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जीवाणु खाद (कल्चर)- फसलों में उपयोग विधि

Written by bheru lal gaderi

जीवाणु खाद ऐसे प्राकृतिक जीवाणुओं का समूह है जिसको लिग्नाइट धारक के माध्यम से वैज्ञानिक विधियों से तैयार कर पोलिथिन की थैली में पैक कर किसानों को बीज उपचार, जड़ोपचार, भूमि उपचार  हेतु उपलब्ध कराया जाता है।

यह जीवाणु वायुमंडल व भूमी में विद्यमान निष्क्रिय तथा अघुलनशील तत्वों को उपयोग कराते हैं। यह ये सस्ते और हानि रहित होते हैं। इन से बीजोपचार करने से पौधों की जड़ों के आस-पास की भूमि में जीवाणुओं की संख्या प्रचुर मात्रा में बढ़ जाती है। जीवाणु खाद में इन लाभदायक जीवाणु की संख्या 1 ग्राम में 10 करोड़ से अधिक रखी जाती हैं। यह जीवाणु सामान्यता तीन प्रकार के होते हैं।

राइजोबियम

जीवाणु खाद

Image Credit – Bharat Biocon Pvt Ltd
Raigarh, Chhattisgarh

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यह जीवाणु खाद समस्त दलहनी फसलों में काम में लिया जाता है। इस में राइजोबियम लेगुमिनोसेरम जीवाणु पाए जाते हैं। यह जीवाणु पौधों की जड़ों में ग्रंथियां बनाकर रहते हैं तथा प्रत्येक ग्रंथि में इन जीवाणुओं की संख्या लाखों में होती है। यह जीवाणु वायुमंडल में उपस्थित स्वतंत्रता नत्रजन को ग्रहण कर उसे नाइट्रोजन यौगिकों (नाइट्रेटस) में बदल देते हैं।

इसका उपयोग पौधे एवं जीवाणु दोनों करते हैं। बदले में जीवाणु पौधों से कार्बोहाइड्रेट्स प्राप्त करते हैं वह अपना विकास करते हैं। अलग-अलग दलहनी फसलों के लिए अलग-अलग राइजोबियम कल्चर काम में लिया जाता है अर्थात यह कल्चर फसल विशेष हेतु अलग-अलग होता है।

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एजोटोबैक्टर

जीवाणु खाद

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यह जीवाणु खाद समस्त बिना दाल वाली फसलों के लिए काम में लिया जाता है। इसके जीवाणु बीज पर लगाए गए कल्चर के माध्यम से मृदा में जाकर अपनी कॉलोनी बना लेते हैं, एवं मुक्त रूप से मृदा व जोड़ों के आस पास रहते हैं।

यह जीवाणु वातावरण की नत्रजन को ग्रहण कर स्वयं के लिए प्रोटीन का निर्माण करते हैं। यह प्रोटीन कुछ समय बाद मिट्टी में स्रावित करते हैं, जिससे पौधों की उपयोग योग्य नत्रजन की मात्रा में वृद्धि होती हैं। यह जीवाणु वृद्धि नियंत्रण रसायन भी स्रावित करते हैं, जिससे बीजों की अंकुरण क्षमता व जड़ों के फैलाव में वृद्धि होती है।

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फास्फेट विलायक जीवाणु (पी.एस.बी. कल्चर)

जीवाणु खाद

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फसलों को फास्फोरस मुख्यतः डीएपी एवं सिंगल सुपर फास्फेट के रूप में दिया जाता है। जो दी गई फास्फोरस की मात्रा का बहुत बड़ा भाग जमीन में अघुलनशील अवस्था में रह जाता है। जिसे पौधे ग्रहण नहीं कर पाते हैं।

पी.एस.बी. कल्चर में उपस्थित जीवाणु फास्फोरस को घुलनशील बनाकर पौधों को फास्फोरस उपलब्ध करवाते हैं। यह जीवाणु खाद सभी फसलों में काम आती है। इस जीवाणु खाद के उपयोग से विभिन्न फसलों में दी जाने वाली फास्फोरस की मात्रा में कमी की जा सकती हैं।

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बीज उपचार

आवश्यकता अनुसार पानी में 250 ग्राम गुड़ घोले। इससे ठंडा कर इसमें 600-600 ग्राम राइजोबियम एजोटोबैक्टर पी.एस.बी. जीवाणु खाद घोलें। अब इस घोल को एक हेक्टर क्षेत्र के बीजों पर छिड़काव करते हुए हल्के हाथों से बीजों को पलटते जाएं।

बीजों को किसी छायादार स्थान पर सुखा कर शीघ्र ही बुवाई कर दे। यदि बीजों को फफूंदनाशक या कीटनाशक से उपचारित करना हो तो पहले फफूंदनाशक से व बाद में कीटनाशक से बीज उपचारित कर बुवाई करनी चाहिए।

  1. पानी व गुड़ को घोलकर गर्म करें।
  2. गोल को ठंडा कर जीवाणु मिलाएं।
  3. जीवाणु खाद को बीज पर लगाएं।
  4. छाया में सुखाकर बुवाई करें।

जड़ोंपचार

पौधे की जड़ों को रोपाई से पूर्व जीवाणु खाद के घोल में लगभग 15 मिनट तक डुबोकर रखें तथा बाद में इनकी भूमि में रोपाई करनी चाहिए।

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भूमि उपचार

ढाई किलो एजेक्टोबेक्टर व ढाई किलो पी.एस.बी. जीवाणु खाद को 25 किलो गोबर मिश्रित मिट्टी में अच्छी प्रकार से मिलाकर प्रति हेक्टेयर की दर से पूरे खेत में सायकाल छिड़काव फसल की बुवाई करें।

सावधानियां

जीवाणु खाद को पैकेट पर लिखी फसल के लिए एवं पैकेट पर अंकित तिथि से पूर्व प्रयोग करें। जीवाणु खाद को गर्मी तथा धुप से बचा कर रखें एवं उसका भंडारण ठंडे स्थान पर रखें। जीवाणु खाद को रासायनिक उर्वरकों एवं दवा के साथ नहीं मिलाना चाहिए। जड़ों में मौजूद यह घाटे राइजोबियम द्वारा निर्मित यूरिया बनाने की फैक्ट्रियां हैं।

जीवाणु उपयोग के लाभ

  • फसलों की उत्पादकता में टिकाऊपन।
  • मृदा स्वास्थ्य में सुधार।
  • मृदा की भौतिक एवं रासायनिक दशा में सुधार।
  • रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता में कमी।
  • प्रति इकाई लागत में अधिक पोषक तत्वों की पूर्ति।
  • पर्यावरण के लिए सुरक्षित जैविक खेती का आवश्यक अंग।

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Author:-

मुकेश कुमार जाट

जयपुर

सभार :-

कृषि भारती

AF-47,घीया मार्ग, बनीपार्क

जयपुर- 302016

मोबाइल – 09983353511

ईमेल – krishibharti@gmail.com

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