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चूहों से बचाए फसल एवं भंडारण में रखे बीज को

Written by bheru lal gaderi

बीजों के प्रसंस्करण में इनके सुरक्षित भंडारण का विशेष महत्व हैं, फसलों के बेहतर उत्पादन में कृषकों द्वारा बीजों की गुणवत्ता तथा अच्छी किस्मों के चयन पर विशेष ध्यान दिया जाता हैं। यहाँ तक की कृषि की ुअनंत तकनीकों का समावेश बीजों को तैयार किया जाता हैं, ततपश्चात इन्ही बीजों का भण्डारण कर आगामी मौसम व अगले वर्ष तक कृषक के स्तर पर घरों में भण्डारण कर रखा जाता हैं। भण्डारण बीज में विभिन्न कीटों, नमी व फफूँद तथा सूक्ष्मजीवों के अलावा चूहों द्वारा अत्यधिक हानि की जाती हैं, चूहे न केवल बीजो को खाते हैं उससे बीस गुणा से भी अधिक बीज को अपने मल-मूत्र, बालों तथा अपने मृत शरीर से भी दूषित करते हैं। घरों, गोदाम एवं भंडार गृहों में चूहों की निम्नवत प्रमुख प्रजातियॉ पाई जाती हैं:

चूहों

  1. चुहिया (मसमस्कूलस)
  2. छोटी घुस (बेन्डिकोटा बैंगालेंसिस)
  3. बड़ी घुस (बेन्डिकोटा इंडिका)
  4. विदेशी चूहा (रेटटस नार्वेजिक्स)

नियंत्रण की विधियां

यांत्रिक नियंत्रण

फसल की कटाई बाद खेत खाली हो तो खेतों में पानी लगाने से या सिंचाई करने से वहुहे बिल से बाहर आ जाते हैं ऐसे समय इन्हे लाठियों से मार दे।

पिंजरों के प्रयोग से चूहों को पकड़कर पानी में डुबोकर मार दे। इस क्रिया में लाने वाले पिंजरों को धोकर साफ कर ले ताकि इनमे किसी की गन्ध न आए।  पिंजरों में ऐसे खाद्य पदार्थ रखे जिससे चूहे आकर्षित हो। पिंजरों को ऐसे स्थान पर रखे जहाँ चूहों का आना-जाना लगा रहता हो। पहले 2-3 चूहों को पिंजरों में न फसाए ताकि इन्हे पिंजरों में आने- जाने की आदत पड़ जाए।

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रासायनिक नियंत्रण

जिंक फॉस्फोइड एक अत्यंत प्रभावी चुहानाशक दवा हैं जिसे खाने से चूहे मर जाते हैं। जिंक फॉस्फोइड से उपचारित करने से पूर्व जीवित बिलों की पहचान करना आवश्यक हैं। जीवित बिलों की पहचान के लिए पहले बिलों को मिटटी से बंद कर दें। दूसरे दिन जो बिल खुले मिले उसमे विष रहित चुग्गा दो दिन तक रखे। जिससे इनको चुग्गा खाने की आदत पड़ जाए। इसके बाद जहरीला चुग्गा उन्ही स्थानों पर रखे, जहाँ विष रहित चुग्गा रखा गया था। इससे चूहे बड़ी संख्या में चुग्गा खाकर मर जायेंगे। चुग्गा बनाने के लिए जिंक फॉस्फेट दवा दो भाग, आटा या टुकड़े किए गए अनाज के 96 भाग एवं दो भाग खाने का तेल लें और डंडी से अच्छी तरह मिलाए। यदि जिंक फॉस्फेट से उपचार के उपरांत भी इनकी संख्या बच जाती हैं तो  पुनः फॉस्फाइड युक्त चुग्गा नहीं खाते, क्योंकि ये बेड शाइनेड विकसित कर लेते हैं अतः बचे हुए चूहों के नियंत्रण हेतु ब्रोमोडिलियोंन आंतचन रोधी चुहानाशक दवा को काम में लिया जा सकता हैं। यह दवा बाजार में विभिन्न नामों जैसे रोबान आदि के नाम से मिलतीं हैं इस दवा को एक बार खाने से चूहा 3-4 दिन बाद मर जाता हैं। इस दवा के उपयोग के लिए चूहों के बिलों एवं आने- जाने के रास्तो का पता लगाना चाहियें। इसके बाद प्रत्येक जीवित बिल में एक केक डाल देना चाहियें। इस प्रकार चूहों के आने- जाने के रास्तों पर 4-5 मीटर के अंतराल पर जगह- जगह 100 ग्राम केक के टुकड़े पुनः डाल देने चाहियें। केक रखने का कार्य सायकल में करना चाहियें। इससे प्रभावी नियंत्रण हो जाता हैं।

