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निराई-गुड़ाई यंत्र एवं उनका उपयोग

निराई-गुड़ाई यंत्र एवं उनका उपयोग
Written by bheru lal gaderi

खरपतवार आधुनिक युग की एक प्रमुख समस्या है, जो फसलों की उपज को अत्यधिक हानि पहुंचाती हैं। खरपतवार के द्वारा उपज में यह कमी भोजन, जल, स्थान एवं प्रकाश आदि के लिए फसलों में प्रतिस्पर्धा के कारण होती हैं। साथ ही साथ खरपतवार फसलों के लिए हानिकारक रोग एवं कीटों को को आश्रय देखकर भी अप्रत्यक्ष रूप से हानि पहुंचाते हैं। अतः खरपतवारों का समुचित नियंत्रण सही समय पर होना आवश्यक है। खरपतवार नियंत्रण हेतु चूँकि पारंपरिक तरीके जैसे हाथों से निंदाई (निराई-गुड़ाई), खुरपी, हेण्ड हो, छोटी कुदाली आदि अन्य निराई-गुड़ाई यंत्र उपयोग में लाए जा रहे हैं।

निराई-गुड़ाई यंत्र एवं उनका उपयोग

परंतु इसमें अधिक समय लगता है एवं उसी अनुपात में मजदूरों की संख्या बढ़ने से मजदूरी लागत बढ़ती जाती है। इस प्रकार से आज खरपतवारनाशक दवाइयों का भी प्रचलन खरपतवार नियंत्रण में बढ़ रहा है तथा उनका बहुतायत से इस्तेमाल किया जा रहा है, जो काफी हद तक इस समस्या से छुटकारा दिला रहा है। परंतु इन दवाइयों के अधिक दाम, बाजार में अनुपलब्धता एवं इन दवाइयों के इस्तेमाल की उचित विधि किसानों का ना मालूम होने के कारण यह तरीका भी लाभदायक साबित नहीं हो रहा है। साथ ही दवाइयों के जहर युक्त होने के कारण मानव और पशु स्वास्थ्य एवं मिट्टी के लिए भी हानिकारक हो सकती हैं।

उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए आज कई उन्नत निराई-गुड़ाई  यंत्र विशेषतः धान की फसल हेतु

विभिन्न अनुसन्धान संस्थानों में विकसित किए गए हैं, जो की बाजार एवं कृषि अभियांत्रिकी संचनालयों में किसानों हेतु उपलब्ध है।

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उन्नत निराई-गुड़ाई यंत्र

मानव चलित निराई-गुड़ाई

इस वर्ग में किसानों मजदूरों द्वारा हाथ से चलाने वाले यंत्र आते हैं। यह यंत्र छोटे किसानों द्वारा छोटे जोत वाले खेतों में बहुतायत से प्रयोग किए जाते हैं अतः उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए कृषि यंत्र उन्नत किए गए हैं, जो हल्के हो चलाने में आरामदायक हो और जिनकी निर्माण लागत भी कम हो, इस श्रेणी के यंत्र है।

हेण्ड हो

इसमें लंबा लकड़ी का हत्था फाल से जुड़ा होता है। फल का आकार विभिन्न रूप में आवश्यकता अनुसार कृषि कार्य हेतु रखा जाता है। जैसे इकहरी नोकदार शावेल, माला, सहस, शावेल, प्रसर्पी फल (स्वीप) वगैरह।  हाथे की लंबाई क्षेत्र विशेष कर किसानों, मजदूरों के शरीर की संरचना (विशेषता लंबाई) को ध्यान में रखते हुए रखा जाता है। यह यंत्र खड़ी फसल में निराई-गुड़ाई हेतु उपयोगी हैं। इस यंत्र की कार्य क्षमता 0.045% हेक्टेयर/ दिन/ मजदूर होती है।

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पहिये वाला (व्हील हो) 

यह भी कतार युक्त खड़ी फसल में खरपतवार उखाड़ने एवं मिट्टी की गुड़ाई हेतु उपयोगी यंत्र हैं। पहिया, लोहे की चौड़ी पतली पट्टी का बना होता है, जो खेत में चलने में सहायता प्रदान करता है। चालक हैंडल को (गोल पतली लकड़ी या लोहे के पाइप का बना) पकड़ कर यंत्र को आगे पीछे करके चलाता है। हेंडल की लंबाई पर ऊपर दिए हैंडल के अनुसार रखी जाती है। जो कि आदमी के कंधे तक की लंबाई का 80% होता है। इस यंत्र में इकहरा नोकदार शावेल या अन्य शावेल के पीछे लगाया जाता है। ब्लेड की लंबाई को नट बोल्ट द्वारा कम या ज्यादा किया जा सकता है। यंत्र की कार्य क्षमता 0.0125 से 0.0165 हेक्टेयर/ घंटा/ मजदूर होती है।

