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नवजात बछड़े के लिए खिस का महत्व एवं लाभ

Written by Vijay dhangar

 नवजात बछड़े के लिए खिस का महत्व

बछड़े पशुधन उद्योग के स्तंभ होते हैं। इसका प्रबंधन डेयरी क्षेत्र के विकास, अच्छी गुणवत्ता वाले जर्मप्लाज्म को बनाए रखना और संरक्षित करने के लिए बहुत ही आवश्यक है। एक अच्छे प्रबंधन वाले डेरी फार्म पर आदर्श रूप से 0.5 से 0.7 किलोग्राम प्रतिदिन की वृद्धि दर के साथ बछड़े की मृत्यु दर 5% से कम होनी चाहिए। खिस नवजात बछड़े के स्वास्थ्य और अस्तित्व को निर्धारित करने में सबसे महत्वपूर्ण कारक है। बच्चा जब पैदा होता है तो उसके रक्त में कोई भी एंटीबॉडी नहीं पाई जाती है. इसलिए बछड़े में प्रतिरक्षा केवल खिस ग्रहण करने के बाद ही प्राप्त होती है। कुछ अहम कारक हैं, जो बछड़ो द्वारा एंटीबॉडी के अवशोषण को प्रभावित करते हैं। जैसे, एंटीबॉडी की सांद्रता, खिस पिलाने का समय और विधि।

नवजात बछड़े की देखभाल

बछड़े को साफ करना नवजात के जन्म के तुरंत बाद उसके शरीर पर लगे श्लेष्म को हटा दें और टाट बेग के साथ रगड़कर बछड़े के शरीर को सुखाएं। जिससे बछड़े के रक्त परिसंचरण में सुधार होता हैं।

नासा मार्ग को साफ करना

गाय के गर्भाशय से नवजात का धड़ बाहर आने के तुरंत बाद हाथ अथवा सक्शन डिवाइस के द्वारा मुंह और नाक में भरे तरल पदार्थ को साफ करना चाहिए। ताकि, नवजात बछड़े को सांस लेने में कठिनाई नहीं हो।

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सांस लेने के लिए उत्तेजित करना

नवजात का 30 सेकंड के भीतर सक्रिय श्वास शुरू हो जाना चाहिए। यदि नवजात सक्रिय श्वास लेने की स्थिति में नहीं होता है तो फिर लकड़ी के तिनके अथवा उंगली से नाक के अंदर गुदगुदी करें अथवा नाक के सेप्टम को दबाएं। ताकि, नवजात को छींक आए और श्वसन क्रिया चालू हो जाए।

नाल अथवा नाभि की देखभाल

नवजात के जन्म के बाद नाल को शरीर से दो से तीन सिमी दूरी पर एक जीवाणु रहित धागे से बांधे और बांधने के 1 से.मी. दूरी पर नाल को जीवाणु रहित ब्लेड से काट देना चाहिए। इसके बाद जहां से नाल को काटा है उस जगह को जीवाणु रहित गोल (क्लोरहेक्साडिनया 7% आयोडीन) में एक बार डुबाना चाहिए। ताकि बछड़े में नाभी पकना अथवा नाभी में होने वाले संक्रमण से बचाया जा सके।

नवजात को खिस पिलाना

खिस को नवजात के लिए तरल सोने के रूप में माना जाता है।  क्योंकि, इसमें मात्र एंटीबॉडी होती है। जो जीवन के शुरुआती हिस्से में नवजात को रोग से बचाने में मदद करती है। यह बच्चा देने के तुरंत बाद मां द्वारा उत्पादित पीले रंग का एक पोषक तत्व युक्त द्रव होता है जो कई महत्वपूर्ण पदार्थ जैसे इम्युनोग्लोबुलिन, लेक्टोफेरिन, प्रोलाइन अमीनो अम्ल, पॉलीपेप्टाइड, साइटोकींस और विटामिन से भरा हुआ होता है। बछड़े के जीवन के पहले 24 घंटों के दौरान यह अपनी छोटी आंतों के माध्यम से सभी एंटीबॉडी को अवशोषित कर सकता है। इसलिए जितना जल्दी हो सके बछड़े को खिस पिला दिया जाना चाहिए।

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खिस पिलाने का तरीका

प्राकृतिक

यह एक पारंपरिक विधि है। इस विधि में अपनी मां के थनों से सीधा खिस ग्रहण करता है। इसमें खिस की मात्रा को मापा नहीं जा सकता है और खिस रोग संचरण की संभावना हो सकती है।

