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नर्सरी में प्रो ट्रे तकनीक से तैयार करें सब्जियों की पौध

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Written by bheru lal gaderi

काश्तकार अब परम्परागत फसल के साथ सब्जी उत्पादन पर भी ध्यान देने लगे हैं। सब्जी उत्पादन अधिक हो, इसके लिए नर्सरी में प्रो ट्रे जैसी आधुनिक प्रणालियों से तैयार पौध का रोपण किया जाने लगा हैं। किसानों को इसके अच्छे परिणाम भी मिलने लगे हैं और उत्पादन बढ़ने लगा है।

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नर्सरी में प्रो ट्रे का उपयोग

 

प्रो ट्रे में तैयार पौध कई मायनो में खेत में तैयार पौध से बेहतर होती हैं। नर्सरी से संरक्षित वातावरण में आधुनिक तरिके से रोगरहित और उच्च गुणवत्ता वाली पौध तैयार की जा सकती हैं। प्रो ट्रे में बीज का जमाव और अंकुरण अच्छा होता हैं, वहीं पर्याप्त स्थान मिलने के कारण विकास भी बेहतर होता हैं। नर्सरी में किट, बीमारी और खरपतवार की समस्या कम रहने की वजह से महंगे और हाइब्रिड बीजों का बेहतर उपयोग किया जा सकता हैं। पौध को ट्रे से निकालकर आसानी से रोपण किया जा सकता हैं। कद्दूवर्गीय फसलों में तो यह विशेष रूप से लाभकारी हैं।

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इन सामग्रियों की जरूरत

प्रो ट्रे:-

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पोली- प्रोपेलीन से बनी हुई विभिन्न केविटी वाली ट्रे बाजार में आती हैं। सब्जी की नर्सरी लगाने के लिए 98 केविटी युक्त ट्रे का प्रयोग किया जाता हैं। ट्रे का प्रयोग 4-5 बार कर सकते हैं।

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कोकोपिट

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भूरे रंग का यह पदार्थ नारियल के रेशों में खनिज लवणों को मिलाकर कृत्रिम मिट्टी के तोर पर तैयार किया जाता हैं। यह अधिक जल ग्रहण व वायुसंचार के कारण जड़ों का बेहतर विकास करता हैं।

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वर्मीकुलाइट:-

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यह एक माइका हैं, जो की हल्का वजनयुक्त पदार्थ हैं। इसमें कैल्शियम व मैग्नीशियम तत्व भी पाए जाते हैं। यह हल्के रंग का होता हैं।

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परलाइट:-

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इसका उपयोग वायु संचार व जलधारण क्षमता को बढ़ाता हैं। परलाइट सफेद रंग का होता हैं जो अभ्रक और एल्युमिनियम सिलिकेट चट्टानों के टुकड़ो को अधिक ताप पर तपाकर तैयार किया जाता हैं।

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फसल के चयनित किस्मों के उन्नत बीज, जो स्थानीय जलवायु के आधार पर इस्तेमाल के लिए कृषि अधिकारीयों द्वारा बताए जाए।

इस तरह लगाए पौध:-

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नर्सरी लगाने से करीब 12 घंटे पहले कोकोपिट पानी में भिगो लेना चाहिए और अधिक जल को नितरने देना चाहिए। बीज बुवाई से पहले ट्रे मृदा रहित मिश्रण भरा जाएगा, जो कोकोपिट, वर्मीकुलाईट और परलाइट के 3:1:1 के अनुपात में हो। ध्यान रहे की यह अनुपात आयतन आधारित हो न की भार आधारित।

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बीज की बुवाई

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मिश्रण से भरी ट्रे में पेन्सिल जितनी मोटी लकड़ी या अंगुली की मदद से 1.5 सेमि गहरा गड्डा कर उसमे बीज बो देना चाहिए। बुवाई के बाद ट्रे को वर्मीकुलाईट की मोटी परत बिछाकर ढक देवे।

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सिंचाई

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ट्रे में पौधशाला लगाने से पहले सिंचाई गुणवत्ता जाँच ले। जल का पीएच मान 5.5 से 6.5 के बिच हो और बाईकार्बोनेट्स का स्तर 60-100 पीपीएम के बिच हो। इसमें सिंचाई झारे से करनी चाहिए। सिंचाई सुबह के समय ही की जाए। दोपहर बाद सिंचाई करने पर ट्रे में कवकजनित बिमारियों के प्रकोप की आशंका रहती हैं। सही प्रकार से फर्टिगेशन करें। बीज के अंकुरण के बाद फर्टिगेशन दिया जाए।

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पौध का  स्थानांतरण मुख्य खेत में

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सब्जियों की पौध 27 से 32 दिन में मुख्य खेत में स्थानांतरण योग्य हो जाती हैं। स्थनांतरण से 2-3 दिन पहले सिंचाई करना बंद कर दे ताकि पौधे में कठोरता आ जाए। पौधे को सावधानी से प्लग के बाहर   इस तरह निकाले की हाथ के अंगूठे एवं अंगुली के हल्के दबाव से खींचते हुए मृदा रहित मिश्रण का ढेला जड़ क्षेत्र सहित बाहर आ जाए। खेत में लगते समय पौध दबाकर लगाए।

स्त्रोत:- राजस्थान पत्रिका

 

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