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टर्कीकम लीफ ब्लाइट रोग का मक्का में प्रकोप एवं नियंत्रण

टर्कीकम लीफ ब्लाइट
Written by bheru lal gaderi

मक्का में टर्कीकम लीफ ब्लाइट फफूंद से फैलता है यह रोग सबसे पहले निचली पत्तियों पर छोटे, पानी से भरे हुए धब्बे दिखाई पड़ते हैं। धीरे-धीरे बड़े होकर धूप से जले हुए, सिगार के आकार के अलग से हरे रंग के पानी से भरे किनारों वाले परिगलित घावों में बदल जाते हैं। यह घाव बाद में आपस में मिल जाते हैं और पत्ती तथा डंठल के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लेते हैं, जिसके कारण पत्ती की मृत्यु हो जाती है तथा वह झड़ जाती है। यदि संक्रमण भुट्टे के विकसित होने की अवस्था के दौरान पौधों के ऊपरी हिस्से तक फैल जाता है तो उपज को गंभीर हानि (70% तक) हो सकती है।

टर्कीकम लीफ ब्लाइट

टर्कीकम लीफ ब्लाइट के उत्प्रेरक

यह कवक शीत ऋतु में मिट्टी या पौधों के अवशेषों में जीवित रहता है। वर्षा, ओस ,उच्च आर्द्रता तथा सामान्य तापमान कवक के प्रसार के लिए अनुकूल होता है। हवा तथा बारिश के छीटों के साथ यह मक्के के छोटे पौधों में मिट्टी से निचली पत्तियों पर फैलता है। बारिश की परिस्थितियां तथा कृषि करने के ख़राब तरीकों से इसका अन्य पौधों तथा खेतों में प्रसार होता है। बढ़ाने के मौसम के दौरान संक्रमण के लिए आदर्श तापमान 18 से 27 डिग्री का होता है। 16 से 18 घंटे तक की लंबी अवधि तक पत्तियों का गीलापन भी आवश्यक हैं। इसके अलावा टर्कीकम लीफ ब्लाइट कवक अपना प्रकोप ज्वार पर भी करता हैं।

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निवारक उपाय

टर्कीकम लीफ ब्लाइट की प्रतिरोधक या सहनशील किस्मों का चुनाव करें। संतुलित पोषक तत्वों की पूर्ति सुनिश्चित करें तथा नाइट्रोजन उर्वरकों के अत्यधिक प्रयोग से बचे। खेतों में तथा उनके आसपास से नियमित रूप से खरपतवार नियंत्रण करते रहे। टर्कीकम लीफ ब्लाइट के अत्यधिक प्रकोप से बचने के लिए सोयाबीन, बींस या सूरजमुखी के साथ फसलचक्र अपनाए, पौधों के अवशेषों को दबाने के लिए गर्मियों में गहरी जुताई करें।

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जैविक नियंत्रण

टर्कीकम लीफ ब्लाइट रोग के संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए जैविक रूप से ट्राइकोडर्मा हरजियेनम या बेसिलस सब्टिलिस पर आधारित जैव-कवररोधको का विभिन्न चरणों पर प्रयोग किया जा सकता है। सल्फर के मिश्रण का भी प्रयोग प्रभावी होता है।

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रासायनिक नियंत्रण

रोकथाम के उपायों के साथ सावधानीपूर्वक खेती प्रथाओं के समावेश वाले संभावित उपायों की सलाह दी जाती है। रोग को नियंत्रित करने के लिए एक प्रतिरोधात्मक कवकरोधी का प्रयोग प्रभावी हो सकता है। इसके विपरीत, कवकरोधकों का लक्षणों के दिखाई देने पर भी प्रयोग किया जा सकता है। कार्बोक्सिन, क्लोरोथेलोनिल या मैंकोजेब वाले उत्पादों का प्रयोग किया जा सकता है। और साथ ही बीजोपचार भी करना चाहिए।

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