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पर्यावरण प्रेमी राम जी व्यास जोधपुर के शेर दिल

पर्यावरण प्रेमी राम जी व्यास
Written by bheru lal gaderi

प्रकृति जिसका मन मोह लेती है उसकी जिंदगी प्रकृति में ही रच बस जाती हैं। जोधपुर नगर निगम के कर्मचारी होते हुए भी राम जी व्यास ने गांवों की व्यथा को समझा है और पिछले 35 सालों से जोधपुर की पहाड़ी वनभूमियों को अतिक्रमण से बचाते हुए पौधारोपण कर रहे हैं। राम जी का मानना है कि शहर आखिर गावों जंगलों पर ही टिके है। अगर वन नहीं बचा तो जीवन भी नहीं बचेगा। वनग्राम उजड़कर सिर्फ जीवन संग्राम पीछे रह जाएगा। मारवाड़ राजघराने ने जनता की आवश्यकता को समझते हुए किसी समय वनखंडों को सुरक्षित रखने के लिए प्रयास किए थे। लेकिन आज स्थानीय और केंद्रीय शासकीय कर्मचारियों अधिकारियों की दूरदर्शिता के कारण वनखंड खंड-खंड होकर अतिक्रमण का शिकार होते जा रहे हैं। राम जी जैसे पर्यावरण प्रेमी के लिए यह सब असहनीय हुआ जो सन 1982 से ही सरकारी आवास योजनाओं की खामियों के खिलाफ लड़ रहे हैं।

बार-बार सरकारी विभागों एवं अतिक्रमणों के खिलाफ लड़ रहे है।  रामजी बारंबार सरकारी विभागों एवं अतिक्रमणो के खिलाफ कोर्ट में फ़ाइलें रखते हुए मानों खुद ही एक ‘वकील’ बन चुके हैं। उनको यहां के पूरे वनक्षेत्र की भूमि के खसरा नंबर, नाम, रास्तों, मंदिरों, पुजारियों समेत अब तक हुए मुकदमों की तारीखें, पत्र-आदेश नंबर माय  दिनांकों के आज भी चुटकियों पर याद है लेकिन इस वन को बचाने वाले रामजी के जीवन को भी खतरा है। राम जी की जनकल्याण भावना को देखते हुए पूर्व महाराजा गजसिंह जी ने ‘आध्यात्मिक क्षेत्र पर्यावरण संस्थान’ के इस मुखिया को अपना संरक्षण प्रदान किया है। पढ़िए, पर्यावरण प्रेमी की सफलता की कहानी, उन्हीं के शब्दों में।

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पर्यावरण प्रेमी राम जी व्यास की कहानी

मेरी आदत है कि जहां कहीं भी पर्यावरण से खिलवाड़ होते देखता हूं, पहले अपने तरीके से समझाता हूं,  बात बनी तो ठीक नहीं तो जनहित में याचिका दायर कर देता हूं। आप माने ना माने, अब तक चार बार हाईकोर्ट में रीट कर चुका हूं और हर बार जीत हुई है। पर्यावरण के क्षेत्र में वर्ष 1981 से हूं, जब वनखंड भूतेश्वर ब्लॉक में यूआईटी अवैध रूप से आवासीय योजना बना रही थी। तब मैंने जनहित में याचिका दायर करते हुए उसे स्थगित करवाया। समूचे पश्चिमी राजस्थान में 2,48000 से भी ज्यादा वन भूमि बचाकर ने राष्ट्र को सौंप अपना कर्तव्य निभाया।

आज जोधपुर में वन भूमि पर करीब-करीब 15000 कब्जे है, जिसमें 8 वनखंडेश्वर भूतेश्वर ब्लॉक, लाल सागर, बड़ा भाखर, व्यास की बावड़ी, देवकुंड इत्यादि है।

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आज वनों की कटाई के साथ-साथ पहाड़ों का भी अवैध खनन हो रहा है। अवैध खनन के कारण हमारे परंपरागत जल स्त्रोत बर्बाद हो रहे हैं। इन जल स्त्रोतों का संरक्षण किया जाए तो बरसात के देर से आने की दिशा में हम इनका प्रयोग कर सकते हैं। आज जोधपुर में बेरीगंगा वनखंड है, जो 1962 से वनखंड के रूप में चला आ रहा है। इसमें होने वाले अवैध खनन को लेकर मैंने हाईकोर्ट में रिट की, 15 दिसंबर, 2012 को इस मामले में मेरे हक में फैसला हुआ। फलस्वरुप मगजी की घाटी, पुराना किला,

गऊ घाटी और ब्राह्मणों का टाका में अवैध रूप से चल रही है 121 खानों को हाईकोर्ट के स्टे के बाद बंद कर दिया गया।

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सम्पर्क कर सकते हैं-
चौपासनी मंदिर के पास,
सुन्दर बालाजी के सामने, गली नं. 5
जोधपुर (राजस्थान)
मो.नं. 09521628424

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