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जीरो बजट खेती व कौशल विकास पर जोर

Written by bheru lal gaderi

खेतों से अधिक उपज लेने के लिए किसान रासायनिक उर्वरककीटनाशकों का उपयोग करता है। इससे खेती की लागत बढ़ती है और मनुष्य समेत पर्यावरण की सेहत भी ख़राब होती है। प्रदेश में ऊसर भूमि, असुरक्षित उत्पादन और रोगों की स्थितियां बन रही है। बीकानेर स्थित स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. बी.आर. छीपा इस भयावहता से निपटने के लिए जीरो बजट खेती को सर्वोत्तम उपाय मानते हैं। पेश है, उनसे हुई बातचीत के अंश

स्वामी केशवानंद राजस्थान कृषि विश्वविद्यालय

जीरो बजट खेती से लागत घटा मुनाफा बढ़ाने की कवायद

आज का दौर आधुनिक खेती का है और तकनीक इसका अहम् पहलु है। खेती में तकनीक के इस्तेमाल, यंत्रों के निर्माण, वैज्ञानिक विधियों के विकास के लिए युवाओं और वैज्ञानिकों की जरुरत है।

एस.के.आर.यु. कृषि व इससे जुड़े क्षेत्रों में कौशल विकास पर फोकस कर रहा है। इसके आलावा विवि किसान की लागत को कम कर अधिक उत्पादन के प्रयास कर रहा है।

जीरो बजट खेती

विवि जीरो बजट खेती पर फोकस कर इसे बढ़ावा दे रहा है। इसे प्राकृतिक खेती, जैविक खेती भी कहते है। इस खेती में किसान को बाजार से खाद,  उर्वरक व कीटनाशक खरीदने की जरुरत नहीं होती है। इन्हे वह खेत व उसके घर में मौजूद सामग्री से ही तैयार कर सकता है।

इसमें गोबर-गोमूत्र, बेसन, गुड़, मिट्टी आदि पदार्थों का इस्तेमाल किया जायेगा। ऐसे में न सिर्फ रसायनों के उपयोग से बचा  जा सकता है, बल्कि खाद, उर्वरक की लगत भी शून्य हो जाएगी। इससे मुनाफा बढ़ेगा और उत्पाद भी जैविक होगा।

मिश्रित खेती पर जोर

खेती व पशुपालन एक-दूसरे के पूरक व्यवसाय है। मिश्रित खेती पर बल दिया जायेगा। गाय को खेती से जोड़ने का प्रयास किये जायेंगे। वहीं कृषि जुड़े कुक्कुट पालन, मत्स्य पालन आदि व्यवसाय अपनाने पर भी बल दिया जायेगा। उद्यानिकी के तहत अनार, एलोविरा, खीरा, खजूर जैसी फसलों को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है।

जैविक खेती पर करेंगे शोध

ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसान जैविक खाद का प्रयोग करते है। अच्छा मुनाफा होने से जैविक खेती को लेकर किसान में रीजन देखने को मिल रहा है। लेकिन मिट्टी, फसल, जलवायु, में जैविक खाद कितनी व किस तरह इस्तेमाल की जाए, इस बारे में बहुत अधिक विज्ञानं सम्मत जानकारी उपलब्ध नहीं है। जैविक खाद का इस्तेमाल वैज्ञानिक रूप से करने के लिए जैविक खेती पर शोध की दिशा में आगे बढ़ रहे है।

केवीके होंगे और बेहतर

कृषि विज्ञानं केंद्र को खेती के सर्वश्रेष्ठ केंद्र के रूप में विकसित करने का प्रयास है। केवीके को और बेहतर बनाया जायेगा। फील्ड-डे संप्रत्यय के तहत खेत पर ही प्रशिक्षण दिया जा सके, इसकी व्यवस्था की जा रही है। यह व्यवस्था नि:शुल्क रहेगी।

सफल किसानों की कहानियों से करेंगे प्रेरित

खेती-किसानी में सफल और नवाचार कर रहे किसानों की कहानियों को लोगों तक पहुंचाने के प्रयास किये जायेंगे। इसके लिए संगोष्ठियों, सेमिनारों, और दृश्य-श्रव्य और मुद्रित साहित्य के जरिये किसानों को प्रेरित किया जायेगा। विवि की और से फरवरी में कृषि मेला आयोजित किया गया था, जिसमें आठ राज्यों के प्रगतिशील किसानों को बुलाया गया था। इसमें भी सफल किसानों की स्टोरी बुक में प्रकाशित की गई थी। आगामी प्लान के तहत आयोजित सेमिनारों, गोष्ठियों में 20 फीसदी हिस्सेदारी प्रगतिशील किसानों की रहेगी।

जलवायु परिवर्तन से खजूर को बचाने का प्रयास

मरुधरा में खजूर सफल रहा है और उत्पादन भी बेहतर है। लेकिन जलवायु के प्रभाव से असर भी पड़ रहा है। हम ऐसे शोध करेंगे की  जिससे खजूर की खेती को वातावरणीय प्रभावों से अप्रभावित रखने के तरीके विकसित किए जा सकें।

विशेष चर्चा

डॉ. बी. आर. छीपा

कुलपति

स्वामी केशवनन्द राजस्थान कृषि विवि, बीकानेर

एग्रो रिपोर्टर (एग्रोटेक राजस्थान पत्रिका)

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