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पशुओं में पाचन संबंधी रोग, लक्षण एवं प्राथमिक उपचार

पाचन
Written by bheru lal gaderi

भारत एक कृषि प्रधान देश होने के साथ ही पशुधन में भी प्रथम स्थान रखता है। पशुओं की देखभाल में पशुपालकों को अनेक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। पशुपालकों को पशु स्वास्थ्य का प्रारंभिक ज्ञान होना अति आवश्यक है। जिससे उनमें होने वाले साधारण रोगों को पशुपालक समझ सके और उनका उचित उपचार किया जा सके। डेयरी गाय पौष्टिक दुग्ध का उत्पादन कर मानव के भोजन में महत्वपूर्ण योगदान देती है। पशुओं को होेने वाले सभी रोगों में पाचन संबंधी रोग प्रायः होते है।

पाचन

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जब रूमेन सही तरीके से काम नहीं कर पाता तो जानवरों में इसके कारण पाचन संबंधी रोग जैसे- हाजमा खराब होना, अफरा आदि उत्पन्न करती है। फलतः उत्पादन क्षमता पर भी बुरा प्रभाव पड़ता है। पाचन संबंधी समस्या सीधे डेयरी फार्म की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है। अतः दुधारू पशुओं की सामान्य शारीरिक क्रिया एवं उत्पादन क्षमता में तालमेल बनाये रखने के लिए उनके भोजन एवं प्रबंधन में पर्याप्त ध्यान देने की आवश्यकता होती है।

पशुओं में साधारणतया पाचन सम्बन्धी होने वाले प्रमुख रोग, लक्षण एवं उपचार निम्नलिखित है।

आफरा (Tympany):-

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कारण:-

  • अधिक गीला और फलीदार हरा चारा खाने से।
  • दूषित आहार (सड़ा-गला)।
  • आहार में प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट का होना।
  • पशुओं में अचानक परिवर्तन।

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लक्ष्मण:-

  • रुमेन (पेट) में गैस बनने से बाएं तरफ का पेट फूलना।
  • इस हिस्से पर अंगुली से मारने पर ढोल जैसी आवाज आना
  • रुमेन (पेट) में गैस होने से पशु बेचैन हो जाता है तथा सांस लेने में कठिनाई अनुभव करता है।
  • पशु की आंखें और शिखाये उभरी हुई सी प्रतीत होती है।
  • समय पर निदान न होने से शीघ्र मृत्यु हो जाती है।

रोकथाम:- 

  • हरे चारे को कुट्टी कर सूखे चारे (भूसा/कुट्टी)  के साथ मिलाकर खिलाएं।
  • दूषित खल, चूरी का आहार नहीं खिलाये।

प्राथमिक उपचार:-

  • 5 ग्राम हींग, 60 ग्राम तारपीन का तेल, 300 ग्राम अलसी का तेल मिलाकर एक खुराक पिलाएं।
  • अधिक तीर्व अवस्था में बाई तरफ कोख में बीचों बिच लम्बी मोती इंजेक्शन की सुई से गैस निकालते रहे व पशु चिकित्सक से समरक कर उपचार कराएं।

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रुमेन गुम्ब होना (Impaction of Rumen):-

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कारण:-

  • अधिक सूखे कड़े तथा लंबे चारे खाने से रुमेन तनकर गुम्ब बन जाता है।
  • रुमेन में पानी व दीवालों में संकुचन का अभाव।

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लक्षण:-

  • पशु चारा खाना तथा जुगाली करना बंद कर देता है व बेचैन हो जाता है।
  • बाइकोख (रुमेन) तानी हुई दिखाई देती हैं।
  • पीने के पानी की व्यवस्था इस तरह रखे की पशु अपनी इच्छा अनुसार जब चाहे पानी पी सके।
  •  सूखे चारे में हरा चारा मिलाकर खिलाएं

प्राथमिक उपचार:-

150 ग्राम मेग सेल्फ, 150 ग्राम सोडा, 50 ग्राम निम्बू का सत, गुनगुना पानी आवश्यकतानुसार। सबको मिलाकर एक खुराक पशु को पिलायें।

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अजीर्ण (Indigestin):-

कारण:-

  • अनियमित एवं दूषित आहार।
  • पेट में परजीवी कीड़ों का होना।
  • आहार में दाना-बांटा अधिक होना।

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लक्षण:-

  • खाने में अरुचि, भूख न लगना।
  • जुगाली बंद करना, दांत पीसना।
  • सूखा, सख्त व थोड़ा-थोड़ा गोबर करना, पेट दर्द।
  • गोबर में अनपचे पदार्थ निकलना।
  • खाल खुरदरी व रोंगटे फटे हुए दिखाई देते हैं।
  • कीड़ो की वजह से बदबूदार गोबर।

रोकथाम:-

  • पशु को खिलाने में विशेष ध्यान रखें कि खुराक में अधिक सुखा तथा रेशे वाला चारा न हो।
  • वर्ष में काम से काम दो बार परजीवी निष्क्रमण करना चाहिए।

प्राथमिक उपचार:-

150 ग्राम मेग सेल्फ, 150 ग्राम सोडा, 50 ग्राम निम्बू का सत, गुनगुना पानी आवश्यकतानुसार। सबको मिलाकर एक खुराक पशु को पिलायें। यदि अजीर्ण नहीं मिटे तो पशुचिकित्सक की सलाह से उपचार कराऐं।

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प्रस्तुति:-

डॉ. पी.के. मल्होत्रा

प्रभारी, पशु स्वास्थ्य एवं उत्पादन अनुसन्धान केंद्र,

जयपुर

स्रोत:-

कृषि भारती

वर्ष 8, अंक 08, जयपुर, 16 मई 2018

Mob.- 09983353511

Email- krishibharti@gmail.com

 

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