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नवीनतम सोयाबीन किस्म जे.एस. 2098

सोयाबीन किस्म जे.एस. 20-98
Written by bheru lal gaderi

जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय (जेएनकेवीवी) मध्य प्रदेश द्वारा स्वस्थ विकल्प के रूप में पुरानी सोयाबीन किस्मों के श्रेष्ठ विकल्प के रूप में किसानों की आवश्यकता एवं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए निरंतर संघर्ष के पश्चात् सोयाबीन की नवीनतम किस्म जे.एस. 2098 जारी की है, सोयाबीन की यह बोनी किस्म मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, बुंदेलखंड, मराठवाडा एवं विदर्भ क्षेत्र हेतु अनुशंसित की गई हैं।

सोयाबीन किस्म जे.एस. 20-98

सोयाबीन की यह नवीन किस्म जे.एस. 335 से पहले व सोयाबीन जे.एस. 93- 05 के लगभग पककर तैयार हो जावेगी। हल्की सामान्य एवं भारी जमीनों में तथा सामान्य एवं विपरीत परिस्थितियों एवं मौसम में भी इस किस्म में अत्यधिक उत्पादन देने की अदभुद क्षमता इस किस्म में देखी गई है।

उत्तम अंकुरण क्षमता एवं पौधे में फैलाव कि अनुकूल स्थितियां होने के कारण 75 किलो प्रति हेक्टेयर बीज रखने एवं 14 से 16 इंच कतार से कतार की दूरी रखने पर आदर्श परिणाम। मजदूरों की समस्याओं व मौसम की अनिश्चितता के कारण किस्म ऊंचाई ठीक होने के कारण हार्वेस्टर से कटाई हेतु भी उपयुक्त किस्म है। पूर्व में प्रचलित सोयाबीन किस्मों में कीट- व्याधि का अत्यधिक प्रकोप तथा उत्पादन एवं गुणवत्ता में लगातार आ रही गिरावट/कमी को देखते हुए सोयाबीन की यह नवीनतम किस्म जे.एस. 2098 सोयाबीन की पुरानी किस्मों को विस्थापित कर उत्पादन एवं गुणवत्ता के नए मानदंड एवं आयाम बनाकर किसानों के लिए एक आदर्श सोयाबीन किस्म का विकल्प बनकर शीघ्र प्रस्थापित हो जाएगी।

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जे.एस. 2098 के प्रमुख गुण 

दाने का आकार गोलाकार, मध्यम (बोल्ड) 100 दानों का वजन 10.2 ग्राम, दानें का प्रकार पीला, चमकदार, नाभिका (हायलम) काला, अंकुरण क्षमता 80 से 90%, पौधे का प्रकार मध्य ऊँची किस्म, ऊंचाई लगभग 46 से 55 सेमी, अर्ध परिमिति (सेमी डिटरमीनेट) यानि सीधा मध्यम फैलाव वाला पौधा (सेमी इरेक्टर), पत्ती का रंग हरा, पत्ती का आकार तिखरी-सकरी, फलिया रोयेंदार (चिकनी नहीं) रोए एवं फली का रंग भूरा, आधे फुलाने की अवधि लगभग 40 से 42 दिवस, फूलों का रंग सफेद, दो से तीन दाने की फलिया, फलिया चटकने की समस्या नहीं,

आदर्श पौध संख्या 4 लाख पौधे प्रति हेक्टेयर, फसल की अवधि लगभग 94 दिवस, दानों में तेल की मात्रा 19.30%, प्रोटीन क्षमता 40.9%, अधिकतम उत्पादन क्षमता व्यवहारिक तरीकों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार 25-30 क्विंटल प्रति हेक्टेयर एवं उससे भी अधिक, आदर्श परिस्थितियों में एक बायोटिक स्ट्रेस जैसे पीला मोजेक वायरस, चारकोल्स रॉट, ब्लाइट, बेक्टेरियल पाश्चुल, लिफ़ स्पॉट बीमारियों के लिए जड़तंत्र के कारण अधिक वर्षा की स्थिति में जड़ सड़न संबंधी बीमारियों के लिए प्रतिरोधी किस्म एवं स्टेम बोरर, स्टेम फ्लाय एवं अन्य कीटों के प्रति सहनशीलता के गुण के कारण कृषक इन नवीन किस्म को लगाने हेतु निश्चित ही आकर्षित होंगे।

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प्रस्तुति

प्रदीप खड़ीकर, वसुंधरा सीड्स, उज्जैन (मध्य प्रदेश)

मो.- 9301606161

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