agriculture पशुपालन

चूजों का उचित प्रबंधन एवं उचित रख-रखाव

चूजों का उचित प्रबंधन एवं उचित रख-रखाव
Written by bheru lal gaderi

आज कुक्कुट पालन एक पूर्ण विकसित उद्योग का रूप ले चुका है। चूजों को पालने से लेकर अंडा उत्पादन तक इस उद्योग में पूर्ण सावधानी आवश्यक है। चूजे ही मुर्गी पालन का भविष्य निर्धारित करते हैं। अच्छी तरह से पाले गए चूजे भविष्य में अच्छा भंडार उत्पादन करते हैं तथा इनकी वृद्धि भी संतोषजनक रहती हैं। अधिक अंडे देने वाली मुर्गी को तैयार करने के लिए 4 तथ्यों को ध्यान में रखना अति आवश्यक है।

चूजों का उचित प्रबंधन एवं उचित रख-रखाव

Image Credit – WebMarathi

  • उत्तम गुणवत्ता वाली नस्ल के चूजे खरीदें।
  • उचित प्रबंधन
  • उत्तम एवं संतुलित आधार
  • प्रभावशाली रोग नियंत्रण कार्यक्रम

शुरू के 4 से 6 सप्ताह तक चूजों की देखभाल और प्रबंधन को सुडिंग कहते हैं। हेचरी से चूजे 47 घंटे के भीतर ब्रूडर हाउस में पहुंच जाने चाहिए। हमेशा स्वस्थ चूजे ही स्वीकार करें। 1 दिन का चूजा प्रारंभ में बाहरी वातावरण को स्वछता से सहन नहीं कर सकता हैं। उपकरणों की सहायता से कृत्रिम वातावरण दिया जाता है जो कि एक मुर्गी अपने चूजों को पालते समय देती हैं।

Read also:- स्वच्छ दूध उत्पादन की विशेषताएं एवं प्रबंधन

ब्रूडिंग के प्रकार

  • बैटरी ब्रूडिंग
  • होवर ब्रूडिंग

बैटरी ब्रूडिंग

इस ढंग से 3-4 सप्ताह तक चूजों को पिंजरे में पाला जाता है। उसके बाद चूजों को कमरों में वितरित कर दिया जाता है।

प्रति चूजे के लिए 0.093 मीटर स्क्वायर जगह की आवश्यकता होती है। यहीं इकाई सामान्यतः 5 टायरों के समूहों में होती है। इसे विद्युत गैस या केरोसिन ऑयल जलाकर गर्म किया जाता है। दाने व पानी के बर्तन प्रत्येक इकाई के अंत में किनारे पर लगाए जाते हैं। जिन कमरों में बैटरी ब्रूडरो को रखा जाता है। उनमें 15-20 डिग्री तापमान पर रखते हैं। इस प्रकार से चूजे पालने में कम स्थान की आवश्यकता होती है।

होवर ब्रूडिंग

होवर पिरामिड के आकार का होता है जिसमें उसे गर्म करने की इकाई लगी होती है। जिसे ब्रूडर हाउस में रखते हैं। 2 मीटर व्यास वाले होवर में 500 चूजे रखे जा सकते हैं। यह छोटे व बड़े दोनों मुर्गी-पालकों के लिए उपयोगी है। चूजों को बिना होवन के भी पाला जा सकता है। अत्यधिक सर्दियों में तापमान बनाने के लिए वेयर हाउस में 5 फीट की ऊंचाई पर कृतिम छत बनाकर चीजों को पालना सुविधाजनक रहता है। इस ढंग से कम मेहनत तथा कम खर्च में ही उचित तापमान बनाएं अन्यथा चीजों को सांस की परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

Read also:- जुनोसिस : पशुओं से मनुष्य में होने वाला संक्रामक रोग कारण एवं बचाव

चूजे लाने से पहले क्या करें:

