agriculture

जीरे की फसल में कीट एवं रोग से बचाव

जीरे की फसल में कीट एवं रोग से बचाव
Written by bheru lal gaderi

जीरे की फसल एक प्रमुख नकदी फसल है। संतुलित खाद के साथ-साथ फसल को बीमारियों को कीटों से बचाव करना बहुत जरूरी है। जीरे का पौधा काफी नाजुक होता है। थोड़ी सी भी लापरवाही जीरे की फसल को बर्बाद कर सकती है। जीरे की फसल में विभिन्न प्रकार के कीट तथा बीमारियां आने का डर हमेशा रहता है जिनका सही समय पर सही पहचान कर निदान नहीं किया जाए तो फसल पूर्णता चौपट हो सकती है। किसान भाई उचित समय पर उचित प्रबंधन कर फसल को नुकसान से बचाएं।

जीरे की फसल में कीट एवं रोग से बचाव

Image credit- Ayurveda Home and Remedies with Nature

बीमारियां

झुलसा रोग

अल्टरनेरिया बर्नसी नामक फफूंद के कारण आने वाली जीरे की सबसे खतरनाक बीमारी है। इसको कालिया नाम से भी जाना जाता है। यह बीमारी मौसम व ज्यादा कोहरा होने पर आने की संभावना ज्यादा रहती है। यदि आसमान में बादल छाए रहते हैं तो इस बीमारी के आने की संभावना और ज्यादा हो जाती है। यह बीमारी घेरों में दिखाई देती है। खेत में जगह-जगह काले रंग के घेरे दिखाई देते हैं।

Read also:- फसल सुरक्षा पद्धति की विधिया एवं उपयोग

उपचार

हाइब्रिट्स (HYPRITZ) दवाई का प्रयोग जीरे की 40 से 45 दिन की अवस्था पर पहला और दूसरा छिड़काव 55- 60 दिन की अवस्था पर एक एम.एल. प्रति लीटर पानी के हिसाब से करने पर जीरे की फसल को प्रमुख बीमारियों से बचाया जा सकता है अथवा टसल का 4 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव कर सकते हैं।

छ्छ्या (पाउडरी मिल्ड्यू) रोग

यह बीमारी ऐरीसायफी पोलिगोनी नामक फंगस के कारण आती है। इसी बीमारी के लिए, गर्म व न, मौसम अनुकूल रहता है। इस बीमारी में पत्तियों व तने सफेद चूर्ण जैसा इकट्ठा हो जाता है। तने पर इसके लक्षण दिखाई देते हैं। बाद में जीरे के बीज के ऊपर भी सफेद धब्बे दिखाई देते हैं।

उपचार

इस बीमारी के उपचार के लिए कोसोवेट डीएफ (COSAVET-DF) 3 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा टसल 4 ग्राम प्रति लीटर पानी अथवा हाईब्रिट्स 1 एम.एल. पानी के हिसाब से 10 से 15 दिनों के अंतर पर छिड़काव करने पर जीरे की फसल को छाछ्या बीमारी से बचाया जा सकता है।

Read also:- सब्जियों की जैविक विधि से उन्नत खेती

उकठा (विल्ट)

यह एक बीज जनित तथा मृदा जनित बीमारी है। यह फ्यूजीरियम ओक्सीस्पोरम नामक फंगस की वजह से पैदा होने वाली जड़ों के प्रमुख बीमारी है। इसमें पौधा पहले मुरझाता जाता है और बाद में सूख जाता है।

उपचार

टॉपगन डीएफ (TOPGUN-DF) (कॉपर आक्सीक्लोराइड) 400 ग्राम प्रति एकड़ या पर्ल एस सी (PEALRL-SC) 250 एम.एल. प्रति एकड़ के हिसाब से जमीन में डालें।

जीरे की फसल में कीट

माहू-तेला

ये छोटे-छोटे रस चूसक कीट होते हैं जो पत्तियों का रस चूस कर फसलों को कमजोर बनाते हैं।

उपचार

स्पाइक (SPIKE) 0.5 ग्राम प्रति लीटर पानी या प्रोन्टो (PRONTO) 4 ग्राम प्रति लीटर पानी या प्राइमा (PRIMA) 0.5 ग्राम/1 लीटर पानी के हिसाब से छिड़काव करें।

Read also:- देशी गुलाब की उन्नत खेती एवं उत्पादन तकनीक

Facebook Comments

About the author

bheru lal gaderi

Hello! My name is Bheru Lal Gaderi, a full time internet marketer and blogger from Chittorgarh, Rajasthan, India. Shouttermouth is my Blog here I write about Tips and Tricks,Making Money Online – SEO – Blogging and much more. Do check it out! Thanks.