही है और आज उस घर की बहू राखी बांध रही है।

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कहानियां की पुस्तकों वाला गांव – पिपलांत्री

देखकर आश्चर्यचकित हो जाता हूं कि क्या जो कहानियां हम पुस्तकों में पढ़ रहे थे, tv में देखते थे, क्या यह वाकई वास्तव में कहीं पर वास्तविक जिंदगी में भी चल रही हैं? और इतने शानदार तरीके से चल रही है। कुछ फोटोग्राफ्स जो वहां पर हमने इस शानदार कार्य के लिए है। वह आपके सामने रख रहा हूं आप खुद देखें की इच्छा शक्ति के सामने हर बड़ी से बड़ी बात भी छोटी है।

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बच्ची के जन्म पर 30000 रु. का फिक्स-डिपॉजिट

यह वही गांव है जहां पर एक बेटी के पैदा होने पर उसी दिन उस गांव के सभी लोग मिल कर ₹30000 की फिक्स डिपॉजिट कर देते हैै।

एलोवेरा की खेती 

गांव की महिलाओं के जूनून के आगे प्रकृति ने भी घुटने टेक दिए। जिन्होंने अपनी जीवटता से पत्थरों के सीने में भी एलोवेरा के सैकड़ों एकड़ के जंगल खड़े कर दिए। जहां से प्रतिवर्ष लाखों टन एलोवेरा निकाला जा रहा है। गांव के लोगों द्वारा गांव के लोगों के लिए, गांव के मजदूर वर्ग का पलायन पूरी तरह बंद हो गया है। उन्हें घर पर ही रोजगार पर्याप्त पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। यू कुछ कहें की पिलांत्री एक अपने आप में एक मोडल नहीं वरन पिपलांत्री तो अपने आप में एकगाथा है, उन लोगों के लिए एक मार्गदर्शक, पथ प्रदर्शक है जो जिंदगी में बिना किसी सहायता बिना किसी पद पर रहते हुए सामाजिक और नैतिक कार्य करना चाहते है।

पिपलांत्री

बहुत अभिभूत होकर लौटा हूं, पालीवाल जी के इस कार्य से और यह काम हम लोगों के और दुनिया के बीच में लेकर आए चिश्ती जी मैं दोनों का बहुत आभारी हूं कि मुझे एक एक विस्मृत कर देने वाले अनुभव से रूबरू करवाया।

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इन वीडियो में देखिये पिपलांत्री गांव के बारे में सम्पूर्ण जानकारी।

YouTube पर पिपलांत्री के गौरव गाथा से वीडियोस भरे पड़े।

बहुत-बहुत धन्यवाद।।

स्रोत:-

Rakesh Dubey ji की फेसबुक वाल से

पिपलांत्री

 

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