बोतल द्वारा खिस पिलाना

यह विधि बछड़े को प्राकृतिक चूसने वाली संतुष्टि प्रदान करती है। शोध के दौरान यह पाया गया कि बछड़ों को थोड़ी मात्रा में बोतल द्वारा खिस पिलाया जाने के परिणामस्वरुप अवशोषण और उच्च एंटीबॉडी एलजीजी स्तर में सुधार होता है। लेकिन, बछड़ों को अधिक मात्रा में खिस पिलाने पर अवशोषण अथवा एलजीजी स्तर की दक्षता प्रभावित नहीं होती है।

पेल फीडिंग

खाने की विधि में बछड़ों को प्रशिक्षण की आवश्यकता होती है। लेकिन, एक बार प्रशिक्षित होने के बाद प्रबंधन सरल हो जाता है। इस विधि द्वारा खिस वजन करके बच्चों को पिलाया जाता है। प्रदूषण की संभावना अधिक होती है।

खिस और दूध में एंटीबॉडी का स्तर

घटकएंटीबॉडी 1gG1 (ग्राम/लीटर)एंटीबॉडी 1gG2 (ग्राम/लीटर)एंटी बॉडी 1gM (ग्राम/लीटर)एंटीबॉडी 1gA (ग्राम/लीटर)
खिस75.001.904.904.40
दूध (लार्सन एंड राय-1980)0.350.060.040.05

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कोलोस्ट्रम और दूध की विशिष्ट संरचना

घटकखिसदूध
सॉलि़ड%23.912.9
प्रोटीन%14.03.1
एंटीबॉडी एलजीजी (मिग्रा./मिली)48.00.6
वसा%6.74.0
लेक्टोज%2.75.0
खनिज%1.10.7
विटामिन ए (यूजी/डीएल)295.034.0
विशिष्ट ग्रेविटी (Foley et al 1978)1.0561.032

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खिस पिलाने के सिद्धांत

गुणवत्ता उच्च गुणवत्ता खिस

एंटीबॉडी 1gG> 50 ग्राम/लीटर

मात्राशरीर के वजन का 10 से 12%
जल्दी सेजितनी जल्दी हो सके 12 घंटे के भीतर दो भजन

खिस की गुणवत्ता

खीस की गुणवत्ता दो कारकों पर निर्भर करती है। एंटीबॉडी सांद्रता (विशेष रूप से एंटीबॉडी 1gG) बैक्टीरिया की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति।

खीस गुणवत्ता आमतौर पर एंटीबॉडी 1gG के संदर्भ में व्यक्त की जाती हैं।

खराब गुणवत्ता 20 ग्राम/लीटर

मध्यम गुणवत्ता20-50 ग्राम/लीटर

उत्कृष्ट गुणवत्ता- 50 ग्राम/लीटर

40 दिन शुष्ककाल वाली गाय में खिस का उत्पादन 60 दिन शुष्क काल वाली गाय की तुलना में 2.2 किलोग्राम कम पैदा होता है।

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खिस की मात्रा

बछड़ों को पिलाया जाने वाले खिस की मात्रा उनके शरीर के वजन पर निर्भर करती हैं। नवजात को पहले 4 से 5 दिनों के लिए शरीर के वजन का 1/10 भाग की दर से खिस पिलाना चाहिए। यदि पहले 24 घंटों में बछड़े को पर्याप्त मात्रा में खिस मिलता है तो इन बछड़ों में पर्याप्त मात्रा में खिस सेवन करने वाले बछड़ों की तुलना में बीमार और मरने की संभावना अधिक होती है। शोध में सामने आया है कि जो बछड़े पहले 24 घंटों में अपर्याप्त खिस का सेवन करते हैं उनकी पर्याप्त खिस का सेवन करने वाले बछड़ों की तुलना में बीमार होने की संभावना 9 गुना अधिक होती है और मरने की संभावना 5 गुना अधिक होती है।

खिस पिलाने का समय

खिस पिलाने का समय महत्वपूर्ण है। क्योंकि, आंत की प्रोटीन के बड़े अणुओं को अवशोषित करने की क्षमता कम समय के लिए होती हैं। आंतों के उपकला में एंटीबॉडी 1gG को अवशोषित करने की क्षमता जन्म के बाद तेजी से कम हो जाती हैं और लगभग 24 घंटे की उम्र में समाप्त हो जाती है। आंतों की दीवार में एंटीबॉडी का अवशोषण जीवन के पहले 1-2 घंटों के दौरान बहुत तेज होता है. इसलिए लगभग 15 से 30 मिनट में खिस को पिलाया जाना उपयोगी होता है। इसके बाद लगभग 10 घंटे में दूसरी खुराक पिलानी चाहिए। इस प्रकार से अगर पहले खिस के सेवन से 30 मिनट की देरी होने पर खिस में एंटीबॉडी 1gG की मात्रा में लगभग 2 मिग्रा/मिली तक की कमी आती है।

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