व्ही- ब्लेड व्हील हैंड हो

इस यंत्र में सामने की तरफ दो छोटे पहिए लगे होते हैं, जिनके पीछे “वि” आकार का ब्लेड लगा होता है जिसे आवश्यकतानुसार नट बोल्ट या क्लेम्प की सहायता से विभिन्न गहराई में कार्य करने हेतु एडजस्ट कर सकते हैं। यह यंत्र सूखी जमीन में निराई- गुड़ाई हेतु प्रयोग में लाया जाता है।

रोटरी पैगवीडर

इस यंत्र का मुख्य भाग एक ड्रम जैसा होता है, जिसमें खूंटी लगी रहती है ड्रम के पास लगा ब्लेड खरपतवार उखाड़ने में सहायक होता है। चूँकि मिट्टी काम करते समय पलटती नहीं, अतः मिट्टी में नमी सुरक्षित रहती है। यंत्र का ढांचा तथा हैंडल लोहे के पाए के बने होते हैं। यंत्र को आगे पीछे करके चलाया जाता है। ऊपर दिए अन्य यंत्र के समान आवश्यकतानुसार रखी जाती है।

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पशु चलित यंत्र

इस वर्ग में ऐसे निराई- गुड़ाई यंत्र आते हैं, जो कि बैल चालित हो। कुछ स्थानों पर अन्य जानवरों का उपयोग किया जाता है, ऐसे में यंत्रों के डिजाइन में हल्का फेरबदल किया जाता है। इन श्रेणी में निम्न यंत्र है:

अंबिका पैडी वीडर

इस यंत्र में ऊपर दिए रोटरी पेग वीडर के समान ही विकसित यंत्र होता है। इसमें खूंटी लगे ड्रम की जगह लोहे की चादर को नुकीले (वी वी वी) रूप में काटकर चार-छः  चादरों (ब्लेड ) की गोलाई में वेल्ड कर दिया जाता हैं। इसकी कार्य क्षमता 0.012 हेक्टेयर प्रति घंटा होती है।

जापानी पैडी वियर (ताऊची)

यह भी उपरोक्तानुसार ही समान यंत्र है, इसमें निराई- गुड़ाई हेतु एक ही जगह दो दांतेदार गोलाई में जुड़े हुए ड्रम इस्तेमाल किए जाते हैं। इस यंत्र की कार्य क्षमता 0.011 के प्रति घंटा होती है। उपरोक्त सभी यंत्र 20 सेमी के अंतराल में की गई कतार में बोई गई फसलों हेतु उपयुक्त हैं। अंबिका तथा जापानी वीडर के उपयोग हेतु खेत में 5- 10 से.मी. पानी का होना आवश्यक है।

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देशी हल

यह लकड़ी का बना होता है और इसके निचले हिस्से की बनावट नुकीली और पतली रखी जाती है। सामान्यतः जुलाई में प्रयुक्त हल से यह काफी हल्का एवं संपूर्ण बनावट में पतला होता है। यह भी धान के कतार में बोई जाने वाली फसलों में निराई- गुड़ाई हेतु उपयुक्त है। छिड़काव वाले खेतों में बियासी करने के लिए उपयुक्त पाया जाता है। इस हल की कार्य क्षमता 0.06 प्रति घंटा होती है।

उन्नत कल्टीवेटर

यह मुख्यता लोहे एवं इस्पात के बने होते हैं। इसमें ३-5 कांटे (टाइन) एक प्रेम में लगे होते हैं। प्रत्येक टाइन में निचले सिरे में एक इकहरे या दोहरे नोक वाले शावेल लगे होते हैं। ये भी कतार में बोई जाने वाली फसलों के लिए निराई- गुड़ाई हेतु उपयुक्त होते हैं, जिस हेतु प्रत्येक लाइन के बीच की दूरी 20 से.मी. रखी जाती है।

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प्रस्तुति

नरेश कुमार शर्मा, संपतलाल मून्दड़ा, बाबूलाल धायल,

राजस्थान कृषि महाविद्यालय, उदयपुर (राज.)

सभार

विश्व कृषि संचार

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