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चूहा मार अभियान

चूहों के बिल दूर-दूर तक खेतों, नालियों, मेढ़ों पर खुलते हैं जो अंदर ही अंदर एक दूसरे से जुड़े रहते हैं। चूहे इन बिलों के रास्तो का उपयोग समय-समय पर बदल-बदल कर करते हैं। ये बिल न केवल खेतों पर बल्कि गांव की खाली भूमि पर भी होते हैं। यदि कुछ लोग चूहों को मार भी ले तो दूसरे खेतो से आकर हानि पहुंचाते हैं। इसलिए इनके नियंत्रण के लिए गांव के स्तर पर अभियान चलाना चहिए। इस अभियान का सही समय खरीफ में मई-जून व रबी में नवम्बर-दिसम्बर महीने होते हैं। क्योंकि इस समय खेत तो खाली होते ही हैं परन्तु किसानों को भी फुर्सत होती हैं। इन दिनों में खेतों, मेढ़ों पर, पानी के नालों और अन्य स्थानों पर इन बिलों को आसानी से देखा जा सकता हैं और उनमे दवाइयां डाली जा सकती हैं। कुछ चूहे अपने बिलों को तजि मिट्टी से ढक देते हैं ऐसे बिलों की मिट्टी हटाकर सुरंग में विषयुक्त दाने रखकर बिल बंद कर सकते हैं।

धूमीकरण विधि से चूहों का नियंत्रण

चूहों को धूमीकरण से भी मारा जा सकता हैं। विशेषकर जो चूहे रासायनिक नियंत्रण विधि के अभियान में बच जाए उन्हें जहरीली गैस छोड़ने वाली एल्युमिनियम फास्फेट दवाई की टिक्कियों से मारना चाहियें। इस विधि में भी एक दिन सभी बिलों को बंद कर दे व अगले दिन जो बिल खुला मिले उसमे इस दवाई की ३ ग्राम वाली आधी टिक्किया (सेल्फॉस, क्विफोस, फसफ्यूम)प्रति बिल के हिसाब से डालकर बिलों को मिट्टी से बंद कर दे ताकि जहरीली गैस बिल में फेल जाए और चूहे मर जाए।

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सावधानियां

  • चूहे मारने वाली दवाई को खाने-पीने की वस्तुओं,बच्चों, जानवरों एवं पक्षियों की पहुंच से दूर रखे।
  • चूहे मारने की दवा को शरीर के किसी भी भाग से न लगने दे।
  • इस दवा को दानो पर लगाते समय दस्तानो का प्रयोग करे या किसी छड़ या खुरपी का प्रयोग करें।
  • विषयुक्त दाने बनाने के पश्चात् शरीर व हाथों को धोकर अच्छी तरह साफ कर ले।
  • बेट बनाने के लिए घर में प्रयोग लेन वाले बर्तन का कदापि प्रयोग न करें।
  • बची हुई बेट व मरे हुए चूहों को मिट्टी में गहरा दबा दे।
  • धूमीकरण का प्रयोग विशेषज्ञों की देख- रेख में करना चाहियें।

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