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जैतून की फसल से मुनाफा लेने की तैयारी

जैतून
Written by bheru lal gaderi

नावां उपखंड मुख्यालय और आसपास के क्षेत्र में भूमिगत जल खारा होने से फसल की बेहतर पैदावार नहीं हो पाती है। इसलिए किसान बारिश के आधार पर ही खेती करते हैं। ऐसे में क्षेत्र के किसान गौरव साबुन ने अपनी कृषि भूमि की मिट्टी पानी जांच कराई, जिसके आधार पर उन्हें जैतून(Olive) की फसल लगाने के लिए कहा गया। उन्होंने 4 साल पहले जैतून के पौधे लगाएं जिनकी बेहतर बढ़वार हुई है।

जैतून

1 साल बाद फल फूल आने की उम्मीद

किसान को साल भर बाद उत्पादन की उम्मीद है। किसान बताते हैं कि उन्होंने करीब 25 बीघा जमीन पर जैतून के 3600 पौधे लगाएं ये पौधे उन्होंने ढिंढोली स्थित राजस्थान ओलिव कल्टीवेशन लिमिटेड (आरओसीएल) से लिए थे। इनकी सार संभाल के लिए वे इजराइल के वैज्ञानिकों की मदद लेते हैं। यह वैज्ञानिक हर दो माह में फसलों का जायजा लेकर जरूरी दिशा-निर्देश देते हैं।

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साबू बताते हैं कि जैतून के पौधों में पानी, खाद, तने की टहनियों को काटने का कार्य नियमित करना होता है। अब उन्हें अगले साल पौधों में फूल और उसके बाद फल लगने की उम्मीद है। पौधों पर फल लगने के बाद आरओसीएल की ओर से निशुल्क तेल निकाल कर दे दिया जाएगा। जिससे वह बाजार में बेच सकेंगे

जैतून की पत्तियों से बनेगी चाय

इसके पौधे की पत्तियों से चाय भी बनाई जा सकती हैं।  जैतून की चाय ग्रीन टी की तरह होती हैं, लेकिन अधिक फायदेमंद होती हैं। इसे पीने से रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने के अलावा कई बीमारियों से लड़ने में मदद मिलती हैं।

पौधों की आयु 100 साल

जैतून की फसल को परिपक्व होने में कम से कम 5 साल लगते हैं, लेकिन इसके बाद पौधों का जीवन करीब सौ साल होता है।  जैतून के एक पौधे से 1 साल में 20 किलो फल मिलते हैं, जिनसे रिफाइंड प्रोसेस के बाद 3 लीटर तेल निकलता है। साबू को 3600 पौधों से सालाना 10800 लीटर तेल मिलने की उम्मीद है।

वह बताते हैं कि जैतून के पौधों को ड्रिप से पानी दिया जाता है। एक पौधे के लिए लगभग चार ड्रिप लगाए जाते हैं। एक पौधे को 1 दिन में लगभग 24 लीटर पानी दिया जाता है, जिससे पौधा अच्छा विस्तार करता है। पानी की कमी या अधिकता होने पर पौधों को नुकसान हो सकता है।

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लेखक :-

अरुण जोशी – रिपोर्टर
नावां सिटी
नागौर

स्रोत :-

एग्रोटेक
राजस्थान पत्रिका
वेबसाइट – rajasthanpatrika

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