  1. जिस जगह चूजे पालने हो उसे चूजे आने से 1 सप्ताह पहले अच्छे से साफ कर ले।
  2. दाना एवं पानी के बर्तन साफ कर लेने चाहिए। चूजे आने से पहले सभी उपकरणों की जांच कर लें।
  3. ब्रूडर हाउस के अंदर 2 इंच मोटा सूखा फफूंद रहित बिछावन डालना चाहिए। उसके ऊपर ५-६ परत अखबार की बिछड़ी चाहिए।
  4. तापमान की क्षय से रोकने व चूजों को ऊष्मा स्त्रोत तक सीमित रखने के लिए होवर ऑर्ड के रूप में टिन या गत्ते का प्रयोग किया जा सकता है। चूजों को इकट्ठा होने से बचाने के लिए कोनो को गोल कर दिया जाता है।
  5. चूजे लाने से 1 दिन पहले ब्रूडर को 35 डिग्री गर्म करना चाहिए।

चूजों के आने पर

  1. चूजों को पहले 15 घंटे शक्कर का घोल देना चाहिए। यह प्रथम सप्ताह में होने वाली मृत्यु को आधा कर देता है। इसके साथ इलेक्ट्रोहॉल तथा विटामिन 1 सप्ताह तक दे। चूजों को वुडन हाउस में पानी पिलाकर ही छोड़े। पहले 6 घंटे तक केवल पानी ही दें।
  2. 6 घंटे बाद अखबार, चिप फीडिंग दे या अंडा रखने वाली ट्रे पर पहले चिप मैश डाले उसके बाद उसके ऊपर मक्का का महीन दलिया 05 किग्रा 100 चूजों की दर से छिड़के। बाद में चूजों का आहार दे।
  3. पहले सप्ताह 24 घंटे प्रकाश डालें। उसके बाद समुचित प्रकाश कार्यक्रम के अनुसार ही प्रकाश दे। पहले सप्ताह प्रकाश की तीव्रता 1 फुट कैंडल रखें।
  4. यदि 10 दिन तक चूजों की वृद्धि संतोषजनक रहती है, तो होवर गार्ड हटा दें।
  5. समय-समय पर कीड़ों की दवाई अवश्य दें।
  6. 5 दिन बाद अखबार हटा दें तथा भूसी पर टहलने दें।
  7. फर्श पर दाना व पानी ना गिरने दे क्योंकि इससे फफूंद के पनपने की संभावना बढ़ जाती है। फलस्वरुप ब्रूडर न्यूमोनिया का प्रकोप चूजों  मैं हो सकता है।
  8. यदि रानीखेत का टीका हेचरी में ना लगा हो तो पहले सप्ताह में अवश्य लगा दे। 12-14 दिन की आयु पर रानीखेत रोग का टीका अवश्य लगाएं।
  9. समय-समय पर कुक्कुट विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लेते रहना चाहिए। किसी भी परेशानी के लक्षण देखते ही तुरंत कुक्कुट विशेषज्ञ की सलाह से उचित उपाय तथा उपचार कराना चाहिए।

यदि चूजे पालते समय इन छोटी-छोटी बातों का सावधानी से पालन किया जाए तो चूजों की बढ़वार तो ठीक रहती है, मृत्यु दर को भी काफी सीमा तक कम किया जा सकता है।

Read also:- एक बीघा जमीन सिर्फ एक गाय और एक नीम

प्रस्तुति

पीयूष तोमर, नीलम रानी, पंकज गुणवंत एवं सुनील कुमार

पशु चिकित्सा जन स्वास्थ्य एवं महामारी विज्ञान विभाग,

पशु मादा एवं प्रसूति रोग विभाग, लाला लाजपत राय पशु चिकित्सालय एवं

पशु विज्ञान विश्वविद्यालय, हिसार (हरियाणा)

Read also:- भेड़ पालन – ऊन एवं नमदा उद्योग एक लाभदायक व्यवसाय

Facebook Comments

About the author

bheru lal gaderi

Hello! My name is Bheru Lal Gaderi, a full time internet marketer and blogger from Chittorgarh, Rajasthan, India. Shouttermouth is my Blog here I write about Tips and Tricks,Making Money Online – SEO – Blogging and much more. Do check it out! Thanks.